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बेटिया को नहीं समझा कभी बेटों से कम
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इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रदेश टॉप करने वाली दीया राजपूत तीनों बहनों में दूसरे नंबर की है। दीया के माता-पिता ने बेटियों को कभी बेटों से कम नहीं समझा। यही वजह है कि तीनों बेटियां आज शिक्षा के क्षेत्र में दम दिखा रही हैं। माता-पिता का कहना है कि बेटियों को खूब पढ़ाएंगे। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े।
दीया राजपूत के पिता पदम कुमार राजपूत और माता भारती देवी की तीनों बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी गुंजन राजूपत ने हाल ही में एमबीए की प्रवेश परीक्षा पास की है। गुंजन भी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मायापुर की छात्रा रही हैं। वह 10 और 12 में स्कूल टॉपर रही है।
दूसरे नंबर की दीया ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर माता-पिता का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया है। दीया राजपूत वर्ष 2020 में भी हाईस्कूल परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 16वां स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। सबसे छोटी बेटी संजना राजपूत कक्षा 12 की छात्रा है। वह भी पढ़ने में अव्वल है। संजना राजपूत भी सरस्वती विद्या मंदिर पढ़ती है। दीया के पिता पदम कुमार राजपूत और मां भारती देवी से जब पूछा गया कि उनको तीनों बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं हैं। क्या आपको कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होती है। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी तीनों बेटियां ही उनके बेटे हैं। उन्हें कभी इसका अहसास भी नहीं होता है। वह अपनी बेटियों को ही बेटों की तरह रखते और उनकी परवरिश करते हैं। तीनों बेटियां जितना पढ़ना चाहती हैं, वह उन्हें पढ़ाएंगे। ताकि वह अपनी मंजिल को पा सकें।
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दीया राजपूत के पिता पदम कुमार राजपूत और माता भारती देवी की तीनों बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी गुंजन राजूपत ने हाल ही में एमबीए की प्रवेश परीक्षा पास की है। गुंजन भी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मायापुर की छात्रा रही हैं। वह 10 और 12 में स्कूल टॉपर रही है।
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दूसरे नंबर की दीया ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर माता-पिता का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया है। दीया राजपूत वर्ष 2020 में भी हाईस्कूल परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में 16वां स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। सबसे छोटी बेटी संजना राजपूत कक्षा 12 की छात्रा है। वह भी पढ़ने में अव्वल है। संजना राजपूत भी सरस्वती विद्या मंदिर पढ़ती है। दीया के पिता पदम कुमार राजपूत और मां भारती देवी से जब पूछा गया कि उनको तीनों बेटियां हैं, कोई बेटा नहीं हैं। क्या आपको कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होती है। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी तीनों बेटियां ही उनके बेटे हैं। उन्हें कभी इसका अहसास भी नहीं होता है। वह अपनी बेटियों को ही बेटों की तरह रखते और उनकी परवरिश करते हैं। तीनों बेटियां जितना पढ़ना चाहती हैं, वह उन्हें पढ़ाएंगे। ताकि वह अपनी मंजिल को पा सकें।
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