{"_id":"12-75550","slug":"Haridwar-75550-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहत संग आफत भी बरसी आसमान से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहत संग आफत भी बरसी आसमान से
Haridwar
Updated Wed, 02 Jul 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुड़की। लंबे इंतजार के बाद आसमान से राहत बरसी। कई घंटों की बारिश से जहां लोगों को गर्मी से निजात मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। गन्ने समेत दूसरी फसलों के लिए इस बारिश को वरदान माना जा रहा है। दूसरी तरफ, कुछ जगह के लिए बारिश आफत बनकर भी आई। नगर निगम के दावों के विपरीत शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। एडीबी की ओर से खोदी गई सड़कों पर बारिश से कीचड़ हो गया। लक्सर में लाखों की लागत से बनाया गया नाला पहली बारिश में ध्वस्त हो गया। सोपरी गांव के सामने ठीक किए जा रहे गंगा के तटबंध में दरार पड़ गई। ऐसे में बाढ़ प्रभावित गांवों की चिंता बढ़ गई है। सुल्तानपुर क्षेत्र में बारिश और तेज हवा से 25 गांवों की बिजली गुल हो गई। मंगलवार दोपहर तक ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ी।
दस डिग्री लुढ़का पारा, खिले चेहरे
रुड़की। मानसून की पहली बारिश ने लोगों के चेहरे खिला दिए। कई घंटों तक हुई बारिश से पारा 10 डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। लोगों को गर्मी से निजात मिल गई। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस बारिश को अच्छा माना जा रहा है।
सोमवार शाम से ही आसमान पर बादलों ने डेरा डाल लिया था। रातभर बादल आसमान पर मंडराते रहे। रात के समय ठंडी हवाएं भी चलीं। मंगलवार तड़के करीब तीन बजे बारिश शुरू हो गई। बारिश ज्यादा तेज नहीं थी। सुबह छह बजे तक रिमझिम बारिश होती रही। इसके बाद कुछ देर बारिश रुक गई। थोड़ी देर बाद फिर बारिश शुरू हो गई। दोपहर 12 बजे तक रिमझिम बारिश रही। शाम के समय भी रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। मंगलवार तड़के तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक 66.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। मंगलवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एनआईएच के डायरेक्टर प्रो राजदेव सिंह का कहना है कि ऐसी बारिश ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।
विज्ञापन
खेतों में अमृत बरसा गई रिमझिम फुहारें
रुड़की। आसमान से बरसी रिमझिम फुहारें सूखे खेतों के लिए अमृत साबित हुई। बारिश से गन्ने की फसल की सिंचाई होने के साथ ही धान की रोपाई का काम भी शुरू हो जाएगा। साथ ही चारे का संकट भी दूर हो जाएगा। अब किसानों को कम से कम एक सप्ताह तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
बारिश नहीं होने से किसानों को फसलें बचाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। दिन रात नलकूपों एवं राजवाहे से पानी देने के बाद भी गन्ने की फसल को बचना मुश्किलों हो रहा था। धान की रोपाई भी नहीं कर पा रहे थे। मंगलवार तड़के शुरू हुई बारिश किसानों के लिए खुशियां लेकर आई। बारिश के पानी से जहां खेतों में खड़ी गन्ने की फसल की सिंचाई होने से किसानों ने राहत की सांस ली। वहीं बारिश होने से नलकूपों से गन्ने की सिंचाई करने से पीछा छूटने पर कुछ किसानों ने धान की रोपाई करनी शुरू करने के साथ ही इसकी तैयारी शुरू कर दी है। किसानों के हरे चारे जैसे, लोबिया, ज्वार आदि की भी सिंचाई हो गई है।
धान का लक्ष्य पूरा होने की संभावना
बारिश होेने से धान की रोपाई में भी तेजी आएगी। जिससे अब धान का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं हैं। मुख्य कृषि अधिकारी की जेपी तिवारी का कहना है कि जिले में इस बार 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि अभी तक बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही थी, लेकिन अब बारिश होने से टारगेट पूरा होने की संभावाएं बढ़ गई है।
