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सहकारी बैंकों में लटके रहे ताले
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 25 Nov 2016 10:39 PM IST
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जिला सहकारी बैंकों में पुराने बड़े नोटों के जमा और ऋण की किश्त जमा करने पर रोक लगाने के खिलाफ बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से बैंकों में ताले लटके रहे। बैंक कर्मियों का कहना है कि प्राइवेट बैंकों पर विश्वास किया, लेकिन सहकारी बैंकों से अधिकार छीन लिए। ऐसे में बैंकों का बकाये का भी भुगतान नहीं हो सका।
शुक्रवार को जिला सहकारी बैंकों का समस्त स्टाफ हड़ताल पर रहा। हड़ताल में बहादराबाद, कनखल, ज्वालापुर, देहात क्षेत्र के मिनी बैंकों का पूरा स्टाफ शामिल हुआ। ज्वालापुर शाखा के मैनेजर विपुल चौधरी ने बताया कि जिला सहकारी बैंकों को 500 और 1000 के नोट जमा करने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए थी, लेकिन उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया। जबकि प्रत्येक सरकारी एजेंसी को बंद नोटों से अपने बकाया लेने के साथ लेनदेन का अवसर दिया। इससे बैंक की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। इस मौके पर नारायण सिंह, दीपक कुमार, कल्पना देवी आदि शामिल हुए।
शुक्रवार को जिला सहकारी बैंकों का समस्त स्टाफ हड़ताल पर रहा। हड़ताल में बहादराबाद, कनखल, ज्वालापुर, देहात क्षेत्र के मिनी बैंकों का पूरा स्टाफ शामिल हुआ। ज्वालापुर शाखा के मैनेजर विपुल चौधरी ने बताया कि जिला सहकारी बैंकों को 500 और 1000 के नोट जमा करने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए थी, लेकिन उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया। जबकि प्रत्येक सरकारी एजेंसी को बंद नोटों से अपने बकाया लेने के साथ लेनदेन का अवसर दिया। इससे बैंक की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। इस मौके पर नारायण सिंह, दीपक कुमार, कल्पना देवी आदि शामिल हुए।
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