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मां बोलती है, कब लौटेगी मेरी लाडली
Updated Fri, 27 Apr 2018 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात सतीश के घर में पांच महीने से मातम पसरा है। कारण अब तक उनकी लाडली बेटी सारिका का कोई अता पता नहीं चलना है। पुलिस से फरियाद करते हैं तो बस यही आश्वासन मिलता है कि जल्द उसकी बरामदगी कर दी जाएगी। पूरा परिवार लाडली के गम में डूबा है। रह रह कर मां एक ही सवाल करती है कि आखिर मेरी बिटिया कब घर लौटेगी।
आपरेशन स्माइल चलाकर वाहवाही लूटने वाली पुलिस की नाकामयाबी आठ साल की एक मासूम का सुराग नहीं लगा पाने से साफ झलकती है। दिसंबर माह की तीन तारीख को मेला अस्पताल से चंद कदम की दूरी पर रह रहे जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी सतीश की आठ साल की बेटी सारिका घर से खेलने की बात कहकर निकली थी। तब से उसका कोई सुराग नहीं लग सका।
परिजनों की सूचना पर पुलिस हरकत में आई थी, लेकिन चंद दिन बाद पुलिस भी चुपचाप बैठ गई। प्रारंभिक जांच में बालिका के एक किशोरी के साथ जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं हो पाई। यह भी सामने आया कि नाबालिग उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में देखी गई, लेकिन तब भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाई। पिछले कई माह से पुलिस केवल कोरे दावे ही कर रही है।
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इधर चार बेटियों के पिता सतीश कुमार रुंधे गले से कहते है कि साहब वह मेरी सबसे छोटी बिटिया है, परिवार में सबकी लाडली है। वो कहां है, कैसी है। कई तरह के सवाल जेहन में आते हैं। उनका कहना है कि पत्नी का सबसे छोटी बेटी सारिका को याद कर बुरा हाल है। पूरा दिन आंसुओं के साथ ही गुजरता है। उन्हें उम्मीद है कि, उनकी बेटी एक न एक दिन उन्हें जरूर मिल जाएगी।
हरिद्वार।
स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात सतीश के घर में पांच महीने से मातम पसरा है। कारण अब तक उनकी लाडली बेटी सारिका का कोई अता पता नहीं चलना है। पुलिस से फरियाद करते हैं तो बस यही आश्वासन मिलता है कि जल्द उसकी बरामदगी कर दी जाएगी। पूरा परिवार लाडली के गम में डूबा है। रह रह कर मां एक ही सवाल करती है कि आखिर मेरी बिटिया कब घर लौटेगी।
आपरेशन स्माइल चलाकर वाहवाही लूटने वाली पुलिस की नाकामयाबी आठ साल की एक मासूम का सुराग नहीं लगा पाने से साफ झलकती है। दिसंबर माह की तीन तारीख को मेला अस्पताल से चंद कदम की दूरी पर रह रहे जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी सतीश की आठ साल की बेटी सारिका घर से खेलने की बात कहकर निकली थी। तब से उसका कोई सुराग नहीं लग सका।
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परिजनों की सूचना पर पुलिस हरकत में आई थी, लेकिन चंद दिन बाद पुलिस भी चुपचाप बैठ गई। प्रारंभिक जांच में बालिका के एक किशोरी के साथ जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उसकी पुष्टि नहीं हो पाई। यह भी सामने आया कि नाबालिग उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में देखी गई, लेकिन तब भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाई। पिछले कई माह से पुलिस केवल कोरे दावे ही कर रही है।
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इधर चार बेटियों के पिता सतीश कुमार रुंधे गले से कहते है कि साहब वह मेरी सबसे छोटी बिटिया है, परिवार में सबकी लाडली है। वो कहां है, कैसी है। कई तरह के सवाल जेहन में आते हैं। उनका कहना है कि पत्नी का सबसे छोटी बेटी सारिका को याद कर बुरा हाल है। पूरा दिन आंसुओं के साथ ही गुजरता है। उन्हें उम्मीद है कि, उनकी बेटी एक न एक दिन उन्हें जरूर मिल जाएगी।