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Haridwar News: ओपीडी के बाहर फर्श पर पड़ी दर्द से कराहती रही बुजुर्ग, नहीं मिला उपचार
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संशोधित
- महिला और बुजुर्ग हेल्प डेस्क पर बैठी महिला कर्मचारी देखती रही तमाशा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। मेला अस्पताल में मानवीय संवेदना उस समय तार-तार हो गई, जब एक बुजुर्ग महिला ओपीडी के बाहर फर्श पर दर्द से कराहती रही, लेकिन महिला और बुजुर्गाें की मदद के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क की महिला कर्मचारी पीड़िता को तमाशे की तरह देखती रहीं। यही नहीं धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और नर्स भी उसके आसपास से गुजरती रहीं, लेकिन किसी ने उसे प्राथमिक उपचार तो दूर भर्ती कराने की जहमत नहीं उठाई।
मामला बुधवार को मेला अस्पताल का है। अस्पताल में 82 वर्षीय महिला राजदुलारी पेट में दर्द और दस्त होने की शिकायत लेकर पहुंची थी। लेकिन उसे डॉक्टरों की ओर से उपचार नहीं दिया गया। थक हारकर बुजुुर्ग महिला चक्कर आने के बाद फर्श पर लेट गई। वह दर्द से वहीं पड़ी तड़पती रही, लेकिन किसी कर्मचारी या डाॅक्टर ने उसका हाल तक जानना मुनासिब नहीं समझा। न ही किसी ने उसे दवाई दिलाने की जरूरत समझी।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रहने वाली राजदुलारी का कसूर बस इतना था कि उसके साथ कोई तीमारदार नहीं था। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना था कि जब तक कागजों की पूर्ति कराने के लिए कोई आएगा नहीं, तब तक उसे ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा।
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महिला ने बताया कि उसकेे बेटों ने उसे घर से निकाल दिया है। तब से वह हरिद्वार के आश्रम में ही रह रही है। बुधवार सुबह अस्पताल खुलने के समय से वह उपचार की गुहार लगा रही है, मगर उसका इलाज नहीं किया जा रहा है।
उधर, सीएमएस राजेश गुप्ता का कहना है कि वह अवकाश पर होने से बाहर हैं। मेला अस्पताल से महिला को जिला अस्पताल के निराश्रित वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इस संबंध चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे।
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- महिला और बुजुर्ग हेल्प डेस्क पर बैठी महिला कर्मचारी देखती रही तमाशा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। मेला अस्पताल में मानवीय संवेदना उस समय तार-तार हो गई, जब एक बुजुर्ग महिला ओपीडी के बाहर फर्श पर दर्द से कराहती रही, लेकिन महिला और बुजुर्गाें की मदद के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क की महिला कर्मचारी पीड़िता को तमाशे की तरह देखती रहीं। यही नहीं धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और नर्स भी उसके आसपास से गुजरती रहीं, लेकिन किसी ने उसे प्राथमिक उपचार तो दूर भर्ती कराने की जहमत नहीं उठाई।
मामला बुधवार को मेला अस्पताल का है। अस्पताल में 82 वर्षीय महिला राजदुलारी पेट में दर्द और दस्त होने की शिकायत लेकर पहुंची थी। लेकिन उसे डॉक्टरों की ओर से उपचार नहीं दिया गया। थक हारकर बुजुुर्ग महिला चक्कर आने के बाद फर्श पर लेट गई। वह दर्द से वहीं पड़ी तड़पती रही, लेकिन किसी कर्मचारी या डाॅक्टर ने उसका हाल तक जानना मुनासिब नहीं समझा। न ही किसी ने उसे दवाई दिलाने की जरूरत समझी।
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मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रहने वाली राजदुलारी का कसूर बस इतना था कि उसके साथ कोई तीमारदार नहीं था। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना था कि जब तक कागजों की पूर्ति कराने के लिए कोई आएगा नहीं, तब तक उसे ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा।
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महिला ने बताया कि उसकेे बेटों ने उसे घर से निकाल दिया है। तब से वह हरिद्वार के आश्रम में ही रह रही है। बुधवार सुबह अस्पताल खुलने के समय से वह उपचार की गुहार लगा रही है, मगर उसका इलाज नहीं किया जा रहा है।
उधर, सीएमएस राजेश गुप्ता का कहना है कि वह अवकाश पर होने से बाहर हैं। मेला अस्पताल से महिला को जिला अस्पताल के निराश्रित वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इस संबंध चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे।