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उपवास रखकर की मां शैलपुत्री की उपासना
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
वासंतिक नवरात्र शनिवार से प्रारंभ हो गए हैं। पंचपुरी के सभी देवी मंदिरों में सवेरे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। घरों में देवी के मंगल कलश स्थापित किए गए और उपवास रखकर मां के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना की गई। कई मंदिरों में शतचंडी के साथ-साथ भगवती के अनुष्ठान भी शुरू हुए।
हरिद्वार की अधिष्ठात्री मायादेवी के मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी। मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों में भक्तों ने मां भगवती के दर्शन किए। दोनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतार दिनभर रही। नारियल और चुनरी चढ़ाकर भक्तों ने मंगल कामना की।
शिवालिक पर्वत स्थित मां सुरेश्वरी देवी के मंदिर में श्रद्धालु सुबह से ही पहुंचने लगे थे। निर्जन वन में इस मंदिर में शतचंडी यज्ञ का पाठ हुआ। इसी प्रकार अंजनी देवी, मकर वाहिनी, मां तारा, बगुलामुखी, महिषासुर मर्दिनी आदि देवी मंदिरों में माता की आराधना की गई है।
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वासंतिक एवं शारदीय दोनों नवरात्रों में देवी भागवत के पाठ घरों में बैठाए जाते हैं। शनिवार को सुबह और दोपहर सिद्ध मुहूर्तों में औषध मिश्रित जल कलश पूजा स्थलों पर स्थापित किए गए। कलशों में आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर चावल से भरा दूसरा कलश रखा गया। यह कलश जल कलश के ऊपर स्थापित करने से घर धन धान्य की वृद्धि होती है। इस कलश के ऊपर श्रीफल स्थापित किया जाता है। प्रथम पूज्य श्रीगणेश के बाद मां दुुर्गा और शैलपुत्री के स्वरूप की सामूहिक पूजा घरों में की गई। इसके देवी भागवत के पाठ हुए। शनिवार को ही पंचपुरी के कई स्थानों पर रामचरित मानस के पाठ और राम कथाएं प्रारंभ हुईं। इन पाठों का समापन रामनवमी के दिन होगा।
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वासंतिक नवरात्र शनिवार से प्रारंभ हो गए हैं। पंचपुरी के सभी देवी मंदिरों में सवेरे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। घरों में देवी के मंगल कलश स्थापित किए गए और उपवास रखकर मां के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना की गई। कई मंदिरों में शतचंडी के साथ-साथ भगवती के अनुष्ठान भी शुरू हुए।
हरिद्वार की अधिष्ठात्री मायादेवी के मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ी। मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों में भक्तों ने मां भगवती के दर्शन किए। दोनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतार दिनभर रही। नारियल और चुनरी चढ़ाकर भक्तों ने मंगल कामना की।
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शिवालिक पर्वत स्थित मां सुरेश्वरी देवी के मंदिर में श्रद्धालु सुबह से ही पहुंचने लगे थे। निर्जन वन में इस मंदिर में शतचंडी यज्ञ का पाठ हुआ। इसी प्रकार अंजनी देवी, मकर वाहिनी, मां तारा, बगुलामुखी, महिषासुर मर्दिनी आदि देवी मंदिरों में माता की आराधना की गई है।
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वासंतिक एवं शारदीय दोनों नवरात्रों में देवी भागवत के पाठ घरों में बैठाए जाते हैं। शनिवार को सुबह और दोपहर सिद्ध मुहूर्तों में औषध मिश्रित जल कलश पूजा स्थलों पर स्थापित किए गए। कलशों में आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर चावल से भरा दूसरा कलश रखा गया। यह कलश जल कलश के ऊपर स्थापित करने से घर धन धान्य की वृद्धि होती है। इस कलश के ऊपर श्रीफल स्थापित किया जाता है। प्रथम पूज्य श्रीगणेश के बाद मां दुुर्गा और शैलपुत्री के स्वरूप की सामूहिक पूजा घरों में की गई। इसके देवी भागवत के पाठ हुए। शनिवार को ही पंचपुरी के कई स्थानों पर रामचरित मानस के पाठ और राम कथाएं प्रारंभ हुईं। इन पाठों का समापन रामनवमी के दिन होगा।