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आयुर्वेदिक परिसरों की मान्यता खतरे में
अमर उजाला ब्यूृरो हरिद्वार
Updated Wed, 01 Mar 2017 09:58 PM IST
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आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध तीनों परिसरों की मान्यता खतरे में पड़ गई है। मान्यता बचाने के लिए आयुर्वेद विश्वविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन ने पिछले 15 दिन पहले राज्यपाल को स्थिति से अवगत कराने को ज्ञापन भी भेजा। जवाब नहीं मिलने पर एसोसिएशन ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
बुधवार को पत्रकार वार्ता में आयुर्वेद विश्वविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अवधेश मिश्रा ने कहा कि आयुर्वेद कालेजों के संचालन को अलग से आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय तो बना दिया गया, लेकिन आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार कार्य नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन परिसरों में फैकल्टी की कमी बनी है। स्थायी और अस्थायी कुल 100 शिक्षक है। मानकों के अनुसार 150 शिक्षक स्थायी होने चाहिए। विवि की ओर से 31 दिसंबर को निकाली गई 146 शिक्षकों की भर्ती भी कुछ कारणों के चलते निरस्त कर दी गई। अब मार्च के महीने में अगले सत्रों के लिए सीसीआईएम (सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन) का निरीक्षण होना है, लेकिन फैकल्टी न होने पर मान्यता नहीं हो सकेगी।
महासचिव कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि विवि में सबसे बड़ी समस्या कुलपति न होना है। मानकों के अनुसार आयुर्वेद का प्रोफेसर ही कुलपति होना चाहिए, यदि किसी कारण से कुलपति नहीं हो तो कोई भी सीनियर प्रोफेसर कार्यवाहक कुलपति बनकर कार्य कर सकता है। अब कुलपति का अतिरिक्त प्रभार मेडिकल विवि के कुलपति डा. सौदान सिंह को दिया है। उन्होंने नियुक्त होने के बावजूद कोई बैठक तक नहीं बुलाई है। कालेजों में परीक्षा, डिग्री सहित अन्य भी कार्य अटके हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों में शिक्षकों की भर्ती, स्थायी कुलपति नियुक्ति नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे। आंदोलन में शिक्षकों के साथ, अन्य तकनीकी स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और छात्र भी शामिल होंगे। इस मौके पर प्रवक्ता प्रो. आरके गौतम, डा. खेमचंद, डा. आलोक श्रीवास्तव, ओमप्रकाश सिंह, संजय त्रिपाठी, सुषमा रावत, विपिन कुमार पांडे, नमृता कुलश्रेष्ठ, बालकृष्ण पंवार आदि शामिल हुए।
बुधवार को पत्रकार वार्ता में आयुर्वेद विश्वविद्यालय शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अवधेश मिश्रा ने कहा कि आयुर्वेद कालेजों के संचालन को अलग से आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय तो बना दिया गया, लेकिन आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार कार्य नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन परिसरों में फैकल्टी की कमी बनी है। स्थायी और अस्थायी कुल 100 शिक्षक है। मानकों के अनुसार 150 शिक्षक स्थायी होने चाहिए। विवि की ओर से 31 दिसंबर को निकाली गई 146 शिक्षकों की भर्ती भी कुछ कारणों के चलते निरस्त कर दी गई। अब मार्च के महीने में अगले सत्रों के लिए सीसीआईएम (सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन) का निरीक्षण होना है, लेकिन फैकल्टी न होने पर मान्यता नहीं हो सकेगी।
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महासचिव कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि विवि में सबसे बड़ी समस्या कुलपति न होना है। मानकों के अनुसार आयुर्वेद का प्रोफेसर ही कुलपति होना चाहिए, यदि किसी कारण से कुलपति नहीं हो तो कोई भी सीनियर प्रोफेसर कार्यवाहक कुलपति बनकर कार्य कर सकता है। अब कुलपति का अतिरिक्त प्रभार मेडिकल विवि के कुलपति डा. सौदान सिंह को दिया है। उन्होंने नियुक्त होने के बावजूद कोई बैठक तक नहीं बुलाई है। कालेजों में परीक्षा, डिग्री सहित अन्य भी कार्य अटके हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों में शिक्षकों की भर्ती, स्थायी कुलपति नियुक्ति नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे। आंदोलन में शिक्षकों के साथ, अन्य तकनीकी स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और छात्र भी शामिल होंगे। इस मौके पर प्रवक्ता प्रो. आरके गौतम, डा. खेमचंद, डा. आलोक श्रीवास्तव, ओमप्रकाश सिंह, संजय त्रिपाठी, सुषमा रावत, विपिन कुमार पांडे, नमृता कुलश्रेष्ठ, बालकृष्ण पंवार आदि शामिल हुए।
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