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गुलदार प्रकरण की एसआईटी जांच से वन विभाग में खलबली
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। बीते वर्ष राजाजी टाइगर रिजर्व की दूधियाबंद बीट में मिले गुलदार और बाघ के मांस के जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश होते ही वन विभाग में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि मामले में वन विभाग के उच्चाधिकारी, वनकर्मी और एनजीओ के नाम सामने आ सकते हैं।
बीते वर्ष मार्च में राजाजी टाइगर रिजर्व की दूधियाबंद बीट में गुलदार और टाइगर की मांस और हड्डियां मिली थीं। वार्डन कोमल सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया। आरोप में रेंजर सहित दो अन्य वनकर्मियों को देहरादून संबद्ध कर दिया गया। मामले में सामने आया कि कुछ उच्चाधिकारी, वनकर्मी और एनजीओ घटना को अंजाम देने में शामिल हैं। कोमल सिंह मामले की काफी तह तक पहुंच गए थे। उन्हें हटाकर मुख्य वन संरक्षण मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। हाइकोर्ट के आदेश पर दिसंबर में गुलदार के शिकार की सीबीआई जांच कराई गई। तभी दिल्ली में सीबीआई में रार हो हुई। इसी बीच यहां भी मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल गया। दिसंबर में ही अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह ने मनोज चंद्रन को हटाते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक सनातन सोनकर को जांच अधिकारी नियुक्त किया, लेकिन कुछ दिन बाद ही वनमंत्री ने सनातन सोनकर को हटाकर फिर मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी बनाया। अब शासन (गृह विभाग) ने पुलिस मुख्यालय को जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है। गुलदार के शिकार की एसआईटी जांच यदि सही दिशा में जाती है और इसके कोई व्यावधान उत्पन्न नहीं किया गया तो राष्ट्रीय स्तर के एनजीओ, कुछ स्थानीय व्यक्ति, वन विभाग के वर्तमान व पूर्व उच्चाधिकारी सहित वनकर्मियों के नाम का खुलासा होगा। साथ ही जनप्रतिनिधियों के नाम भी उजागर हो सकते हैं।
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बीते वर्ष मार्च में राजाजी टाइगर रिजर्व की दूधियाबंद बीट में गुलदार और टाइगर की मांस और हड्डियां मिली थीं। वार्डन कोमल सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया। आरोप में रेंजर सहित दो अन्य वनकर्मियों को देहरादून संबद्ध कर दिया गया। मामले में सामने आया कि कुछ उच्चाधिकारी, वनकर्मी और एनजीओ घटना को अंजाम देने में शामिल हैं। कोमल सिंह मामले की काफी तह तक पहुंच गए थे। उन्हें हटाकर मुख्य वन संरक्षण मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। हाइकोर्ट के आदेश पर दिसंबर में गुलदार के शिकार की सीबीआई जांच कराई गई। तभी दिल्ली में सीबीआई में रार हो हुई। इसी बीच यहां भी मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल गया। दिसंबर में ही अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह ने मनोज चंद्रन को हटाते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक सनातन सोनकर को जांच अधिकारी नियुक्त किया, लेकिन कुछ दिन बाद ही वनमंत्री ने सनातन सोनकर को हटाकर फिर मनोज चंद्रन को जांच अधिकारी बनाया। अब शासन (गृह विभाग) ने पुलिस मुख्यालय को जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है। गुलदार के शिकार की एसआईटी जांच यदि सही दिशा में जाती है और इसके कोई व्यावधान उत्पन्न नहीं किया गया तो राष्ट्रीय स्तर के एनजीओ, कुछ स्थानीय व्यक्ति, वन विभाग के वर्तमान व पूर्व उच्चाधिकारी सहित वनकर्मियों के नाम का खुलासा होगा। साथ ही जनप्रतिनिधियों के नाम भी उजागर हो सकते हैं।
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