हो सकेगी मूंगफली, तिल की बुआई
घाड़ क्षेत्र के बुग्गावाला, धनौरी, बंजारेवाला आदि क्षेत्रों में स्थित हजारों बीघा ऊंचे-नीचे खेतों की सिंचाई नहीं होने से किसान मूंगफली, तिल, उड़द, ज्वार आदि की फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे थे। लेकिन अब बारिश ने मूंगफली, तिल, उड़द, ज्वार की फसलों की बुआई करने के लिए किसानों की राह आसान कर दी है।
बारिश से गन्ने की फसल के साथ ही धान की रोपाई में भी लाभ पहुंचाएगी। किसानों को चाहिए कि वह इस बारिश को पूरा उपयोग करें।
- डा. पुरुषोत्तम कुमार, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी
आम भी हो जाएगा मीठा
झबरेड़ा। बारिश से आम की मिठास भी बढ़ेगी। अभी तक बारिश के अभाव में आम भरपूर मीठा नहीं होने से स्वाद नहीं दे रहा था, लेकिन अब बारिश हो जाने से आम भी मीठा हो जाने से पूरा स्वाद देगा। इसके अलावा पोपलर के पेड़ों की भी सिंचाई बारिश से हो गई है।
कई जगह लभराव, परेशानी
रुड़की। बारिश के कारण शहर के पश्चिमी अंबर तालाब, प्रीत विहार, रामनगर, कचहरी रोड, मकतूलपुरी आदि कालोनियों में मंगलवार सुबह जलभराव हो गया। रामनगर में वैशाली मार्ग और अशोका रोड पर सड़कें टूटी होने के कारण पानी भर गया। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि बारिश ज्यादा तेज नहीं होने के कारण कुछ देर बाद इस पानी की निकासी हो गई। दोपहर बाद अधिकतर स्थानों से जलभराव खत्म हो चुका था।
रामनगर की गलियों में जलभराव होने से नाराज क्षेत्रवासियों ने पार्षद पंकज सतीजा के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में मन्नू मेहंदीरत्ता, राजीव शर्मा, गौरव दुआ, पुष्पा मेहंदीरत्ता, मीना भारद्वाज, हेमा भारद्वाज आदि शामिल थे। उन्होंने पार्षद पर क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए समय से काम नहीं करने का आरोप लगाया।
खुदी सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़
एडीबी की ओर से शहर की कई कालोनियों, रामनगर, मकतूलपुरी, संजय गांधी कालोनी और आवास विकास में पानी की लाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गईं, लेकिन उन्हें समतल नहीं कराया गया। ऐसे में मंगलवार को हुई बारिश के कारण ऐसी सभी गलियों में कीचड़ और जलभराव की समस्या सामने आई। कीचड़ के चलते लोग काफी परेशान भी हुए। मकतूलपुरी निवासी ईलमचंद और संदीप ने कहा कि कई बार एडीबी के अधिकारियों को सड़कें ठीक करने के लिए कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई जिससे यह परेशानी हुई। दोबारा बारिश होने पर यह समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है।
शहर में इस बार जलभराव की समस्या नहीं होगी। बड़े नालों की सफाई करा दी गई है छोटे नालों की सफाई की जा रही है। समय से सारे इंतजाम करा लिए जाएंगे। - यशपाल राणा, मेयर
हल्की सी बरसात भी नहीं झेल पाया आठ लाख का नाला
लक्सर। करीब आठ लाख की लागत से बनाया गया नाला पहली बरसात में ही धराशाई हो गया। ग्रामीणों ने नाला निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि ठेकेदार ने गांव के कुछ लोगों पर जान बूझकर नाले को ध्वस्त करने का आरोप लगाया है।
गोवर्धनपुर में जलनिकासी के लिए जिला पंचायत योजना से हाल ही में आठ लाख की लागत से पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नाला रात में हुई बारिश में ध्वस्त हो गया। ग्रामीण कुंवरपाल, चरण सिंह आदि का कहना है कि नाले के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने की बाबत पिछले दिनों जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत अधिशासी अधिकारी को निर्माण कार्य की जांच करने तथा गुणवत्ता को ध्यान मे रखकर निर्माण कार्य कराऐ जाने के आदेश दिए थे। न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही निर्माण कार्य की जांच कराई गई। लिहाजा नाला बरसात मे ध्वस्त हो गया। दूसरी तरफ नाले का निर्माण कराने वाले ठेकेदार सुनील वालिया का कहना है कि नाले का निर्माण गुणवत्ता को ध्यान में रखकर किया गया था। नाला बरसात में ध्वस्त नहीं हुआ बल्कि उसे कुछ लोगों ने जानबूझकर तोड़ा।
