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वर्तमान के लिए मार्गदर्शक का रूप स्थापित करती है कथा
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गुरुकुल कांगड़ी विवि
- फोटो : अमर उजाला
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि पृथ्वी पर सबसे पहले जलीय मछली और उभयचर जीव आए। इसके बाद सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी वर्ग के रूप में मनुष्य का पदार्पण हुआ।
विवि के अंग्रेजी विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की ओर से ‘इंटरडिसिप्लनरी नेशनल सेमिनार नैरेटिव (कथा) इन लिटरेचर’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रो. भट्ट ने कहा कि कथा हमें वर्तमान के लिए एक मार्गदर्शक का रूप स्थापित करती है। मुख्य वक्ता प्रो. विष्णु दत्त राकेश ने कहा कि कलात्मक और भावनात्मक आख्यानों से कथा को एक आयाम मिला है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एएन द्विवेदी ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को पूरे विश्व में काव्य सौंदर्य के नाम से जाना जाता है। आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि कथा दो तरह से जीवन में उतरती है, एक भावनात्मक और दूसरी रचनात्मक। भावनाएं दुख-सुख से जुड़ी होती है। दुखों से कथाओं का सृजन होता है, जिसे सुनकर हमारे अंदर एक नया व्यक्तित्व और नया कृतित्व जन्म लेता है। सेमिनार के आयोजक प्रो. एमआर वर्मा ने कहा कि यह सेमिनार उन छात्रों को नया आयाम प्रदान करेगी जो कला और काव्य शास्त्र पर शोध कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रो. अम्बुज कुमार, प्रो. हेमलता, डॉ. मजुषा कौशिक, डॉ. मुदिता अग्निहोत्री, डॉ. करुणा शर्मा, डॉ. रजनी सिंघल, डॉ. किरन, डॉ. अपर्णा वर्मा, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. निविन्धिया, डॉ. अंकित त्रिवेदी, राजीव कुमार, रश्मि, अरविन्द, पंकज, प्रज्ञा, वंदना आदि रहीं।
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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि पृथ्वी पर सबसे पहले जलीय मछली और उभयचर जीव आए। इसके बाद सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी वर्ग के रूप में मनुष्य का पदार्पण हुआ।
विवि के अंग्रेजी विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की ओर से ‘इंटरडिसिप्लनरी नेशनल सेमिनार नैरेटिव (कथा) इन लिटरेचर’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रो. भट्ट ने कहा कि कथा हमें वर्तमान के लिए एक मार्गदर्शक का रूप स्थापित करती है। मुख्य वक्ता प्रो. विष्णु दत्त राकेश ने कहा कि कलात्मक और भावनात्मक आख्यानों से कथा को एक आयाम मिला है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एएन द्विवेदी ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को पूरे विश्व में काव्य सौंदर्य के नाम से जाना जाता है। आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि कथा दो तरह से जीवन में उतरती है, एक भावनात्मक और दूसरी रचनात्मक। भावनाएं दुख-सुख से जुड़ी होती है। दुखों से कथाओं का सृजन होता है, जिसे सुनकर हमारे अंदर एक नया व्यक्तित्व और नया कृतित्व जन्म लेता है। सेमिनार के आयोजक प्रो. एमआर वर्मा ने कहा कि यह सेमिनार उन छात्रों को नया आयाम प्रदान करेगी जो कला और काव्य शास्त्र पर शोध कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रो. अम्बुज कुमार, प्रो. हेमलता, डॉ. मजुषा कौशिक, डॉ. मुदिता अग्निहोत्री, डॉ. करुणा शर्मा, डॉ. रजनी सिंघल, डॉ. किरन, डॉ. अपर्णा वर्मा, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. निविन्धिया, डॉ. अंकित त्रिवेदी, राजीव कुमार, रश्मि, अरविन्द, पंकज, प्रज्ञा, वंदना आदि रहीं।
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