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कर्म प्रभाव से मिलता है पुण्य : विद्याभास्कर
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
श्री त्रिदंडिदेव सेवाश्रम के संत सम्मेलन में श्रीमद्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्याभास्कर ने कहा कि मनुष्य को उसके कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ता है। जाने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति गंगा प्रदान करती हैं। लेकिन, तीर्थों में किया गया पाप अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संतजनों के दर्शन गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रतिभाग करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है।
मुख्य अतिथि स्वामी परमानंद ने कहा कि सुप्त अवस्था में हम जो प्रभु की कृपा महसूस करते हैं। इसी कृपा को जागृत अवस्था में भी महसूस कर प्रभु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए। संत सम्मेलन में संतजनों का स्वागत करते हुए त्रिदंडिदेव सेवाश्रम के संचालक स्वामी विष्णु विक्रम ने कहा कि गुरुदेव की कृपा और संतजनों के आशीर्वाद से संस्था निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। गुरुदेव ने जो आशीर्वाद प्रदान किया है। इसी का परिणाम है कि इस संत सम्मेलन में ख्याति प्राप्त संतजनों का दर्शन हो रहा है। संचालन कर रहे पंचदशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव महंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्याभास्कर ने स्वामी विष्णु विक्रम को प्रदान किया। इस दौरान स्वामी जगदीशदास, स्वामी कमलानंद गिरि, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास, महंत विनोद गिरि, युवराज, दिव्यांश महाराज, स्वामी कृपानंद सरस्वती, स्वामी धरनीधराचार्य सहित कई संत मौजूद रहे। प्रमोद अग्रवाल, गुड्डू प्रधान, हरेंद्र सिंह भाटी, अतिन अग्रवाल, राजेश कुमार, शमशेर सिंह, गोपाल, बबलू आदि ने संतों का स्वागत किया।
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श्री त्रिदंडिदेव सेवाश्रम के संत सम्मेलन में श्रीमद्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्याभास्कर ने कहा कि मनुष्य को उसके कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ता है। जाने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति गंगा प्रदान करती हैं। लेकिन, तीर्थों में किया गया पाप अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संतजनों के दर्शन गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रतिभाग करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है।
मुख्य अतिथि स्वामी परमानंद ने कहा कि सुप्त अवस्था में हम जो प्रभु की कृपा महसूस करते हैं। इसी कृपा को जागृत अवस्था में भी महसूस कर प्रभु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए। संत सम्मेलन में संतजनों का स्वागत करते हुए त्रिदंडिदेव सेवाश्रम के संचालक स्वामी विष्णु विक्रम ने कहा कि गुरुदेव की कृपा और संतजनों के आशीर्वाद से संस्था निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। गुरुदेव ने जो आशीर्वाद प्रदान किया है। इसी का परिणाम है कि इस संत सम्मेलन में ख्याति प्राप्त संतजनों का दर्शन हो रहा है। संचालन कर रहे पंचदशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव महंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्याभास्कर ने स्वामी विष्णु विक्रम को प्रदान किया। इस दौरान स्वामी जगदीशदास, स्वामी कमलानंद गिरि, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास, महंत विनोद गिरि, युवराज, दिव्यांश महाराज, स्वामी कृपानंद सरस्वती, स्वामी धरनीधराचार्य सहित कई संत मौजूद रहे। प्रमोद अग्रवाल, गुड्डू प्रधान, हरेंद्र सिंह भाटी, अतिन अग्रवाल, राजेश कुमार, शमशेर सिंह, गोपाल, बबलू आदि ने संतों का स्वागत किया।
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