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राष्ट्रीय एकता में शंकराचार्य का बड़ा योगदान
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सन्यास परंपरा के प्रवर्तक जगद्गुरु भगवान आद्य शंकराचार्य जयंती पर आयोजित महोत्सव के तहत शंकराचार्य चौक और हरकी पौड़ी पर श्री विग्रह पूजन और सूरतगिरि बंगले में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
श्रद्धांजलि सभा में आद्य शंकराचार्य स्मारक समिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत और सनातन हिंदू धर्म को एकता के सूत्र में बांधने वाले शंकराचार्य शंकर के अवतार थे। दशनाम सन्यास परंपरा के प्रवर्तक आचार्य शंकर के पुरुषार्थ से ही सनातन हिंदू धर्म की बौद्ध धर्म से रक्षा हो पाई। राष्ट्र को धार्मिक सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने के लिए देश के चारों कोनों में शंकराचार्य पीठ स्थापित कर आद्य शंकराचार्य ने राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया। श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म और सन्यासी परंपरा सदैव शंकराचार्य की ऋणी रहेगी। जिन्होंने आततायियों से हिंदू धर्म की रक्षा कर सन्यासियों के अखाड़ों की परंपरा का सृजन किया। महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य महाराज ने कहा कि शंकराचार्य ने तीन बार देश की पदयात्रा कर सनातन हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार का जो जागरण किया उसके चलते ही हिंदू धर्म की रक्षा हुई। स्वामी प्रेमानंद, भारत माता मंदिर के श्री महंत ललितानंद गिरि, श्री महंत विनोद गिरि, महंत मोहन दास रामायणी, स्वामी कमलानंद, स्वामी सदानंद, स्वामी शरदपुरी, महंत खेमसिंह, कोठारी मनोहरपुरी आदि संत इस मौके पर उपस्थित रहे।
हरिद्वार।
सन्यास परंपरा के प्रवर्तक जगद्गुरु भगवान आद्य शंकराचार्य जयंती पर आयोजित महोत्सव के तहत शंकराचार्य चौक और हरकी पौड़ी पर श्री विग्रह पूजन और सूरतगिरि बंगले में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
श्रद्धांजलि सभा में आद्य शंकराचार्य स्मारक समिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत और सनातन हिंदू धर्म को एकता के सूत्र में बांधने वाले शंकराचार्य शंकर के अवतार थे। दशनाम सन्यास परंपरा के प्रवर्तक आचार्य शंकर के पुरुषार्थ से ही सनातन हिंदू धर्म की बौद्ध धर्म से रक्षा हो पाई। राष्ट्र को धार्मिक सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने के लिए देश के चारों कोनों में शंकराचार्य पीठ स्थापित कर आद्य शंकराचार्य ने राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया। श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म और सन्यासी परंपरा सदैव शंकराचार्य की ऋणी रहेगी। जिन्होंने आततायियों से हिंदू धर्म की रक्षा कर सन्यासियों के अखाड़ों की परंपरा का सृजन किया। महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य महाराज ने कहा कि शंकराचार्य ने तीन बार देश की पदयात्रा कर सनातन हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार का जो जागरण किया उसके चलते ही हिंदू धर्म की रक्षा हुई। स्वामी प्रेमानंद, भारत माता मंदिर के श्री महंत ललितानंद गिरि, श्री महंत विनोद गिरि, महंत मोहन दास रामायणी, स्वामी कमलानंद, स्वामी सदानंद, स्वामी शरदपुरी, महंत खेमसिंह, कोठारी मनोहरपुरी आदि संत इस मौके पर उपस्थित रहे।
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