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सताने लगा लॉकडाउन का डर, प्रवासी लौटने लगे घर
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बस में बैठकर जाती यात्री ।
- फोटो : HARIDWAR
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कोरोना की संभावित तीसरी लहर की शुरूआत ने ही लोगों को झकझोर दिया है। कोरोना संक्रमण दूसरी लहर की तुलना में कई गुना तेजी से फैल रहा है। इससे हरिद्वार सिडकुल स्थित औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर सहम गए हैं। दूसरी लहर के कटु अनुभव और घर लौटने में हुई परेशानियों को वो अब तक नहीं भूल पाए हैं। आने वाले दिनों में लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए प्रवासी मजदूरों ने धीरे-धीरे घर लौटना शुरू कर दिया है। रेलवे और बस स्टेशन पर दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, जयपुर, कानपुर, बिहार, कोलकाता, ओडिसा जाने वालों की संख्या बढ़ गई है।
हरिद्वार सिडकुल में 1100 कारखाने हैं। हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर यहां काम करते हैं। संक्रमण और लॉकडाउन की आशंका से समय रहते अपने-अपने घरों को लौटने लगे हैं। इससे ट्रेन और बसों में भीड़ बढ़ी है। ट्रेन से मुंबई की तरफ लौट रहे राजेश ठाकुर, सतीश राउत, अतेंद्र पटेल ने कहा कि प्रदेश में संक्रमण बढ़ रहा है। लॉकडाउन लगने के हालात बन रहे हैं। पिछली बार लॉकडाउन लगने के कारण काफी परेशानी हुई थी। इसी कारण समय रहते घर लौट आए हैं।
-अभी स्थिति नियंत्रण में है लेकिन संक्रमण जिस तरह बढ़ रहा है, उससे हालात खराब होने के आसार हैं। ऐसी परिस्थिति में घर से बाहर रहना उचित नहीं लग रहा था। कोरोना की पहली लहर के दौरान वहां काफी परेशानी हुई थी। - मुराद अली, शाहजहांपुर
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- इससे पहले की कंपनी काम बंद कर दे और लौटना मुश्किल हो जाए, खुद ही लौटने का फैसला कर लिया है। संक्रमण बढ़ने से लोग डरने लगे हैं, इसलिए लौट रहे हैं। पिछली बार की तरह इस बार लॉकडाउन में फंसकर परेशानी नहीं झेलना चाहते हैं। - मधु खत्री, पंजाब
कंपनी अभी बंद तो नहीं है लेकिन लॉकडाउन का भय सता रहा है। दोबारा लॉकडाउन लगने की आशंका सता रही है इसलिए मैं और मेरे कई साथी साथी अभी से ही वापस जा रहे हैं। - हेमंत कुमार, अमरोहा
- मार्च 2020 में महामारी की पहली लहर की कुछ दर्दनाक यादें आज भी जेहन में हैं। जब अचानक हुए लॉकडाउन ने मुझे धर्मनगरी में बिना काम के फंसा दिया था। ट्रांसपोर्टेशन बंद होने की वजह से मैं जैैसे-तैसे अपने गांव पहुंचा था। - मोहम्मद सेफ, गोरखपुर
बसों से जाने का सिलसिला बढ़ा
प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन का डर सताने लगा है। यही वजह है कि धर्मनगरी से पूर्वी उत्तर प्रदेश जानी वाली बसों में यात्रियों के जाने का सिलसिला बढ़ गया है। अमित दास ने बताया कि संक्रमण की लगातार खराब स्थिति के कारण कभी भी ऐसी घोषणा हो सकती है। वह सिडकुल की एक लोहे का सामान बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं। पिछली बार वह यहीं फंस गए थे। उनके चचेरे भाई की कोरोना से मौत हो गई थी। इस बार वह समय से घर लौटना चाहते हैं।
सहालग सीजन शुरू होने वाला है। संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। बसों में यात्रियों का दबाव है। हरिद्वार में दूसरे कई राज्यों की बसें भी आती हैं। - प्रतीक जैन, एआरएम
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हरिद्वार सिडकुल में 1100 कारखाने हैं। हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर यहां काम करते हैं। संक्रमण और लॉकडाउन की आशंका से समय रहते अपने-अपने घरों को लौटने लगे हैं। इससे ट्रेन और बसों में भीड़ बढ़ी है। ट्रेन से मुंबई की तरफ लौट रहे राजेश ठाकुर, सतीश राउत, अतेंद्र पटेल ने कहा कि प्रदेश में संक्रमण बढ़ रहा है। लॉकडाउन लगने के हालात बन रहे हैं। पिछली बार लॉकडाउन लगने के कारण काफी परेशानी हुई थी। इसी कारण समय रहते घर लौट आए हैं।
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-अभी स्थिति नियंत्रण में है लेकिन संक्रमण जिस तरह बढ़ रहा है, उससे हालात खराब होने के आसार हैं। ऐसी परिस्थिति में घर से बाहर रहना उचित नहीं लग रहा था। कोरोना की पहली लहर के दौरान वहां काफी परेशानी हुई थी। - मुराद अली, शाहजहांपुर
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- इससे पहले की कंपनी काम बंद कर दे और लौटना मुश्किल हो जाए, खुद ही लौटने का फैसला कर लिया है। संक्रमण बढ़ने से लोग डरने लगे हैं, इसलिए लौट रहे हैं। पिछली बार की तरह इस बार लॉकडाउन में फंसकर परेशानी नहीं झेलना चाहते हैं। - मधु खत्री, पंजाब
कंपनी अभी बंद तो नहीं है लेकिन लॉकडाउन का भय सता रहा है। दोबारा लॉकडाउन लगने की आशंका सता रही है इसलिए मैं और मेरे कई साथी साथी अभी से ही वापस जा रहे हैं। - हेमंत कुमार, अमरोहा
- मार्च 2020 में महामारी की पहली लहर की कुछ दर्दनाक यादें आज भी जेहन में हैं। जब अचानक हुए लॉकडाउन ने मुझे धर्मनगरी में बिना काम के फंसा दिया था। ट्रांसपोर्टेशन बंद होने की वजह से मैं जैैसे-तैसे अपने गांव पहुंचा था। - मोहम्मद सेफ, गोरखपुर
बसों से जाने का सिलसिला बढ़ा
प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन का डर सताने लगा है। यही वजह है कि धर्मनगरी से पूर्वी उत्तर प्रदेश जानी वाली बसों में यात्रियों के जाने का सिलसिला बढ़ गया है। अमित दास ने बताया कि संक्रमण की लगातार खराब स्थिति के कारण कभी भी ऐसी घोषणा हो सकती है। वह सिडकुल की एक लोहे का सामान बनाने वाली कंपनी में काम करते हैं। पिछली बार वह यहीं फंस गए थे। उनके चचेरे भाई की कोरोना से मौत हो गई थी। इस बार वह समय से घर लौटना चाहते हैं।
सहालग सीजन शुरू होने वाला है। संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। बसों में यात्रियों का दबाव है। हरिद्वार में दूसरे कई राज्यों की बसें भी आती हैं। - प्रतीक जैन, एआरएम