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झोंका एक बहार का नींद से जगा गया, लो बसंत आ गया
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हरिद्वार। पारिजात साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की ओर से आयोजित कवि सम्मेल में साहित्यकारों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अशोक कुमार गुप्ता की शिवालिक नगर स्थित आनंद कला वीथिका सभागार में कवि सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कवि भूदत्त शर्मा ने कहा कि ‘स्वप्न देखे थे, जो इन खुली आंखों से, आंखों आंखों में ही वे भरे रह गए, खत लिखे थे जो कभी तुम्हें प्यार में, वह किताबों में यूं ही धरे रह गए।
कवि सुभाष मलिक ने बसंत आगमन पर कहा ‘झोंका एक बहार का नींद से जगा गया, लो बसंत आ गया, लो बसंत आ गया। गीतकार रमेश रमन ने कहा ‘‘काजल कान्हा चितवन राधे, दो नयनन के वृंदावन में से भक्तिभाव का दर्शन कराया। कवि कुंवर पाल सिंह ने कहा ‘मधुमक्खी फूलों पर बैठी, पेड़-पेड़ पर मधुशाला है, आज बसंत आने वाला है। कवि अरुण कुमार पाठक ने कहा कि आज फिर मधुमास आया, केवल तुम्हारी याद लेकर, दो लबों में प्यास लेकर, फिर आने का विश्वास लेकर। भावना प्रसाद मांझी, प्रेम शंकर शर्मा प्रेमी, राजकुमारी, गीता नैयर, मनीषा चौहान, ज्वाला प्रसाद शांडिल्य, राधेश्याम सेमवाल, अरविंद दूबे, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुलश्रेष्ठ, प्रवीण चौहान, महेंद्र कुमार, किरण, मनु शिवपुरी, माधवेंद्र माधव, मोहन नरूला आदि ने भी कविता पाठ किया।
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अशोक कुमार गुप्ता की शिवालिक नगर स्थित आनंद कला वीथिका सभागार में कवि सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कवि भूदत्त शर्मा ने कहा कि ‘स्वप्न देखे थे, जो इन खुली आंखों से, आंखों आंखों में ही वे भरे रह गए, खत लिखे थे जो कभी तुम्हें प्यार में, वह किताबों में यूं ही धरे रह गए।
कवि सुभाष मलिक ने बसंत आगमन पर कहा ‘झोंका एक बहार का नींद से जगा गया, लो बसंत आ गया, लो बसंत आ गया। गीतकार रमेश रमन ने कहा ‘‘काजल कान्हा चितवन राधे, दो नयनन के वृंदावन में से भक्तिभाव का दर्शन कराया। कवि कुंवर पाल सिंह ने कहा ‘मधुमक्खी फूलों पर बैठी, पेड़-पेड़ पर मधुशाला है, आज बसंत आने वाला है। कवि अरुण कुमार पाठक ने कहा कि आज फिर मधुमास आया, केवल तुम्हारी याद लेकर, दो लबों में प्यास लेकर, फिर आने का विश्वास लेकर। भावना प्रसाद मांझी, प्रेम शंकर शर्मा प्रेमी, राजकुमारी, गीता नैयर, मनीषा चौहान, ज्वाला प्रसाद शांडिल्य, राधेश्याम सेमवाल, अरविंद दूबे, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुलश्रेष्ठ, प्रवीण चौहान, महेंद्र कुमार, किरण, मनु शिवपुरी, माधवेंद्र माधव, मोहन नरूला आदि ने भी कविता पाठ किया।
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