{"_id":"5b7ef04742c792464429e74e","slug":"81535045703-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से उतम चरित्र का निर्माण होता है: ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से उतम चरित्र का निर्माण होता है: ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:05 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। मनुष्य ज्ञान की प्ररेणा से ओतप्रोत होकर सत्कर्मों की ओर अग्रसर होता है। यह बात जयराम आश्रम के पीठाधीष्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने सप्तऋषि स्थित श्री हरि करुणा धाम में नारायण सेवा संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि गंगा तट व धर्मनगरी में जो भक्त और भगवान की इस संयुक्त कथा का श्रवण कर लेता है, उसके जन्म जन्मांतर के पापों का शमन हो जाता है। गुरु गद्दी के सानिध्य में भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति का जीवन भवसागर से पार हो जाता है। कथा व्यास आचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर ने कथा के विधान एवं श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलियुग में भगवान का नाम स्मरण ही भवसागर की वैैतरणी है। श्रीमद् भागवत कथा में सब कुछ ग्राह्य है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है। आश्रम की परमाध्यक्ष साध्वी करुणा गिरि ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से पुण्य की प्राप्ति और जीवन में ज्ञान का प्रकाश होता है। हमें इसके ज्ञान को आत्मसात कर किसी भी व्यक्ति को हीन भावना से नहीं देखना चाहिए। अपने सामर्थ्य अनुसार गरीब असहाय लोगों की मदद करनी चाहिए। इस अवसर पर कुंज बिहारी मिश्रा, प्रफुल्ल व्यास, रजनीष कुमार आदि ने सभी संत महापुरुषों का फूल- माला पहनाकर स्वागत किया।
हरिद्वार। श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। मनुष्य ज्ञान की प्ररेणा से ओतप्रोत होकर सत्कर्मों की ओर अग्रसर होता है। यह बात जयराम आश्रम के पीठाधीष्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने सप्तऋषि स्थित श्री हरि करुणा धाम में नारायण सेवा संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि गंगा तट व धर्मनगरी में जो भक्त और भगवान की इस संयुक्त कथा का श्रवण कर लेता है, उसके जन्म जन्मांतर के पापों का शमन हो जाता है। गुरु गद्दी के सानिध्य में भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति का जीवन भवसागर से पार हो जाता है। कथा व्यास आचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर ने कथा के विधान एवं श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलियुग में भगवान का नाम स्मरण ही भवसागर की वैैतरणी है। श्रीमद् भागवत कथा में सब कुछ ग्राह्य है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है। आश्रम की परमाध्यक्ष साध्वी करुणा गिरि ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से पुण्य की प्राप्ति और जीवन में ज्ञान का प्रकाश होता है। हमें इसके ज्ञान को आत्मसात कर किसी भी व्यक्ति को हीन भावना से नहीं देखना चाहिए। अपने सामर्थ्य अनुसार गरीब असहाय लोगों की मदद करनी चाहिए। इस अवसर पर कुंज बिहारी मिश्रा, प्रफुल्ल व्यास, रजनीष कुमार आदि ने सभी संत महापुरुषों का फूल- माला पहनाकर स्वागत किया।
विज्ञापन