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ज्येष्ठ पूर्णिमा: श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई पुण्य की डुबकी
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नियत स्थानों पर पहुंचकर यथोचित दान पुण्य भी किया। इसी के साथ ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पंचस्नानी और ज्येष्ठ मास संपन्न हो गए हैं।
गंगा दशहरे से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पांच दिनों का गंगा स्नान होता है। स्नान करने के लिए देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। स्नान करने वालों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अधिक लोग थे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने आषाढ़ मास आगमन की कथा भी सुनी। ज्येष्ठ मास का संयोग यह रहा कि महीने का समापन भी ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ। ऐसा होना स्नान को और पवित्र बना देता है। एक और संयोग ज्येष्ठ मास के साथ जुड़ गया। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी सोमवार को थी और पूर्णिमा भी सोमवार को पड़ी। ऐसा ही संयोग आषाढ़ मास में भी होगा। आषाढ़ मास का आरंभ मंगलवार को रहा और अमावस्या व पूर्णिमा भी मंगलवार को ही पड़ेगी। 16 जुलाई को चंद्र ग्रहण के साथ आषाढ़ मास का समापन हो जाएगा। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा 17 जुलाई को शुरू होगी और 31 जुलाई तक होगी।
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान तड़के चार बजे से शुरू हो गया था। सूर्योदय के साथ-साथ स्नानार्थियों की भीड़ बढ़ती गई। सोमवार को हजारों श्रद्धालु चारधाम जाने के लिए पहुंचे। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में चल रही दर्जनों भागवत कथाओं का सोमवार को समापन हो गया। इसके बाद महाभोज भी कराए गए।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नियत स्थानों पर पहुंचकर यथोचित दान पुण्य भी किया। इसी के साथ ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पंचस्नानी और ज्येष्ठ मास संपन्न हो गए हैं।
गंगा दशहरे से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पांच दिनों का गंगा स्नान होता है। स्नान करने के लिए देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। स्नान करने वालों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अधिक लोग थे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने आषाढ़ मास आगमन की कथा भी सुनी। ज्येष्ठ मास का संयोग यह रहा कि महीने का समापन भी ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ। ऐसा होना स्नान को और पवित्र बना देता है। एक और संयोग ज्येष्ठ मास के साथ जुड़ गया। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी सोमवार को थी और पूर्णिमा भी सोमवार को पड़ी। ऐसा ही संयोग आषाढ़ मास में भी होगा। आषाढ़ मास का आरंभ मंगलवार को रहा और अमावस्या व पूर्णिमा भी मंगलवार को ही पड़ेगी। 16 जुलाई को चंद्र ग्रहण के साथ आषाढ़ मास का समापन हो जाएगा। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा 17 जुलाई को शुरू होगी और 31 जुलाई तक होगी।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान तड़के चार बजे से शुरू हो गया था। सूर्योदय के साथ-साथ स्नानार्थियों की भीड़ बढ़ती गई। सोमवार को हजारों श्रद्धालु चारधाम जाने के लिए पहुंचे। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में चल रही दर्जनों भागवत कथाओं का सोमवार को समापन हो गया। इसके बाद महाभोज भी कराए गए।
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