25 गांवों में गुल रही बिजली
सुल्तानपुर। क्षेत्र के करीब 25 से ज्यादा गांवों में बिजली गुल रहने से भारी परेशानी रही। सोमवार रात से गायब बिजली मंगलवार की दोपहर आई।
सोमवार की रात भारी बरसात और तेज हवा के कारण सुल्तानपुर क्षेत्र के मौहम्मदपुर कुंहारी, निहेंदपुर सुठारी, टिक्कमपुर, अलावलपुर, भिक्कमपुर, फतवा सहित करीब 25 गांवों में रात करीब एक बजे से बिजली आपूर्ति बंद हो गई थी। जिससे ग्रामीण रातभर परेशान रहे।
विज्ञापन
दस डिग्री लुढ़का पारा, खिले चेहरे
रुड़की। मानसून की पहली बारिश ने लोगों के चेहरे खिला दिए। कई घंटों तक हुई बारिश से पारा 10 डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। लोगों को गर्मी से निजात मिल गई। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस बारिश को अच्छा माना जा रहा है।
विज्ञापन
सोमवार शाम से ही आसमान पर बादलों ने डेरा डाल लिया था। रातभर बादल आसमान पर मंडराते रहे। रात के समय ठंडी हवाएं भी चलीं। मंगलवार तड़के करीब तीन बजे बारिश शुरू हो गई। बारिश ज्यादा तेज नहीं थी। सुबह छह बजे तक रिमझिम बारिश होती रही। इसके बाद कुछ देर बारिश रुक गई। थोड़ी देर बाद फिर बारिश शुरू हो गई। दोपहर 12 बजे तक रिमझिम बारिश रही। शाम के समय भी रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। मंगलवार तड़के तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक 66.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। मंगलवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एनआईएच के डायरेक्टर प्रो राजदेव सिंह का कहना है कि ऐसी बारिश ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।
विज्ञापन
खेतों में अमृत बरसा गई रिमझिम फुहारें
रुड़की। आसमान से बरसी रिमझिम फुहारें सूखे खेतों के लिए अमृत साबित हुई। बारिश से गन्ने की फसल की सिंचाई होने के साथ ही धान की रोपाई का काम भी शुरू हो जाएगा। साथ ही चारे का संकट भी दूर हो जाएगा। अब किसानों को कम से कम एक सप्ताह तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
बारिश नहीं होने से किसानों को फसलें बचाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। दिन रात नलकूपों एवं राजवाहे से पानी देने के बाद भी गन्ने की फसल को बचना मुश्किलों हो रहा था। धान की रोपाई भी नहीं कर पा रहे थे। मंगलवार तड़के शुरू हुई बारिश किसानों के लिए खुशियां लेकर आई। बारिश के पानी से जहां खेतों में खड़ी गन्ने की फसल की सिंचाई होने से किसानों ने राहत की सांस ली। वहीं बारिश होने से नलकूपों से गन्ने की सिंचाई करने से पीछा छूटने पर कुछ किसानों ने धान की रोपाई करनी शुरू करने के साथ ही इसकी तैयारी शुरू कर दी है। किसानों के हरे चारे जैसे, लोबिया, ज्वार आदि की भी सिंचाई हो गई है।
धान का लक्ष्य पूरा होने की संभावना
बारिश होेने से धान की रोपाई में भी तेजी आएगी। जिससे अब धान का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं हैं। मुख्य कृषि अधिकारी की जेपी तिवारी का कहना है कि जिले में इस बार 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि अभी तक बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही थी, लेकिन अब बारिश होने से टारगेट पूरा होने की संभावाएं बढ़ गई है।
हो सकेगी मूंगफली, तिल की बुआई
घाड़ क्षेत्र के बुग्गावाला, धनौरी, बंजारेवाला आदि क्षेत्रों में स्थित हजारों बीघा ऊंचे-नीचे खेतों की सिंचाई नहीं होने से किसान मूंगफली, तिल, उड़द, ज्वार आदि की फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे थे। लेकिन अब बारिश ने मूंगफली, तिल, उड़द, ज्वार की फसलों की बुआई करने के लिए किसानों की राह आसान कर दी है।
बारिश से गन्ने की फसल के साथ ही धान की रोपाई में भी लाभ पहुंचाएगी। किसानों को चाहिए कि वह इस बारिश को पूरा उपयोग करें।
