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पैसा नहीं मिलने पर काम धीमा
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 17 Feb 2017 10:59 PM IST
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के तहत कूड़ा एकत्रीकरण के लिए अनुबंधित कंपनी केआरएल ने कूड़ा उठाने का पैसा (टिपिंग शुल्क) नहीं मिलने पर कंपोस्ट प्लांट का निर्माण धीमा कर दिया है। इससे नगर निगम और केआरएल में ठन गई है। स्थिति की गंभीरता का अनुुुमान इससे लगाया जा सकता है कि कोलकात्ता से केआरएल के सीएमडी पीयूष लखोटिया नगर निगम अधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक करने आने वाले हैं।
कंपोस्ट प्लांट निर्माण की प्रगति धीमी होने से नगर निगम के ही अधिकारी नहीं बल्कि उत्तराखंड शासन के आला अधिकारी भी मुश्किल में हैं। शासन की ओर से एनजीटी में पहले 31 दिसंबर तक कंपोस्ट प्लांट का निर्माण पूरा करा लेने का शपथ-पत्र दाखिल किया था, परंतु निर्माण पूरा नहीं होने पर एनजीटी की फटकार सुननी पड़ी थी। इसके बाद उन्होंने 31 मार्च तक काम पूरा करने का दूसरा शपथ-पत्र दाखिल कर रखा है। केआरएल अधिकारियों के शपथ-पत्र देकर फंसे होने का पूरा फायदा उठा रही है। उसके अधिकारी दबाव बनाकर कूड़ा उठाने का बकाया शुल्क लगभग 64 लाख का भुगतान करने के लिए नगर निगम पर दबाव बना रहे हैं। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने काम बंद कर रखा है, किंतु केआरएल के परियोजना प्रंबंधक मनोज शर्मा का कहना है कि कंपोस्ट प्लांट का काम बंद नहीं है, काम की गति धीमी कही जा सकती है। उन्होंने बताया कि टिपिंग शुल्क का भुगतान नहीं होने से कंपनी को काम करने में कठिनाई हो रही है। दो साल से नगर निगम नियमित रूप से टिपिंग शुल्क के भुगतान का सिस्टम नहीं बना पाया है।
50 लाख का भुगतान किया
नगर निगम प्रशासन ने चार दिन पहले ही केआरएल को कंपोस्ट प्लांट निर्माण की 50 लाख रुपये की किश्त का भुगतान किया है। इसके बावजूद कंपनी ने काम की चाल नहीं बदली है। कंपनी के प्रबंधक का कहना है कि नगर निगम को कंपोस्ट प्लांट के निर्माण पर हुए व्यय का एक करोड़ 22 लाख रुपये का बिल 6 जनवरी को प्रस्तुत किया गया था, जिसके सापेक्ष 50 लाख रुपये निगम ने दिए हैं। जबकि टिपिंग शुल्क का एक भी पैसा नहीं दिया जा रहा है। मनोज शर्मा ने बताया कि कंपोस्ट प्लांट का राउरकेला उड़ीसा से इस्ट्रक्चर आ चुका है और मशीने भी रास्ते में हैं।
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आज होगी बैठक
महापौर मनोज गर्ग ने बताया कि मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने के लिए शनिवार को केआरएल व नगर निगम के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। जिसमें सभी मुद्दों पर विचार कर हल निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि केआरएल को बचे हुए 8 वार्डों को भी हैंडओवर लेना चाहिए और प्लांट समय पर तैयार करने के साथ ही कूड़ा निस्तारण में सुधार लाने पर भी बात की जाएगी।
कंपोस्ट प्लांट निर्माण की प्रगति धीमी होने से नगर निगम के ही अधिकारी नहीं बल्कि उत्तराखंड शासन के आला अधिकारी भी मुश्किल में हैं। शासन की ओर से एनजीटी में पहले 31 दिसंबर तक कंपोस्ट प्लांट का निर्माण पूरा करा लेने का शपथ-पत्र दाखिल किया था, परंतु निर्माण पूरा नहीं होने पर एनजीटी की फटकार सुननी पड़ी थी। इसके बाद उन्होंने 31 मार्च तक काम पूरा करने का दूसरा शपथ-पत्र दाखिल कर रखा है। केआरएल अधिकारियों के शपथ-पत्र देकर फंसे होने का पूरा फायदा उठा रही है। उसके अधिकारी दबाव बनाकर कूड़ा उठाने का बकाया शुल्क लगभग 64 लाख का भुगतान करने के लिए नगर निगम पर दबाव बना रहे हैं। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने काम बंद कर रखा है, किंतु केआरएल के परियोजना प्रंबंधक मनोज शर्मा का कहना है कि कंपोस्ट प्लांट का काम बंद नहीं है, काम की गति धीमी कही जा सकती है। उन्होंने बताया कि टिपिंग शुल्क का भुगतान नहीं होने से कंपनी को काम करने में कठिनाई हो रही है। दो साल से नगर निगम नियमित रूप से टिपिंग शुल्क के भुगतान का सिस्टम नहीं बना पाया है।
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50 लाख का भुगतान किया
नगर निगम प्रशासन ने चार दिन पहले ही केआरएल को कंपोस्ट प्लांट निर्माण की 50 लाख रुपये की किश्त का भुगतान किया है। इसके बावजूद कंपनी ने काम की चाल नहीं बदली है। कंपनी के प्रबंधक का कहना है कि नगर निगम को कंपोस्ट प्लांट के निर्माण पर हुए व्यय का एक करोड़ 22 लाख रुपये का बिल 6 जनवरी को प्रस्तुत किया गया था, जिसके सापेक्ष 50 लाख रुपये निगम ने दिए हैं। जबकि टिपिंग शुल्क का एक भी पैसा नहीं दिया जा रहा है। मनोज शर्मा ने बताया कि कंपोस्ट प्लांट का राउरकेला उड़ीसा से इस्ट्रक्चर आ चुका है और मशीने भी रास्ते में हैं।
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आज होगी बैठक
महापौर मनोज गर्ग ने बताया कि मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने के लिए शनिवार को केआरएल व नगर निगम के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। जिसमें सभी मुद्दों पर विचार कर हल निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि केआरएल को बचे हुए 8 वार्डों को भी हैंडओवर लेना चाहिए और प्लांट समय पर तैयार करने के साथ ही कूड़ा निस्तारण में सुधार लाने पर भी बात की जाएगी।