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40 साल बाद भी नहीं मिला भूमिधरी का अधिकार
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आर्दश टिहरी नगर के विस्थापित 436 परिवारों को 40 साल बाद भी भूमिधरी का अधिकार नहीं मिला है। क्षेत्र की सड़कों का बुरा हाल है। दशकों से सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ है। यातायात के लिए सुलभ ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं है। जंगली जानवर खेतीबाड़ी उजाड़ रहे हैं।
वर्ष 1982 में टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत 436 विस्थापित परिवारों को यहां बसाया गया। चार भागों में बसे विस्थापित परिवारों को उस वक्त क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं थी। उनके लिए एकदम नई और गर्म जगह थी। बावजूद परिवारों ने मेहनत के दम पर खेतीबाड़ी आबाद की। व्यवसाय शुरू किया। स्थानीय लोगों से मेलजोल बढ़ाया और उनके सुखदुख के साथी बन गए। हर समस्या का डटकर मुकाबला किया। लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों ने हमेशा उनकी उपेक्षा की। जिससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।
- विस्थापितों को 40 साल हो गए हैं। अभी तक भूमिधरी का अधिकार नहीं मिला है। जिससे विस्थापितों को भूमि पर बैंकों से खेती के लिए ऋण नहीं मिलता है। विस्थापितों के लिए यह एक गंभीर समस्या है। सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
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-विक्रम खरोला
- जंगल किनारे बसे होने से जंगली जानवर खेतों में घुस आते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। विस्थापितों को अन्य कार्य या फिर प्राइवेट नौकरी के सहारे परिवार का पालन पोषण करना पड़ता है।
- रवि गुसांई
- यातायात की सबसे बड़ी समस्या है। हरिद्वार से पथरी के लिए परिवहन निगम की बसें संचालित नहीं हैं। विस्थापितों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। पथरी रेलवे स्टेशन पांच किलोमीटर दूरी पर है। पथरी रेलवे स्टेशन पर मात्र दो पैसेंजर ट्रेनों का स्टॉपेज है। जबकि कई एक्सप्रेस ट्रेन गुजरती हैं।
- गब्बर सिंह
- ग्राम पंचायत के चारों भाग में बसे विस्थापितों को टूूटे मार्गों से गुजरना पड़ता है। जब विस्थापितों को बसाया गया था तभी सड़कों का निर्माण हुआ था। इसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई। बरसात में जलभराव रहता है। - रविंद्र सिंह
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वर्ष 1982 में टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत 436 विस्थापित परिवारों को यहां बसाया गया। चार भागों में बसे विस्थापित परिवारों को उस वक्त क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं थी। उनके लिए एकदम नई और गर्म जगह थी। बावजूद परिवारों ने मेहनत के दम पर खेतीबाड़ी आबाद की। व्यवसाय शुरू किया। स्थानीय लोगों से मेलजोल बढ़ाया और उनके सुखदुख के साथी बन गए। हर समस्या का डटकर मुकाबला किया। लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों ने हमेशा उनकी उपेक्षा की। जिससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।
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- विस्थापितों को 40 साल हो गए हैं। अभी तक भूमिधरी का अधिकार नहीं मिला है। जिससे विस्थापितों को भूमि पर बैंकों से खेती के लिए ऋण नहीं मिलता है। विस्थापितों के लिए यह एक गंभीर समस्या है। सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
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-विक्रम खरोला
- जंगल किनारे बसे होने से जंगली जानवर खेतों में घुस आते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। विस्थापितों को अन्य कार्य या फिर प्राइवेट नौकरी के सहारे परिवार का पालन पोषण करना पड़ता है।
- रवि गुसांई
- यातायात की सबसे बड़ी समस्या है। हरिद्वार से पथरी के लिए परिवहन निगम की बसें संचालित नहीं हैं। विस्थापितों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। पथरी रेलवे स्टेशन पांच किलोमीटर दूरी पर है। पथरी रेलवे स्टेशन पर मात्र दो पैसेंजर ट्रेनों का स्टॉपेज है। जबकि कई एक्सप्रेस ट्रेन गुजरती हैं।
- गब्बर सिंह
- ग्राम पंचायत के चारों भाग में बसे विस्थापितों को टूूटे मार्गों से गुजरना पड़ता है। जब विस्थापितों को बसाया गया था तभी सड़कों का निर्माण हुआ था। इसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई। बरसात में जलभराव रहता है। - रविंद्र सिंह