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दृष्टिकोण के परिवर्तन से विकास संभव : शैफाली पण्ड्या
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शांतिकुंज में सोमवार से पांच दिवसीय नारी चेतना जागरण शिविर शुरू हुआ। शिविर में उप्र के आगरा, अलीगढ़, मैनपुरी, झांसी सहित बीस जिलों की 350 से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
शिविर के उद्घाटन सत्र में गायत्री विद्यापीठ के व्यवस्था मंडल प्रमुख शैफाली पंड्या ने कहा कि समय के साथ चलने के लिए दृष्टिकोण में परिवर्तन जरूरी है। आज सभी क्षेत्रों में साहसी, व्यक्तित्ववान, संकल्पशक्ति से लबरेज लोगों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय मातृशक्ति प्रधान होगा। इसके लिए महिलाओं को शिक्षित, साहसी और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाना होगा। महिलाओं के सहयोग से ही कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, बालश्रम आदि में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए छोटे-छोटे कदम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कहा कि नारी संवेदना की मूर्ति होती है। भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी संवेदना को परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में लगाने के लिए आगे बढ़ने चाहिए। गायत्री परिवार का नारी चेतना जागरण आयोजन इस दिशा में एक सार्थक पहल है। शशिकला साहू ने कहा कि परिवार को सुसंस्कारी बनाने के लिए स्वयं से शुरुआत करनी होगी।
शिविर समन्वयक डा. सुलोचना शर्मा ने बताया कि गायत्री परिवार के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या और शैलदीदी के मार्गदर्शन में नारी चेतना जागरण शिविरों की श्रृंखला के पहले शिविर का शुभांरभ हुआ। इस अवसर पर प्रमिला साहू, कौशल्या, प्रियंका लांजेवार, मंजू, सेवती, नीलम, नीरू आदि उपस्थित रहीं।
हरिद्वार।
शांतिकुंज में सोमवार से पांच दिवसीय नारी चेतना जागरण शिविर शुरू हुआ। शिविर में उप्र के आगरा, अलीगढ़, मैनपुरी, झांसी सहित बीस जिलों की 350 से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
शिविर के उद्घाटन सत्र में गायत्री विद्यापीठ के व्यवस्था मंडल प्रमुख शैफाली पंड्या ने कहा कि समय के साथ चलने के लिए दृष्टिकोण में परिवर्तन जरूरी है। आज सभी क्षेत्रों में साहसी, व्यक्तित्ववान, संकल्पशक्ति से लबरेज लोगों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय मातृशक्ति प्रधान होगा। इसके लिए महिलाओं को शिक्षित, साहसी और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाना होगा। महिलाओं के सहयोग से ही कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, बालश्रम आदि में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए छोटे-छोटे कदम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कहा कि नारी संवेदना की मूर्ति होती है। भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी संवेदना को परिवार, समाज व राष्ट्र के विकास में लगाने के लिए आगे बढ़ने चाहिए। गायत्री परिवार का नारी चेतना जागरण आयोजन इस दिशा में एक सार्थक पहल है। शशिकला साहू ने कहा कि परिवार को सुसंस्कारी बनाने के लिए स्वयं से शुरुआत करनी होगी।
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शिविर समन्वयक डा. सुलोचना शर्मा ने बताया कि गायत्री परिवार के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या और शैलदीदी के मार्गदर्शन में नारी चेतना जागरण शिविरों की श्रृंखला के पहले शिविर का शुभांरभ हुआ। इस अवसर पर प्रमिला साहू, कौशल्या, प्रियंका लांजेवार, मंजू, सेवती, नीलम, नीरू आदि उपस्थित रहीं।
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