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तापमान में बढ़ोतरी न होने से नहीं लौट रहे राजहंस
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
तापमान में बढ़ोतरी न होना राजहंसों की जीवन प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। यह तथ्य गुरुकुल कांगड़ी विवि के अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट की टीम के शोध कार्य में सामाने आया है। शोध टीम के अनुसार, इस वर्ष मिस्सरपुर गंगा घाट पर 35-36 राजहंसों के जोड़े पहुंचे, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी नहीं होने से राजहंसों की वापसी नहीं हो पा रही है।
प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि राजहंसों की वापसी के लिए दिनमान और तापमान दोनों की समनान्तर बढ़ोतरी होनी चाहिए। क्योंकि पर्यावरण के ये दोनों घटक पक्षियों के मस्तिष्क में स्थित जैविक घड़ी को प्रवास पर जाने का बोध कराते हैं और जैविक घड़ी की क्रिया से न्यूरो हार्मोन्स निर्गत होकर पक्षियों को माइग्रेशन के संकेत देते हैं। लेकिन तापमान में बढ़ोतरी न हो पाने के कारण राजहंसों की जीवन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और राजहंसों की वापसी नहीं हो पा रही है। प्रो. भट्ट ने बताया कि यदि राजहंसों की देर से वापसी हुई तो इनके प्रजजन काल का समय छोटा रह जाएगा। विदित हो कि प्रवासी पक्षी वापस स्वदेश लौटकर सबसे पहले जोड़ा बनाते हैं, घोसला बनाना, मादा पक्षी को रिझाना, एक-दूसरे की परवाह करना और अगस्त से पूर्व बच्चों का लालन-पालन पूर्ण कर लेते हैं। ये पक्षी अपने नए बच्चों के साथ पुन: बर्फ गिरने से पूर्व उष्ण कटिबंधीय देशों जैसे भारतीय उपमहाद्वीप में शरद, शिशिर और हेमंत ऋतु बिताने के लिए यात्रा पर निकल आते हैं, ताकि ये अत्यधिक ठंड से अपने परिवार की रक्षा कर सकें। प्रो. भट्ट के साथ वर्तमान में डॉ. अमर सिंह, रोबिन, पारूल, आशीष शोधरत हैं।
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तापमान में बढ़ोतरी न होना राजहंसों की जीवन प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। यह तथ्य गुरुकुल कांगड़ी विवि के अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट की टीम के शोध कार्य में सामाने आया है। शोध टीम के अनुसार, इस वर्ष मिस्सरपुर गंगा घाट पर 35-36 राजहंसों के जोड़े पहुंचे, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी नहीं होने से राजहंसों की वापसी नहीं हो पा रही है।
प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि राजहंसों की वापसी के लिए दिनमान और तापमान दोनों की समनान्तर बढ़ोतरी होनी चाहिए। क्योंकि पर्यावरण के ये दोनों घटक पक्षियों के मस्तिष्क में स्थित जैविक घड़ी को प्रवास पर जाने का बोध कराते हैं और जैविक घड़ी की क्रिया से न्यूरो हार्मोन्स निर्गत होकर पक्षियों को माइग्रेशन के संकेत देते हैं। लेकिन तापमान में बढ़ोतरी न हो पाने के कारण राजहंसों की जीवन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और राजहंसों की वापसी नहीं हो पा रही है। प्रो. भट्ट ने बताया कि यदि राजहंसों की देर से वापसी हुई तो इनके प्रजजन काल का समय छोटा रह जाएगा। विदित हो कि प्रवासी पक्षी वापस स्वदेश लौटकर सबसे पहले जोड़ा बनाते हैं, घोसला बनाना, मादा पक्षी को रिझाना, एक-दूसरे की परवाह करना और अगस्त से पूर्व बच्चों का लालन-पालन पूर्ण कर लेते हैं। ये पक्षी अपने नए बच्चों के साथ पुन: बर्फ गिरने से पूर्व उष्ण कटिबंधीय देशों जैसे भारतीय उपमहाद्वीप में शरद, शिशिर और हेमंत ऋतु बिताने के लिए यात्रा पर निकल आते हैं, ताकि ये अत्यधिक ठंड से अपने परिवार की रक्षा कर सकें। प्रो. भट्ट के साथ वर्तमान में डॉ. अमर सिंह, रोबिन, पारूल, आशीष शोधरत हैं।
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