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..नाबालिग के साथ दुराचार के अभियुक्त को दस साल का कठोर कारावास की सजा सुनायी
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ब्यूरो/अमर उजाला, रोशनाबाद
किशोरी के साथ दुराचार और मारपीट करने के आरोपी शगुन निवासी भेल को अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज पोक्सो अर्चना सागर ने दस का कठोर कारावास व 20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही निर्भया फंड से पीड़िता को 50 हजार रुपये के प्रतिकर स्वरूप देने के आदेश दिए।
शासकीय अधिवक्ता आदेश चंद्र चौहान ने बताया कि रानीपुर कोतवाली क्षेत्र में निवास कर रहे एक व्यक्ति ने रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि 10 और 11 मई 2015 की रात्रि को उसकी नाबालिग बेटी घर में नहीं मिली। पूरी रात उसकी तलाश की गई तो सुबह तड़के वह बदहवास हालत में घर पहुंची। उसने बताया था कि सरकारी आवास में रहने वाला शगुन उसे रात को करीब डेढ़ बजे जबरदस्ती ले गया और पानी में बेहोशी की दवा मिलाकर उसे पिला दी। इससे वह बदहवाश हो गई और उसके साथ जबरदस्ती दुराचार किया। होश आने पर जब उसने विरोध किया तो उसे मारा पीटा भी गया। बाद में उसे धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो उसकी और उसके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। मामले में पीड़िता की पिता की तहरीर पर रानीपुर कोतवाली पुलिस ने 11 मई 2015 को पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले की जांच रानीपुर कोतवाली के एसआई संजीव चौहान ने की। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से आठ और आरोपी पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज पोक्सो अर्चना सागर ने अभियुक्त शगुन पुत्र स्वर्गीय कलीराम को दस वर्ष के कठोर कारावास के साथ बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने पर अभियुक्त को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा। अभियुक्त के द्वारा पूर्व में जेल में व्यतीत की गई अवधि दस साल की सजा में समायोजित होगी।
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किशोरी के साथ दुराचार और मारपीट करने के आरोपी शगुन निवासी भेल को अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज पोक्सो अर्चना सागर ने दस का कठोर कारावास व 20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही निर्भया फंड से पीड़िता को 50 हजार रुपये के प्रतिकर स्वरूप देने के आदेश दिए।
शासकीय अधिवक्ता आदेश चंद्र चौहान ने बताया कि रानीपुर कोतवाली क्षेत्र में निवास कर रहे एक व्यक्ति ने रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि 10 और 11 मई 2015 की रात्रि को उसकी नाबालिग बेटी घर में नहीं मिली। पूरी रात उसकी तलाश की गई तो सुबह तड़के वह बदहवास हालत में घर पहुंची। उसने बताया था कि सरकारी आवास में रहने वाला शगुन उसे रात को करीब डेढ़ बजे जबरदस्ती ले गया और पानी में बेहोशी की दवा मिलाकर उसे पिला दी। इससे वह बदहवाश हो गई और उसके साथ जबरदस्ती दुराचार किया। होश आने पर जब उसने विरोध किया तो उसे मारा पीटा भी गया। बाद में उसे धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो उसकी और उसके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। मामले में पीड़िता की पिता की तहरीर पर रानीपुर कोतवाली पुलिस ने 11 मई 2015 को पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामले की जांच रानीपुर कोतवाली के एसआई संजीव चौहान ने की। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से आठ और आरोपी पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज पोक्सो अर्चना सागर ने अभियुक्त शगुन पुत्र स्वर्गीय कलीराम को दस वर्ष के कठोर कारावास के साथ बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने पर अभियुक्त को एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा। अभियुक्त के द्वारा पूर्व में जेल में व्यतीत की गई अवधि दस साल की सजा में समायोजित होगी।
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