{"_id":"12-65540","slug":"Haridwar-65540-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा का तटबंध टूटा, दस गांवों को खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा का तटबंध टूटा, दस गांवों को खतरा
Haridwar
Updated Thu, 20 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
लक्सर/सुल्तानपुर। तहसील क्षेत्र के सौपरी गांव के पास गंगा का तटबंध टूट गया। इसके चलते दस गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। करीब 15 मीटर तटबंध टूटने के बाद गंगा का पानी तेजी के साथ खेतों से होते हुए आबादी की ओर बढ़ रहा है। देर रात तक आबादी क्षेत्र में पानी पहुंचने के बाद खतरे की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। राहत और बचाव के लिए सेना को बुलाया गया है।
सौपरी गांव में गंगा किनारे बने तटबंध में मंगलवार को ही कटाव शुरू हो गया था। बुधवार सुबह तक गंगा की तेज लहरों ने तटबंध को काफी नुकसान पहुंचा दिया। जानकारी मिलते ही तहसील, पुलिस और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मजदूरोें के साथ ग्रामीणों ने भी बचाव के लिए मिट्टी डालने का काम शुरू किया। दो जेसीबी भी मौके पर बुलाई गई, कुछ पेड़ों को उखाड़कर तटबंध पर डाला गया। कई घंटे मेहनत के बाद भी उफनती गंगा के आगे सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए। शाम करीब चार बजे गंगा की लहरों ने 15 मीटर तटबंध तोड़ दिया। तटबंध टूटते ही भारी मात्रा में पानी खेतों की ओर बढ़ने लगा। शाम करीब पांच बजे तक पानी खेतों में भर चुका था। देर रात तक गंगा का पानी गंगदासपुर, बहादराबाद, सौपरी, महाराजपुर कलां, महाराजपुर खुर्द, पंडितपुरी, शिवपुरी, रणजीतपुर, जसपुर, रामपुर रायघटी आदि गांवों को चपेट में ले लेगा। तटबंध टूटते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। सभी गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बचाव और राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ के साथ सेना को बुलाया गया है। कई गांवों में लोगों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था।
और बिगड़ सकते हैं हालात
सुल्तानपुर। सौपरी गांव का तटबंध का हिस्सा अभी और टूट सकता है। करीब आधा किलोमीटर लंबाई में तटबंध में कटाव हो रहा है। यदि इतना लंबा तटबंध पूरी तरह से टूटा तो गंगा के पानी का एक बड़ा हिस्सा आबादी की ओर रुख करेगा और ऐसे में हालत और बिगड़ सकते हैं।
विज्ञापन
पत्थरों की पेचिंग की होती तो न टूटता तटबंध
लक्सर। क्षेत्र के गांवों को गंगा के कहर से बचाने के लिए तीन साल पहले ही 21 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण किया गया था। 26 करोड़ रुपये से बनाया गया तटबंध तीन साल में ही धराशायी हो गया। सिंचाई विभाग ने तीन साल पहले मिट्टी का भरान कर तटबंध का निर्माण तो कराया लेकिन पत्थरों की पेचिंग नहीं की। यदि विभाग ने उसी समय पत्थरों की पेचिंग की होती तो तटबंध न टूटता। लेकिन विभाग की लापरवाही का खामियाजा अब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग पर बरसे विधायक
विधायक संजय गुप्ता ने तटबंध निर्माण में बरती गई अनियमितताओं के लिए सिंचाई विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा तटबंध निर्माण के दौरान 26 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई है। उन्होंने कहा कि 26 करोड़ रुपये को ईमानदारी से खर्च किया होता तो यह स्थिति न होती।
कोट....
तटबंध को बचाने के काफी प्रयास किए गए लेकिन पानी ज्यादा होने कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद पानी की जद में आने वाले गांवों की जनता को अलर्ट कर दिया गया। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सेना और एनडीआरफ को बुला लिया गया है। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि कोई जनहानि न हो।
- मोहम्मद नासिर, एसडीएम लक्सर
विज्ञापन
सौपरी गांव में गंगा किनारे बने तटबंध में मंगलवार को ही कटाव शुरू हो गया था। बुधवार सुबह तक गंगा की तेज लहरों ने तटबंध को काफी नुकसान पहुंचा दिया। जानकारी मिलते ही तहसील, पुलिस और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मजदूरोें के साथ ग्रामीणों ने भी बचाव के लिए मिट्टी डालने का काम शुरू किया। दो जेसीबी भी मौके पर बुलाई गई, कुछ पेड़ों को उखाड़कर तटबंध पर डाला गया। कई घंटे मेहनत के बाद भी उफनती गंगा के आगे सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए। शाम करीब चार बजे गंगा की लहरों ने 15 मीटर तटबंध तोड़ दिया। तटबंध टूटते ही भारी मात्रा में पानी खेतों की ओर बढ़ने लगा। शाम करीब पांच बजे तक पानी खेतों में भर चुका था। देर रात तक गंगा का पानी गंगदासपुर, बहादराबाद, सौपरी, महाराजपुर कलां, महाराजपुर खुर्द, पंडितपुरी, शिवपुरी, रणजीतपुर, जसपुर, रामपुर रायघटी आदि गांवों को चपेट में ले लेगा। तटबंध टूटते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। सभी गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बचाव और राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ के साथ सेना को बुलाया गया है। कई गांवों में लोगों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
और बिगड़ सकते हैं हालात
सुल्तानपुर। सौपरी गांव का तटबंध का हिस्सा अभी और टूट सकता है। करीब आधा किलोमीटर लंबाई में तटबंध में कटाव हो रहा है। यदि इतना लंबा तटबंध पूरी तरह से टूटा तो गंगा के पानी का एक बड़ा हिस्सा आबादी की ओर रुख करेगा और ऐसे में हालत और बिगड़ सकते हैं।
विज्ञापन
पत्थरों की पेचिंग की होती तो न टूटता तटबंध
लक्सर। क्षेत्र के गांवों को गंगा के कहर से बचाने के लिए तीन साल पहले ही 21 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण किया गया था। 26 करोड़ रुपये से बनाया गया तटबंध तीन साल में ही धराशायी हो गया। सिंचाई विभाग ने तीन साल पहले मिट्टी का भरान कर तटबंध का निर्माण तो कराया लेकिन पत्थरों की पेचिंग नहीं की। यदि विभाग ने उसी समय पत्थरों की पेचिंग की होती तो तटबंध न टूटता। लेकिन विभाग की लापरवाही का खामियाजा अब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग पर बरसे विधायक
विधायक संजय गुप्ता ने तटबंध निर्माण में बरती गई अनियमितताओं के लिए सिंचाई विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा तटबंध निर्माण के दौरान 26 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई है। उन्होंने कहा कि 26 करोड़ रुपये को ईमानदारी से खर्च किया होता तो यह स्थिति न होती।
कोट....
तटबंध को बचाने के काफी प्रयास किए गए लेकिन पानी ज्यादा होने कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद पानी की जद में आने वाले गांवों की जनता को अलर्ट कर दिया गया। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सेना और एनडीआरफ को बुला लिया गया है। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि कोई जनहानि न हो।
- मोहम्मद नासिर, एसडीएम लक्सर