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श्रीराम के स्मरण मात्र से दूर होते हैं जीनव के सभी कष्ट -स्वामी प्रपन्नाचार्य
Updated Tue, 13 Mar 2018 10:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सिद्धपीठ बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में आयेाजित श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जग के पालनहार है। कहा जो भक्त श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक उनकी कथा का श्रवण करता है उसका जीवन भव सागर से पार हो जाता है। भगवान राम के मात्र स्मरण करने से ही व्यक्ति की सभी व्याधियां दूर हो जाती है। भगवान राम भक्तों की सूक्ष्म आराधना से प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित फल प्रदान करते है।
कथा व्यास ने कहा कि राम कथा के श्रवण से व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। वह सत्य के मार्ग पर चलकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
कहा कि कथा सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है और जब श्रद्धालु श्रद्धाभाव से राम कथा का श्रवण कर लेता है तब उसके अंत:करण की शुद्धि हो जाती है। राम कथा का सार तभी सार्थक है जब व्यक्ति इसमें निहित ज्ञान को अपने जीवन में अपनाए ा
राम कथा के आयोजक पं. अधीर कौशिक ने श्रद्धालु भक्तों एवं युवाओं से आह्वान किया कि पाश्चात्य संस्कृति का परित्याग करें। भागवताचार्य सुनील पंडित ने कहा कि भगवान श्रीराम हमारे आदर्श हैं। उनके नाम लेने से ही जीवन आत्मसात हो जाता है। हमें सदैव ही लोगों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए । इस मौके पर समाजसेवी डा. विशाल गर्ग, विष्णु, प्रकाश चौहान, लोकेश, सत्यम, जेपी बडोनी, राधे, सोनू आदि उपस्थित रहे।
हरिद्वार।
सिद्धपीठ बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में आयेाजित श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जग के पालनहार है। कहा जो भक्त श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक उनकी कथा का श्रवण करता है उसका जीवन भव सागर से पार हो जाता है। भगवान राम के मात्र स्मरण करने से ही व्यक्ति की सभी व्याधियां दूर हो जाती है। भगवान राम भक्तों की सूक्ष्म आराधना से प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित फल प्रदान करते है।
कथा व्यास ने कहा कि राम कथा के श्रवण से व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। वह सत्य के मार्ग पर चलकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
कहा कि कथा सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है और जब श्रद्धालु श्रद्धाभाव से राम कथा का श्रवण कर लेता है तब उसके अंत:करण की शुद्धि हो जाती है। राम कथा का सार तभी सार्थक है जब व्यक्ति इसमें निहित ज्ञान को अपने जीवन में अपनाए ा
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राम कथा के आयोजक पं. अधीर कौशिक ने श्रद्धालु भक्तों एवं युवाओं से आह्वान किया कि पाश्चात्य संस्कृति का परित्याग करें। भागवताचार्य सुनील पंडित ने कहा कि भगवान श्रीराम हमारे आदर्श हैं। उनके नाम लेने से ही जीवन आत्मसात हो जाता है। हमें सदैव ही लोगों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए । इस मौके पर समाजसेवी डा. विशाल गर्ग, विष्णु, प्रकाश चौहान, लोकेश, सत्यम, जेपी बडोनी, राधे, सोनू आदि उपस्थित रहे।
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