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भारी भीड़ के कारण पटरी से उतरी अव्यवस्थाएं
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:04 AM IST
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हरिद्वार।
सरकारी कार्यालयों में लगातार चार दिन अवकाश के चलते धर्मनगरी में उमड़ी यात्रियों की भीड़ ने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। शुक्रवार को शहर के अंदर यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को कई समस्याओं से दो चार होना पड़ा। जगह-जगह जाम और वाहनों के जमवाड़े से पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। प्रशासन और पुलिस की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ी। यही हाल रहा तो चारधाम यात्रा के दौरान क्या हालात होंगे इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
बृहस्पतिवार से रविवार तक सभी सरकारी कार्यालयों में अवकाश है। इसके अलावा अधिकांश स्कूलों में परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छुट्टियां हैं। आमतौर से गर्मी के सीजन में सप्ताह के अंतिम दो दिन हरिद्वार और ऋषिकेश में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार बृहस्पतिवार शाम को ही लोगों का यहां पहुंचना शुरू हो गया था। दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल से काफी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे थे। ट्रैफिक और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस की नींद नहीं टूटी और जिसकी जहां मर्जी आई वहीं वाहन पार्क कर दिए। शुक्रवार सुबह तक हरकी पैड़ी क्षेत्र से लेकर हाईवे तक जाम लगने लगा। जाम इस कदर था कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। जिला अस्पताल से लेकर रेलवे स्टेशन तक का पूरा क्षेत्र ऑटो और ई रिक्शा अटा रहा। यहां से निकलने में लोगों को पसीना बहाना पड़ा। श्रवणनाथनगर और निर्मला छावनी की गलियों में जाम लगा रहा।
बृहस्पतिवार रात को कई होटल और लॉजिंग हाउसों के बाहर गलियों में वाहनों के पार्क होने से लोगों का अपने घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। ललतारौ चौक से ऑटो के लिए वन वे की व्यवस्था नहीं की गई थी। इससे भी हालात बद से बदतर हो गए। ऑटों वाले श्रवणनाथ नगर से हिमालय डिपो की गली, हैप्पी स्कूल गली, चित्रा टाकीज गली, गुजरात भवन की गली और सिंचाई विभाग के कार्यालय के सामने की गली से मुख्य सड़क पर आकर एकल मार्ग व्यवस्था को ठेंगा दिखाते रहे। उत्तरी हरिद्वार के भीमगोड़ा, खड़खड़ी और सूखी नदी आदि क्षेत्रों में भी ऐसा ही नजारा था। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस प्रशासन जब तक नींद से जागता जब तक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी थी। जिसके चलते शाम तक भी जाम के झाम से मुक्ति नहीं मिल पाई।
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एनजीटी के आदेशों की उड़ी धज्जियां, बिकती रही पॉलिथीन
एनजीटी के आदेशों का शुक्रवार को पूरी तरह उल्लंघन होता नजर आया। खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए गंगाघाटों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों और भिखारियों की लाइन लगवाकर अवैध लंगर बंटवाए। नगर निगम और पुलिस की लापरवाही के कारण पॉलिथीन, प्लास्टिक, डिस्पोजल का जमकर उपयोग किया जाता रहा । पॉलिथीन की थैलियों में बेधड़क प्रसाद बिकता रहा।
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गऊघाट अतिक्रमण की चपेट में
अतिक्रमण से गऊघाट की स्थिति बहुत ही खतरनाक हो गई है। गऊघाट के जिस पुल के नीचे श्रद्धालु कभी धूप तथा ठंड सेे बचने के लिए खड़े हो जाते थे। उस स्थान पर अब खड़े होने के लिए भी जगह नहीं है। अब गऊघाट और रोडी बेलवाला को अवैध अतिक्रमण से पाट दिया गया है। गऊघाट पर अब नगर निगम भी एक फूल, प्रसाद व गंगाजलि का ठेका दे दिया है जिससे अतिक्रमण और बढ़ गया है। यहां पुल पर आने-जाने के लिए जगह नहीं बची है। भीड़ बढ़ने पर हादसे का अंदेशा बना रहता है।
