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अर्द्धकुंभ के बाद अयोध्या जाएगी अखाड़ा परिषद्
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
अखाड़ा परिषद ने विगत 31 जनवरी को प्रयाग में हुई संतों की धर्म संसद का बहिष्कार किया था। 29-30 जनवरी को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुए संत समागम में भी अखाड़ा परिषद नहीं पहुंची थी। अब प्रयाग अर्द्धकुंभ बीत जाने के बाद अखाड़ा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल मंदिर निर्माण की संभावनाएं तलाशने के लिए अयोध्या जाएगा।
कुछ दिन पूर्व अपने समर्थकों के साथ अचानक अयोध्या जा चुके अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि ने बताया कि मंदिर का निर्माण न तो सरकार कर सकती है और न ही कोई सामाजिक संगठन। मंदिर का निर्माण विशुद्ध रूप से संतों द्वारा किया जाएगा। पिछले दिनों प्रयाग में हुई दोनों ही धर्म संसदों में राजनीति हो रही थी। इस प्रश्न पर सरकार भी राजनीति करती आ रही है। इसी कारण अखाड़ा परिषद ने दोनों धर्मसभाओं का बहिष्कार कर दिया था। न्यायालय मंदिर निर्माण को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। ऐसे में संतों को ही राम मंदिर का निर्माण करना पड़ेगा। देश में संतों की सबसे बड़ी संस्था अखाड़ा परिषद है। मंदिर का निर्माण करने के लिए अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी महाशिवरात्रि का स्नान समाप्त होने के बाद अयोध्या जाकर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगी। हरि गिरि ने न्यायालय द्वारा राम मंदिर की सुनवाई लगातार टाले जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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अखाड़ा परिषद ने विगत 31 जनवरी को प्रयाग में हुई संतों की धर्म संसद का बहिष्कार किया था। 29-30 जनवरी को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुए संत समागम में भी अखाड़ा परिषद नहीं पहुंची थी। अब प्रयाग अर्द्धकुंभ बीत जाने के बाद अखाड़ा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल मंदिर निर्माण की संभावनाएं तलाशने के लिए अयोध्या जाएगा।
कुछ दिन पूर्व अपने समर्थकों के साथ अचानक अयोध्या जा चुके अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि ने बताया कि मंदिर का निर्माण न तो सरकार कर सकती है और न ही कोई सामाजिक संगठन। मंदिर का निर्माण विशुद्ध रूप से संतों द्वारा किया जाएगा। पिछले दिनों प्रयाग में हुई दोनों ही धर्म संसदों में राजनीति हो रही थी। इस प्रश्न पर सरकार भी राजनीति करती आ रही है। इसी कारण अखाड़ा परिषद ने दोनों धर्मसभाओं का बहिष्कार कर दिया था। न्यायालय मंदिर निर्माण को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। ऐसे में संतों को ही राम मंदिर का निर्माण करना पड़ेगा। देश में संतों की सबसे बड़ी संस्था अखाड़ा परिषद है। मंदिर का निर्माण करने के लिए अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी महाशिवरात्रि का स्नान समाप्त होने के बाद अयोध्या जाकर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगी। हरि गिरि ने न्यायालय द्वारा राम मंदिर की सुनवाई लगातार टाले जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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