{"_id":"5f6104ff8ebc3e5aa3555b9f","slug":"district-panchayat-president-s-case-could-not-be-heard-haridwar-news-drn3562321112","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला पंचायत अध्यक्ष के मामले में नहीं हो सकी सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला पंचायत अध्यक्ष के मामले में नहीं हो सकी सुनवाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिलाधिकारी सी रविशंकर मंगलवार को जिला पंचायत अध्यक्ष की सदस्यता को लेकर सुनवाई नहीं कर सके। अब मामले में बुधवार को सुनवाई होगी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 21 सितंबर की तारीख दी हुई है।
लक्सर क्षेत्र के ढाढेकी निवासी अरविंद ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा पर नामांकन पत्र में गलत तथ्य देने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। आरोप लगाया कि सुभाष वर्मा का निवास क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया था और पंचायत नियमावली के अनुसार शहरी क्षेत्र का निवासी जिला पंचायत का सदस्य नहीं रह सकता है, यानी उनकी सदस्यता स्वत: ही निरस्त हो जाती है। अपीलकर्ता अरविंद ने तर्क दिया था कि सुभाष वर्मा का निवास क्षेत्र शहरी क्षेत्र में आ जाने पर वह जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के काबिल नहीं थे, लेकिन गलत तथ्य प्रस्तुत करते हुए चुनाव लड़ा। मामले में नौ सितंबर को हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को दस दिन में पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने को आदेश दिए थे। बीते शुक्रवार और शनिवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर ने शिकायतकर्ता अरविंद और जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा का पक्ष सुना। इस मामले में मंगलवार को फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन जिलाधिकारी की व्यस्तता के चलते हुए मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब बुधवार को जिलाधिकारी इस मामले में सुनवाई अथवा फैसला सुना सकते हैं।
विज्ञापन
लक्सर क्षेत्र के ढाढेकी निवासी अरविंद ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा पर नामांकन पत्र में गलत तथ्य देने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। आरोप लगाया कि सुभाष वर्मा का निवास क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया था और पंचायत नियमावली के अनुसार शहरी क्षेत्र का निवासी जिला पंचायत का सदस्य नहीं रह सकता है, यानी उनकी सदस्यता स्वत: ही निरस्त हो जाती है। अपीलकर्ता अरविंद ने तर्क दिया था कि सुभाष वर्मा का निवास क्षेत्र शहरी क्षेत्र में आ जाने पर वह जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के काबिल नहीं थे, लेकिन गलत तथ्य प्रस्तुत करते हुए चुनाव लड़ा। मामले में नौ सितंबर को हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को दस दिन में पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने को आदेश दिए थे। बीते शुक्रवार और शनिवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर ने शिकायतकर्ता अरविंद और जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा का पक्ष सुना। इस मामले में मंगलवार को फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन जिलाधिकारी की व्यस्तता के चलते हुए मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब बुधवार को जिलाधिकारी इस मामले में सुनवाई अथवा फैसला सुना सकते हैं।
विज्ञापन