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ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज का बाबू घूस लेते धरा
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
Updated Sun, 31 May 2015 01:06 AM IST
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देहरादून से आई विजीलेंस विभाग की टीम ने ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के लेखा विभाग के प्रवर सहायक संदीप त्रिपाठी को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते बीकानेर मिष्ठान भंडार से रंगे हाथ धर दबोचा। आरोपी प्रवर सहायक अपने कालेज से ही रिटायर्ड डॉ. गिरिश सक्सेना से अवकाश नगदीकरण की एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था।
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ज्वालापुर की जुर्स कंट्री में रह रहे रिटायर्ड गिरिश सक्सेना वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त हुए थे। आरोप है कि मार्च में कालेज के प्राचार्य की ओर से उनके अवकाश नगदीकरण की रकम कोषागार में भेज दी। आरोप है कि लेखा विभाग के प्रवर सहायक टाल-मटोल करते रहे।
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आखिर में 20 हजार रुपये रिश्वत देने की एवज में भुगतान करने की बात कही। तय हुआ कि पांच हजार रुपये एडवांस देने होंगे और 15 हजार रुपये धनराशि मिलने पर देनी होगी। रिटायर्ड प्रोफेसर ने देहरादून पहुंचकर विजीलेंस विभाग में अपनी शिकायत दर्ज कराई। विजीलेंस विभाग की जांच में मामला सही पाया गया।
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निरीक्षक जवाहर लाल, भास्कर लाल शाह के नेतृत्व में एक टीम शनिवार को यहां पहुंची। रिटायर्ड प्रोफेसर ने प्रवर सहायक को बीकानेर मिष्ठान भंडार में बुला लिया। नाश्ते के बाद जैसे ही प्रोफेसर ने रकम दी वैसे ही विजीलेंस ने प्रवर सहायक को दबोच लिया। केमिकल युक्त नोट उसके हाथ से बरामद कर हाथ पानी में धुलवाए गए।
फिर विजीलेंस टीम उसे लेकर देहरादून रवाना हो गई। विजीलेंस निदेशक एसके भगत ने ढाई हजार का नगद इनाम टीम को देने की घोषणा की है। रिटायर्ड प्रोफेसर गिरिश सक्सेना पिछले तीन साल से उत्पीड़न झेल रहे थे। दो साल बाद जैसे तैसे उनकी पेंशन बन पाई थी।
अब उन्हें अवकाश नगदीकरण के भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ रहे थे। वर्ष 2012 में रिटायर्ड हुए प्रोफेसर की पेंशन भी बाबू गिरि के चंगुल में उलझी रही। रोजाना चक्कर काट काट कर वे पेंशन बनवाने में कामयाब रहे। खैर, रिश्वत न देने की बजाय लंबा समय पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ा।
वह भी उसी कालेज में जहां कई साल की सेवाएं दे चुके थे। पेंशन की लड़ाई पूरी हो चुकी थी। अब अवकाश नगदीकरण की लड़ाई लड़ना शुरू कर दी थी। प्राचार्य ने उनकी बात समझी तभी मार्च में कोषागार तक मामला पहुंच गया। पर, बाबू से कैसे निपट पाते। बाबू ने फिर से प्रोफेसर को चक्कर कटवाना शुरू किए।
तीन माह तक झेलते झेलते जब बर्दाश्त से बाहर हो गया। फिर बाबू की बात पर मुहर लगा दी। लेकिन जेहन में रिश्वत न देने की बात पाले बैठे रिटायर्ड प्रोफेसर ने अपने हक को लेकर जंग छेड़ दी और घूसखोर बाबू को उसकी असली जगह पहुंचाया। रिटायर्ड प्रोफेसर का कहना था कि वे आमजन को भी जागरूक करने का कार्य करेंगे।
बाबू की करतूत से कराया अवगत
विजीलेंस ने जब घूसखोर बाबू को ट्रेप किया तब हर कोई हक्का बक्का रह गया। किसी की समझ में नहीं आया आखिर क्या हो रहा है। तब विजीलेंस टीम ने खुद का परिचय दिया। बाबू की करतूत से भी आमजन को अवगत कराया। जागरूक किया कि आम आदमी घूसखोरों की शिकायत करें न कि उनके आगे घुटने टेकने चाहिए।