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नगर निगम में संपति नामांतरण का काम ठप

Sun, 17 Feb 2019 12:17 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 17 Feb 2019 12:17 AM IST
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नगर निगम में संपति नामांतरण का काम ठप
हरिद्वार। नगर निगम संपत्तियों के नामांतरण का काम ढाई महीने से ठप है। सैकड़ों लोगों के संपत्ति नामांतरण के आवेदन पत्र फाइलों में बंद पड़े हैं। आवेदक नगर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों के चक्कर काट रहे हैं।
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पिछले साल दिसंबर से संपत्ति नामांतरण का काम नहीं हो पा रहा है। सेवा का अधिकार अधिनियम की भी अवहेलना की जा रही है। जिसमें संपत्ति नामांतरण के आवेदनों को 60 दिन के अंदर निस्तारित करने का प्रावधान हैं। नगर निगम में दो सौ से अधिक संपत्ति नामांतरण के प्रकरण लंबित हैं। संपत्ति नामांतरण का काम पहले नि:शुल्क किया जाता था। बाद में नगर निगम बोर्ड ने इसको भी आय जरिया बनाने का प्रस्ताव पारित किया। जिसके अनुसार व्यावसायिक संपत्ति क्रय-विक्रय पत्र का नाम दर्ज कराने के लिए पांच हजार रुपये घरेलू संपत्ति के लिए ढाई हजार रुपये, दानपात्र और मृत्यु के बाद नामांतरण के लिए हजार रुपये का शुल्क लिया जाता है। नियमानुसार आवेदन प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अनिवार्य रूप से नोटिस को सार्वजनिक से प्रकाशन कराया जाना होता है। लेकिन संपत्ति नामांतरण के पिछले प्रकाशनों का भुगतान करने पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक रत्नेश कुमार द्वारा रोक लगा दिए जाने से संपत्ति नामांतरण का काम ठप ही हो गया है। प्रकरण को नगर आयुक्त के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने मुख्य नगर लेखा परीक्षक से इस संबंध में अपना स्पष्ट मत देने के लिए लिखा तो होने अपना मत बताने के बजाए सहायक नगर आयुक्त से मत मांग लिया है, उन्होंने भी कुछ नहीं किया, इस प्रकार सैकड़ों लोगों के आवेदन पत्रों को फाइलों में कैद कर रख दिया गया है। जिन आवेदनों को दो महीने का समय हो चुका है और अभी तक नोटिस प्रकाशन भी नहीं हुआ है। अब कई लोग सेवा अधिकार आयोग में जाने की तैयारी कर रहे हैं। नगर निगम सेवा का अधिकार आयोग विलंब के पहले भी फटकार लगा चुका है।
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संपत्ति नामांतरण संबंधी प्रकरण संज्ञान में लाया गया है। इस संबंध में मुख्य नगर लेखा परीक्षक से बात कर जनहित में जल्दी प्रकरण को हल किया जाएगा।
- आलोक कुमार पांडेय नगर आयुुक्त
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