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अनशन के 114वे दिन हरिद्वार पहुंचे आत्मबोधानंद
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
गंगा की रक्षा के लिए 22 दिनों से प्रयागराज में गंगा रक्षा के लिए अनशन करने के बाद मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद हरिद्वार लौट आए हैं। बृहस्पतिवार को 114वें दिन भी भी आत्मबोधानंद का अनशन जारी रहा। उन्होंने कहा कि वह अंतिम सांस तक गंगा की रक्षा के लिए अनशन जारी रखेंगे।
स्वामी सानंद की मांगों के समर्थन और गंगा की रक्षा की मांग को को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 24 अक्तूबर को आमरण अनशन पर बैठे थे। 22 जनवरी को मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी दयानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सहित अन्य प्रयागराज कुंभ के लिए रवाना हुए थे। तब से उनका अनशन प्रयागराज में ही चल रहा था। जहां कई संगठनों, छात्रों और श्रद्धालुओं ने मातृसदन का समर्थन किया। बुधवार को सभी लोग जगजीतपुर स्थित मातृसदन लौट आए। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रयागराज में यूपी और उत्तराखंड के कई जनप्रतिनिधियों ने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि अखाड़ों के महामंडलेश्वर प्रयाग में ही थे, लेकिन गंगा के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की सुध लेने कोई नहीं आया।
सोशल मीडिया पर गंगा की रक्षा का प्रचार तेज
सोशल मीडिया पर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के समर्थन और गंगा की रक्षा के लिए प्रचार तेज हो गया है। कई संगठन मातृसदन के समर्थन में आए हैं। फेसबुक और ट्वीटर पर गंगा के लिए एक अकाउंट बनाया गया है। साथ ही फ्री गंगा के नाम से हैष टैग का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही गंगा की अविरलता के लिए लोगों द्वारा पोस्टर के साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर अपलोड की जा रही है।
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गंगा की रक्षा के लिए 22 दिनों से प्रयागराज में गंगा रक्षा के लिए अनशन करने के बाद मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद हरिद्वार लौट आए हैं। बृहस्पतिवार को 114वें दिन भी भी आत्मबोधानंद का अनशन जारी रहा। उन्होंने कहा कि वह अंतिम सांस तक गंगा की रक्षा के लिए अनशन जारी रखेंगे।
स्वामी सानंद की मांगों के समर्थन और गंगा की रक्षा की मांग को को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 24 अक्तूबर को आमरण अनशन पर बैठे थे। 22 जनवरी को मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी दयानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सहित अन्य प्रयागराज कुंभ के लिए रवाना हुए थे। तब से उनका अनशन प्रयागराज में ही चल रहा था। जहां कई संगठनों, छात्रों और श्रद्धालुओं ने मातृसदन का समर्थन किया। बुधवार को सभी लोग जगजीतपुर स्थित मातृसदन लौट आए। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रयागराज में यूपी और उत्तराखंड के कई जनप्रतिनिधियों ने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि अखाड़ों के महामंडलेश्वर प्रयाग में ही थे, लेकिन गंगा के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की सुध लेने कोई नहीं आया।
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सोशल मीडिया पर गंगा की रक्षा का प्रचार तेज
सोशल मीडिया पर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के समर्थन और गंगा की रक्षा के लिए प्रचार तेज हो गया है। कई संगठन मातृसदन के समर्थन में आए हैं। फेसबुक और ट्वीटर पर गंगा के लिए एक अकाउंट बनाया गया है। साथ ही फ्री गंगा के नाम से हैष टैग का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही गंगा की अविरलता के लिए लोगों द्वारा पोस्टर के साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर अपलोड की जा रही है।
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