सरकारी कार्यालयों में लगातार चार दिन अवकाश के चलते धर्मनगरी में उमड़ी यात्रियों की भीड़ ने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। शुक्रवार को शहर के अंदर यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को कई समस्याओं से दो चार होना पड़ा। जगह-जगह जाम और वाहनों के जमवाड़े से पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। प्रशासन और पुलिस की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ी। यही हाल रहा तो चारधाम यात्रा के दौरान क्या हालात होंगे इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
बृहस्पतिवार से रविवार तक सभी सरकारी कार्यालयों में अवकाश है। इसके अलावा अधिकांश स्कूलों में परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छुट्टियां हैं। आमतौर से गर्मी के सीजन में सप्ताह के अंतिम दो दिन हरिद्वार और ऋषिकेश में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार बृहस्पतिवार शाम को ही लोगों का यहां पहुंचना शुरू हो गया था। दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल से काफी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे थे। ट्रैफिक और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस की नींद नहीं टूटी और जिसकी जहां मर्जी आई वहीं वाहन पार्क कर दिए। शुक्रवार सुबह तक हरकी पैड़ी क्षेत्र से लेकर हाईवे तक जाम लगने लगा। जाम इस कदर था कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। जिला अस्पताल से लेकर रेलवे स्टेशन तक का पूरा क्षेत्र ऑटो और ई रिक्शा अटा रहा। यहां से निकलने में लोगों को पसीना बहाना पड़ा। श्रवणनाथनगर और निर्मला छावनी की गलियों में जाम लगा रहा।
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बृहस्पतिवार रात को कई होटल और लॉजिंग हाउसों के बाहर गलियों में वाहनों के पार्क होने से लोगों का अपने घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। ललतारौ चौक से ऑटो के लिए वन वे की व्यवस्था नहीं की गई थी। इससे भी हालात बद से बदतर हो गए। ऑटों वाले श्रवणनाथ नगर से हिमालय डिपो की गली, हैप्पी स्कूल गली, चित्रा टाकीज गली, गुजरात भवन की गली और सिंचाई विभाग के कार्यालय के सामने की गली से मुख्य सड़क पर आकर एकल मार्ग व्यवस्था को ठेंगा दिखाते रहे। उत्तरी हरिद्वार के भीमगोड़ा, खड़खड़ी और सूखी नदी आदि क्षेत्रों में भी ऐसा ही नजारा था। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस प्रशासन जब तक नींद से जागता जब तक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी थी। जिसके चलते शाम तक भी जाम के झाम से मुक्ति नहीं मिल पाई।
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एनजीटी के आदेशों की उड़ी धज्जियां, बिकती रही पॉलिथीन
एनजीटी के आदेशों का शुक्रवार को पूरी तरह उल्लंघन होता नजर आया। खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए गंगाघाटों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों और भिखारियों की लाइन लगवाकर अवैध लंगर बंटवाए। नगर निगम और पुलिस की लापरवाही के कारण पॉलिथीन, प्लास्टिक, डिस्पोजल का जमकर उपयोग किया जाता रहा । पॉलिथीन की थैलियों में बेधड़क प्रसाद बिकता रहा।
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गऊघाट अतिक्रमण की चपेट में
अतिक्रमण से गऊघाट की स्थिति बहुत ही खतरनाक हो गई है। गऊघाट के जिस पुल के नीचे श्रद्धालु कभी धूप तथा ठंड सेे बचने के लिए खड़े हो जाते थे। उस स्थान पर अब खड़े होने के लिए भी जगह नहीं है। अब गऊघाट और रोडी बेलवाला को अवैध अतिक्रमण से पाट दिया गया है। गऊघाट पर अब नगर निगम भी एक फूल, प्रसाद व गंगाजलि का ठेका दे दिया है जिससे अतिक्रमण और बढ़ गया है। यहां पुल पर आने-जाने के लिए जगह नहीं बची है। भीड़ बढ़ने पर हादसे का अंदेशा बना रहता है।