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वैचारिक, सांस्कृतिक, आर्थिक गुलामी से देश को मुक्त कराना हमारा संकल्प: रामदेव
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:13 AM IST
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हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ में 69वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ, पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क पदार्था में राष्ट्रीय उत्थान के संकल्प के साथ ध्वजारोहण कर समस्त देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा कि देश को आर्थिक गुलाम से आजादी दिलाना हमारा संकल्प है।
सेवाव्रती बहनों ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम’ का गायन किया और आचार्यकुलम के छात्रा-छात्राओं ने मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने देशभक्ति, राष्ट्रसेवा व स्वदेशी से प्रेरित अपने संबोधन में कहा कि सात लाख से अधिक वीर-वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजाद करवाया और सबको स्वाधीनता, स्वाभिमान व गौरव के साथ जीने का अधिकार दिलाया। आज से ठीक 69 वर्ष पूर्व एक व्यवस्था लागू की गई और देश को चलाने के लिए एक संवैधानिक स्वरूप दिया गया। एक सिस्टम में रहकर तंत्र की व्यवस्था चलाने के लिए इसे गणतंत्र कहा गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि वीर बलिदानियों ने जिस गौरवमयी स्वतंत्रा भारत की परिकल्पना की थी आज उसे साकार करने के लिए संकल्पित होने का दिन है।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शहीदों के स्वप्नों को मूर्तरूप देने के लिए हमें राष्ट्रयज्ञ में जीवन रूपी समाधि अर्पित करनी होंगी। देश की पावन परंपरा, संस्कृति व संविधान के रूप में जो व्यवस्था मिली है उसे अखंड बनाए रखने का संकल्प लें।
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सेवाव्रती बहनों ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम’ का गायन किया और आचार्यकुलम के छात्रा-छात्राओं ने मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने देशभक्ति, राष्ट्रसेवा व स्वदेशी से प्रेरित अपने संबोधन में कहा कि सात लाख से अधिक वीर-वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजाद करवाया और सबको स्वाधीनता, स्वाभिमान व गौरव के साथ जीने का अधिकार दिलाया। आज से ठीक 69 वर्ष पूर्व एक व्यवस्था लागू की गई और देश को चलाने के लिए एक संवैधानिक स्वरूप दिया गया। एक सिस्टम में रहकर तंत्र की व्यवस्था चलाने के लिए इसे गणतंत्र कहा गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि वीर बलिदानियों ने जिस गौरवमयी स्वतंत्रा भारत की परिकल्पना की थी आज उसे साकार करने के लिए संकल्पित होने का दिन है।
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आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शहीदों के स्वप्नों को मूर्तरूप देने के लिए हमें राष्ट्रयज्ञ में जीवन रूपी समाधि अर्पित करनी होंगी। देश की पावन परंपरा, संस्कृति व संविधान के रूप में जो व्यवस्था मिली है उसे अखंड बनाए रखने का संकल्प लें।
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