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वन प्रभाग करेगा गौरेया की गणना
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हरिद्वार। गौरेया चिड़िया की वास्तविक संख्या जानने के लिए वन विभाग अगले माह गौरेया दिवस पर इनकी गणना करेगा। इसके बाद इनके संरक्षण के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।
बीते कुछ वर्षों में बढ़ते शहरीकरण के कारण गौरेया चिड़िया की संख्या में तेजी से कमी आई है। हरिद्वार में ही आंगन में दिखने वाली गौरेया भी बिरले ही नजर आती है। जबकि अधिकांश स्थानों से गौरेया विलुप्त ही हो गई है। हरिद्वार में राजाजी टाइगर रिजर्व, गंगा के तटवर्ती इलाके, श्यामपुर और लालढांग क्षेत्र में ही गौरेया देखी जा जाती है, लेकिन यहां भी संख्या में काफी कमी देखी गई है। वन प्रभाग गौरेया की वास्तविक संख्या जानने और लोगों को गौरेया के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए 20 मार्च को गौरेया दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन करेगा। साथ ही गौरेया की गणना करने के लिए योजना तैयार की जा रही है, जिससे गौरया की हरिद्वार में वास्तविक संख्या का पता लग सके और उनके संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जा सकें। साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा। जगह-जगह ट्री-हाउस लगाए जाएंगे।
डीएफओ आकाश वर्मा ने बताया कि लोग गौरेया के विलुप्त होने की कगार पर पहुंचने की चर्चा करते हैं। पहले की अपेक्षा इस चिड़िया की संख्या में काफी कमी भी आई है। यही जानने के लिए गौरेया की गणना करने की योजना है, जिससे वास्तविक संख्या जानने के बाद संरक्षण के लिए उचित कदम उठाए जा सकेंगे।
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बीते कुछ वर्षों में बढ़ते शहरीकरण के कारण गौरेया चिड़िया की संख्या में तेजी से कमी आई है। हरिद्वार में ही आंगन में दिखने वाली गौरेया भी बिरले ही नजर आती है। जबकि अधिकांश स्थानों से गौरेया विलुप्त ही हो गई है। हरिद्वार में राजाजी टाइगर रिजर्व, गंगा के तटवर्ती इलाके, श्यामपुर और लालढांग क्षेत्र में ही गौरेया देखी जा जाती है, लेकिन यहां भी संख्या में काफी कमी देखी गई है। वन प्रभाग गौरेया की वास्तविक संख्या जानने और लोगों को गौरेया के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए 20 मार्च को गौरेया दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन करेगा। साथ ही गौरेया की गणना करने के लिए योजना तैयार की जा रही है, जिससे गौरया की हरिद्वार में वास्तविक संख्या का पता लग सके और उनके संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जा सकें। साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा। जगह-जगह ट्री-हाउस लगाए जाएंगे।
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डीएफओ आकाश वर्मा ने बताया कि लोग गौरेया के विलुप्त होने की कगार पर पहुंचने की चर्चा करते हैं। पहले की अपेक्षा इस चिड़िया की संख्या में काफी कमी भी आई है। यही जानने के लिए गौरेया की गणना करने की योजना है, जिससे वास्तविक संख्या जानने के बाद संरक्षण के लिए उचित कदम उठाए जा सकेंगे।
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