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Haridwar News: छात्राओं ने परोसे उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन
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फोटो :
- उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज में हुआ गढ़भोज
- विद्यालय प्रबंधन समिति और शिक्षकों ने पकवानों का लिया आनंद
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। एसएमजेएन पीजी कॉलेज में बुधवार को गढ़भोज का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय अनाजों का संरक्षण व संवर्धन था। इसमें प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी व शिक्षकों ने छात्राओं के बनाए पकवान का आनंद लिया। विद्यार्थियों ने मंडुवा, झंगोरा, भट्ट और गहत जैसे स्थानीय अनाजों से बने पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति दी।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और जीवन-पद्धति का प्रतिबिंब है। उन्होंने युवा पीढ़ी से पारंपरिक विरासत से जुड़े रहने और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण में भूमिका निभाने का आह्वान किया। श्रीमहंत ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो दिनेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों में स्थानीय ज्ञान-विज्ञान और पीढ़ियों का अनुभव समाहित है। प्रो. शास्त्री ने कहा कि मंडुवा, झंगोरा जैसे स्थानीय अनाज कृषि और खाद्य परंपरा की धरोहर हैं। इनका संरक्षण स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को बचाना है।
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प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने गढ़भोज को उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति, कृषि, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को जोड़ने वाला अभियान बताया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ना चाहता है।
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सोनाली, वंशिका और माही को प्रथम पुरस्कार
विद्यार्थियों ने पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण, स्थानीय महत्व और पौष्टिक गुणों की जानकारी दी। अतिथियों ने उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की। बीएससी की सोनाली, वंशिका और माही को प्रथम पुरस्कार मिला, जबकि संगीता भट्ट और अन्य को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। कशिश रावत, नेहा जोशी और स्वीटी रानी ने तृतीय पुरस्कार जीता। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय माहेश्वरी समेत शिक्षक व छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
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- उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज में हुआ गढ़भोज
- विद्यालय प्रबंधन समिति और शिक्षकों ने पकवानों का लिया आनंद
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। एसएमजेएन पीजी कॉलेज में बुधवार को गढ़भोज का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय अनाजों का संरक्षण व संवर्धन था। इसमें प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी व शिक्षकों ने छात्राओं के बनाए पकवान का आनंद लिया। विद्यार्थियों ने मंडुवा, झंगोरा, भट्ट और गहत जैसे स्थानीय अनाजों से बने पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति दी।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और जीवन-पद्धति का प्रतिबिंब है। उन्होंने युवा पीढ़ी से पारंपरिक विरासत से जुड़े रहने और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण में भूमिका निभाने का आह्वान किया। श्रीमहंत ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो दिनेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों में स्थानीय ज्ञान-विज्ञान और पीढ़ियों का अनुभव समाहित है। प्रो. शास्त्री ने कहा कि मंडुवा, झंगोरा जैसे स्थानीय अनाज कृषि और खाद्य परंपरा की धरोहर हैं। इनका संरक्षण स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को बचाना है।
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प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने गढ़भोज को उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति, कृषि, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को जोड़ने वाला अभियान बताया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ना चाहता है।
सोनाली, वंशिका और माही को प्रथम पुरस्कार
विद्यार्थियों ने पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण, स्थानीय महत्व और पौष्टिक गुणों की जानकारी दी। अतिथियों ने उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की। बीएससी की सोनाली, वंशिका और माही को प्रथम पुरस्कार मिला, जबकि संगीता भट्ट और अन्य को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। कशिश रावत, नेहा जोशी और स्वीटी रानी ने तृतीय पुरस्कार जीता। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय माहेश्वरी समेत शिक्षक व छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।