- डा. पुरुषोत्तम कुमार, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी
आम भी हो जाएगा मीठा
झबरेड़ा। बारिश से आम की मिठास भी बढ़ेगी। अभी तक बारिश के अभाव में आम भरपूर मीठा नहीं होने से स्वाद नहीं दे रहा था, लेकिन अब बारिश हो जाने से आम भी मीठा हो जाने से पूरा स्वाद देगा। इसके अलावा पोपलर के पेड़ों की भी सिंचाई बारिश से हो गई है।
कई जगह लभराव, परेशानी
रुड़की। बारिश के कारण शहर के पश्चिमी अंबर तालाब, प्रीत विहार, रामनगर, कचहरी रोड, मकतूलपुरी आदि कालोनियों में मंगलवार सुबह जलभराव हो गया। रामनगर में वैशाली मार्ग और अशोका रोड पर सड़कें टूटी होने के कारण पानी भर गया। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि बारिश ज्यादा तेज नहीं होने के कारण कुछ देर बाद इस पानी की निकासी हो गई। दोपहर बाद अधिकतर स्थानों से जलभराव खत्म हो चुका था।
रामनगर की गलियों में जलभराव होने से नाराज क्षेत्रवासियों ने पार्षद पंकज सतीजा के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में मन्नू मेहंदीरत्ता, राजीव शर्मा, गौरव दुआ, पुष्पा मेहंदीरत्ता, मीना भारद्वाज, हेमा भारद्वाज आदि शामिल थे। उन्होंने पार्षद पर क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए समय से काम नहीं करने का आरोप लगाया।
खुदी सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़
एडीबी की ओर से शहर की कई कालोनियों, रामनगर, मकतूलपुरी, संजय गांधी कालोनी और आवास विकास में पानी की लाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गईं, लेकिन उन्हें समतल नहीं कराया गया। ऐसे में मंगलवार को हुई बारिश के कारण ऐसी सभी गलियों में कीचड़ और जलभराव की समस्या सामने आई। कीचड़ के चलते लोग काफी परेशान भी हुए। मकतूलपुरी निवासी ईलमचंद और संदीप ने कहा कि कई बार एडीबी के अधिकारियों को सड़कें ठीक करने के लिए कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई जिससे यह परेशानी हुई। दोबारा बारिश होने पर यह समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है।
शहर में इस बार जलभराव की समस्या नहीं होगी। बड़े नालों की सफाई करा दी गई है छोटे नालों की सफाई की जा रही है। समय से सारे इंतजाम करा लिए जाएंगे। - यशपाल राणा, मेयर
हल्की सी बरसात भी नहीं झेल पाया आठ लाख का नाला
लक्सर। करीब आठ लाख की लागत से बनाया गया नाला पहली बरसात में ही धराशाई हो गया। ग्रामीणों ने नाला निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि ठेकेदार ने गांव के कुछ लोगों पर जान बूझकर नाले को ध्वस्त करने का आरोप लगाया है।
गोवर्धनपुर में जलनिकासी के लिए जिला पंचायत योजना से हाल ही में आठ लाख की लागत से पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नाला रात में हुई बारिश में ध्वस्त हो गया। ग्रामीण कुंवरपाल, चरण सिंह आदि का कहना है कि नाले के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने की बाबत पिछले दिनों जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत अधिशासी अधिकारी को निर्माण कार्य की जांच करने तथा गुणवत्ता को ध्यान मे रखकर निर्माण कार्य कराऐ जाने के आदेश दिए थे। न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही निर्माण कार्य की जांच कराई गई। लिहाजा नाला बरसात मे ध्वस्त हो गया। दूसरी तरफ नाले का निर्माण कराने वाले ठेकेदार सुनील वालिया का कहना है कि नाले का निर्माण गुणवत्ता को ध्यान में रखकर किया गया था। नाला बरसात में ध्वस्त नहीं हुआ बल्कि उसे कुछ लोगों ने जानबूझकर तोड़ा।
25 गांवों में गुल रही बिजली
सुल्तानपुर। क्षेत्र के करीब 25 से ज्यादा गांवों में बिजली गुल रहने से भारी परेशानी रही। सोमवार रात से गायब बिजली मंगलवार की दोपहर आई।
सोमवार की रात भारी बरसात और तेज हवा के कारण सुल्तानपुर क्षेत्र के मौहम्मदपुर कुंहारी, निहेंदपुर सुठारी, टिक्कमपुर, अलावलपुर, भिक्कमपुर, फतवा सहित करीब 25 गांवों में रात करीब एक बजे से बिजली आपूर्ति बंद हो गई थी। जिससे ग्रामीण रातभर परेशान रहे।