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आपदा प्रबंधन विभाग में लगेगा भौगोलिक सूचना तंत्र
Updated Sat, 25 Aug 2018 11:12 PM IST
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हिमांशु भट्ट
हरिद्वार। जिला आबदा प्रबंधन विभाग में जल्द भौगोलिक सूचना प्रणाली व तंत्र (जीआईएस) लगाया जाएगा। इससे जनपद की भौगोलिक सूचना को एकत्रित कर उनके आंकड़ों के विश्लेषण, संरक्षण और प्रबंधन आदि की व्यवस्था सरलता से की जा सकेगी। जीआईएस के लिए दो विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। जीआईएस से आपदा के दौरान राहत कार्यों में तीव्रता आएगी।
भौगोलिक सूचना प्रणाली के तहत विभाग की ओर से रिसोर्स मैपिंग कर मानचित्र तैयार किया जाएगा। इसमें जनपद के लालढांग़, लक्सर, हरिद्वार, रुड़की, भगवानपुर, मंगलौर, बहादराबाद आदि क्षेत्रों की सतह संबंधी जानकारी विस्तार से होगी। मानचित्र में यह भी दर्शाया जाएगा कि किसी क्षेत्र में आपदा से निपटने के लिए क्या और कितने संसाधन उपलब्ध है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग को अपने कार्यालय में ही पता लगा सकेगा कि प्रभावित क्षेत्र में कितने अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है और किस क्षेत्र में कितने संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे कार्य में तीव्रता आएगी और विभागों के बीच समन्वय साधने में आसानी होगी।
डेटाबेस संसाधन प्रबंधन में होती है समस्या
अब तक आपदा के दौरान कई बार यह नहीं पता चल पाता कि किस क्षेत्र में आपदा की दृष्टि से सहायता करने में कितने संसाधन उपलब्ध है। साथ ही किसी क्षेत्र से प्रभावित क्षेत्र में कितने संसाधन पहुंचाने चाहिए। अब जीआईएस से इस समस्या का समाधान किया जा सकेगा।
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विभाग में बनेगा अलग हॉल
जीआईएस लगाने के लिए जिला आबदा प्रबंधन विभाग में एक हॉल की जरूरत पड़ेगी। जिसमें विशाल प्लॉटर लगाया जाएगा। जिसमें मानचित्र के माध्यम से जनपद हरिद्वार के पूरे भौगोलिक क्षेत्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे क्षेत्र को समझने में भी आसानी होगी।
शासन के आदेश पर जीआईएस प्रणाली लगाई जाएगी। इसके लिए विभाग में प्लॉटर लगाया जाएगा। साथ ही दो विशेषज्ञों को नियुक्त करने की प्रक्रिया गतिमान है। जीआईएस से रिसोर्स मैपिंग कर संसाधनों का प्रबंधन करने में आसानी होगी।
-मीरा कैंतुरा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी
हरिद्वार। जिला आबदा प्रबंधन विभाग में जल्द भौगोलिक सूचना प्रणाली व तंत्र (जीआईएस) लगाया जाएगा। इससे जनपद की भौगोलिक सूचना को एकत्रित कर उनके आंकड़ों के विश्लेषण, संरक्षण और प्रबंधन आदि की व्यवस्था सरलता से की जा सकेगी। जीआईएस के लिए दो विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। जीआईएस से आपदा के दौरान राहत कार्यों में तीव्रता आएगी।
भौगोलिक सूचना प्रणाली के तहत विभाग की ओर से रिसोर्स मैपिंग कर मानचित्र तैयार किया जाएगा। इसमें जनपद के लालढांग़, लक्सर, हरिद्वार, रुड़की, भगवानपुर, मंगलौर, बहादराबाद आदि क्षेत्रों की सतह संबंधी जानकारी विस्तार से होगी। मानचित्र में यह भी दर्शाया जाएगा कि किसी क्षेत्र में आपदा से निपटने के लिए क्या और कितने संसाधन उपलब्ध है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग को अपने कार्यालय में ही पता लगा सकेगा कि प्रभावित क्षेत्र में कितने अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है और किस क्षेत्र में कितने संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे कार्य में तीव्रता आएगी और विभागों के बीच समन्वय साधने में आसानी होगी।
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डेटाबेस संसाधन प्रबंधन में होती है समस्या
अब तक आपदा के दौरान कई बार यह नहीं पता चल पाता कि किस क्षेत्र में आपदा की दृष्टि से सहायता करने में कितने संसाधन उपलब्ध है। साथ ही किसी क्षेत्र से प्रभावित क्षेत्र में कितने संसाधन पहुंचाने चाहिए। अब जीआईएस से इस समस्या का समाधान किया जा सकेगा।
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विभाग में बनेगा अलग हॉल
जीआईएस लगाने के लिए जिला आबदा प्रबंधन विभाग में एक हॉल की जरूरत पड़ेगी। जिसमें विशाल प्लॉटर लगाया जाएगा। जिसमें मानचित्र के माध्यम से जनपद हरिद्वार के पूरे भौगोलिक क्षेत्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे क्षेत्र को समझने में भी आसानी होगी।
शासन के आदेश पर जीआईएस प्रणाली लगाई जाएगी। इसके लिए विभाग में प्लॉटर लगाया जाएगा। साथ ही दो विशेषज्ञों को नियुक्त करने की प्रक्रिया गतिमान है। जीआईएस से रिसोर्स मैपिंग कर संसाधनों का प्रबंधन करने में आसानी होगी।
-मीरा कैंतुरा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी