{"_id":"5b4a46284f1c1b4f748b4bb1","slug":"41531594280-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधार कार्ड बनाने वालों ने कराया फर्जीवाड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधार कार्ड बनाने वालों ने कराया फर्जीवाड़ा
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:21 AM IST
विज्ञापन
हरिद्वार। बहादराबाद विकासखंड में 38 ग्रामीणों की आयु बढ़ाकर वृद्धावस्था पेंशन शुरू करवाने का फर्जीवाड़े आधार कार्ड की मदद से हुआ है। आधार कार्ड बनाने वाली प्राइवेट एजेंसी ने कम उम्र के लोगों को जारी किये कार्ड में उन्हें वृद्ध दिखाया है। जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा की जांच में पुष्टी हुई कि प्राइवेट लाइसेंस लेकर आधार कार्ड बनाने वालों की घोटाले में अहम भूमिका है। प्रशासन अब ऐसे लाइसेंस धारकों की पड़ताल कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इस घोटाले के तार दूसरे कई ग्रामीण क्षेत्रों से भी जुड़े हो सकते हैं।
जिले के ग्राम रसूलपुर टोंगिया और डालूवाला कलां में एक ग्रामीण की शिकायत पर राज्य सूचना आयोग के आदेश पर अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने शुक्रवार जांच की थी। जांच में 27 ग्रामीणों के इस फर्जीवाड़े में लिप्त होने की बात पुष्टि हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस घोटाला गांव के आसपास आधारकार्ड बनाने वाली प्राइवेट एजेंसियों की मिलीभगत से हुआ। आधार कार्ड में कम उम्र के लोगों की उम्र साठ साल से ज्यादा दिखाकर उन्हें वृद्घावस्था पेंशन का पात्र बना दिया। पेंशन जारी करने से समाज कल्याण विभाग ने मौके पर जाकर सत्यापन तक नहीं किया। जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि जिन एजेंसियों पर आधार कार्ड बनवाए गए थे उनकी भूमिका की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामले कई अन्य गांवों में भी होने की शिकायतें मिल रही हैं इनके आधार पर भी जांच की जाएगी। वहीं दूसरी और जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपराज अग्निहोत्री ने बताया कि आधार कार्ड के आधार पर ही उम्र का सत्यापन कर पेंशन के फार्म स्वीकृत किए गए थे। इस बारे में विभाग की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
विज्ञापन
जिले के ग्राम रसूलपुर टोंगिया और डालूवाला कलां में एक ग्रामीण की शिकायत पर राज्य सूचना आयोग के आदेश पर अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने शुक्रवार जांच की थी। जांच में 27 ग्रामीणों के इस फर्जीवाड़े में लिप्त होने की बात पुष्टि हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस घोटाला गांव के आसपास आधारकार्ड बनाने वाली प्राइवेट एजेंसियों की मिलीभगत से हुआ। आधार कार्ड में कम उम्र के लोगों की उम्र साठ साल से ज्यादा दिखाकर उन्हें वृद्घावस्था पेंशन का पात्र बना दिया। पेंशन जारी करने से समाज कल्याण विभाग ने मौके पर जाकर सत्यापन तक नहीं किया। जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि जिन एजेंसियों पर आधार कार्ड बनवाए गए थे उनकी भूमिका की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामले कई अन्य गांवों में भी होने की शिकायतें मिल रही हैं इनके आधार पर भी जांच की जाएगी। वहीं दूसरी और जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपराज अग्निहोत्री ने बताया कि आधार कार्ड के आधार पर ही उम्र का सत्यापन कर पेंशन के फार्म स्वीकृत किए गए थे। इस बारे में विभाग की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
विज्ञापन