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संतों का जीवन सदा परोपकार को समर्पित रहता है-स्वामी नवल किशोरदास
Updated Tue, 17 Apr 2018 10:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
धार्मिक अनुष्ठानों से देश में नई ऊर्जा का संचार होता है। जब अनुष्ठान का आयोजन गंगा के तट पर संतों के सानिध्य में होता है तब इसका फल और ज्यादा बढ़ जाता है।
भारतमातापुरम स्थित हनुमंत धाम के परमाध्यक्ष स्वामी नवल किशोरदास महाराज ने हनुमंत आश्रम के चौथे वार्षिकोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कहा कि संतों का जीवन सदा परोपकार के लिए समर्पित रहता है। जो भक्तों की आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है और उन्हें सत्कर्मों की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा देते हैं। महंत श्यामदास महाराज ने कहा कि जिस स्थल पर संत समागम होता है, वह स्थल पूजनीय हो जाता है।
बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति और पापों की निवृत्ति होती है। जो व्यक्ति लोभ प्रलोभन की भावना को त्याग कर संतों के सानिध्य में आ जाता है, उसका शेष जीवन सफल हो जाता है।
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स्वामी विष्णुदास महाराज ने हनुमंत धाम के चौथे स्थापना दिवस पर हनुमंत धाम के संस्थापक स्वामी नवल किशोरदास महाराज और उनके सैकड़ों श्रद्धालुओं को आश्रम के स्थापना दिवस के बारे में कहा कि आज का दिन श्रद्धालु भक्तों के लिए बड़ा सौभाग्य का दिन है ।इस अवसर पर कार्यक्रम के यजमान सत्यप्रकाश गोयल, बाबूलाल अग्रवाल, टीसी शर्मा, कमलनाथ मिश्रा, करतार भडाना आदि ने कार्यक्रम में आये सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस अवसर पर महंत प्रेमदास, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, बाबा हठयोगी, महंत दुर्गादास, स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी सतपाल ब्रह्मचारी, महंत श्यामदास, महंत अवधेशदास पांडे, महंत रामदास, महंत जगदीशदास, महंत परमेश्वरदास आदि उपस्थित रहे।
हरिद्वार।
धार्मिक अनुष्ठानों से देश में नई ऊर्जा का संचार होता है। जब अनुष्ठान का आयोजन गंगा के तट पर संतों के सानिध्य में होता है तब इसका फल और ज्यादा बढ़ जाता है।
भारतमातापुरम स्थित हनुमंत धाम के परमाध्यक्ष स्वामी नवल किशोरदास महाराज ने हनुमंत आश्रम के चौथे वार्षिकोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कहा कि संतों का जीवन सदा परोपकार के लिए समर्पित रहता है। जो भक्तों की आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है और उन्हें सत्कर्मों की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा देते हैं। महंत श्यामदास महाराज ने कहा कि जिस स्थल पर संत समागम होता है, वह स्थल पूजनीय हो जाता है।
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बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति और पापों की निवृत्ति होती है। जो व्यक्ति लोभ प्रलोभन की भावना को त्याग कर संतों के सानिध्य में आ जाता है, उसका शेष जीवन सफल हो जाता है।
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स्वामी विष्णुदास महाराज ने हनुमंत धाम के चौथे स्थापना दिवस पर हनुमंत धाम के संस्थापक स्वामी नवल किशोरदास महाराज और उनके सैकड़ों श्रद्धालुओं को आश्रम के स्थापना दिवस के बारे में कहा कि आज का दिन श्रद्धालु भक्तों के लिए बड़ा सौभाग्य का दिन है ।इस अवसर पर कार्यक्रम के यजमान सत्यप्रकाश गोयल, बाबूलाल अग्रवाल, टीसी शर्मा, कमलनाथ मिश्रा, करतार भडाना आदि ने कार्यक्रम में आये सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस अवसर पर महंत प्रेमदास, स्वामी चिद्विलासानंद, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, बाबा हठयोगी, महंत दुर्गादास, स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी सतपाल ब्रह्मचारी, महंत श्यामदास, महंत अवधेशदास पांडे, महंत रामदास, महंत जगदीशदास, महंत परमेश्वरदास आदि उपस्थित रहे।