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वैशाख अमावस्या का स्नान आज
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार।
शनिवार को शनैश्चरी बैसाख अमावस्या का महापर्व पड़ रहा है। इसी दिन से शुक्ल पक्ष में होने वाली धार्मिक कथाएं और प्रवचन प्रारंभ हो जाएंगे। उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन पूर्ण विधि-विधान से शुरू होगी।
अमावस्या स्नान करने के लिए देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु गंगा तट पहुंच रहे हैं। शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ गया है। शास्त्रों के अनुसार शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त जो भी श्राद्ध तर्पण किया जाता है, वह सीधे पितरों को प्राप्त होता है। इस दिन कुशावर्त के साथ-साथ नरायणी शिला पर भी पितृ कर्म करने के लिए देश के कईं भागों के श्रद्धालु आएंगे। शुक्रवार को हरिद्वार में खासी भीड़ नजर आएगी। चूंकि शनिवार और रविवार को पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाती है, अत: खासी भीड़ नगर में बनी रहेगी। अमावस्या का यह स्नान पवित्र अश्विनी नक्षत्र में पड़ रहा है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन इस नक्षत्र को भी दुर्लभ माना जाता है। श्रद्धालु हर की पैडी के साथ-साथ गंगा के अन्य घाटों पर भी स्नान करेंगे। अनेक श्रद्धालु शुक्ल पक्ष का स्नान धर्मनगरी में करने के लिए 15 दिनों तक यही निवास करेंगे। वैशाख के पवित्र महीने में धार्मिक कथाओं का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार इस महीने किया हुआ कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता। भारतीय धर्म संहिता में वैशाख, आषाढ़, श्रावण और कार्तिक को धार्मिक प्रवचनों के लिए विशेष माना गया है। ज्येष्ठ के महीने में भी धार्मिक कथाएं आयोजित की जाती है। इन 15 दिनों में उत्तरी हरिद्वार के संत बाहुल्य क्षेत्र तथा कनखल के अखाड़ा आश्रम क्षेत्रों में अनेक आयोजन किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में भाग लेने के लिए पूरे 15 दिन कार्यक्रमों के अनुसार श्रद्धालु पहुंचते रहेंगे। इस पक्ष का समापन बौद्ध पूर्णिमा से होगा। उस दिन फिर लाखों श्रद्धालुओं का स्नान होने वाला है।
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शनिवार को शनैश्चरी बैसाख अमावस्या का महापर्व पड़ रहा है। इसी दिन से शुक्ल पक्ष में होने वाली धार्मिक कथाएं और प्रवचन प्रारंभ हो जाएंगे। उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन पूर्ण विधि-विधान से शुरू होगी।
अमावस्या स्नान करने के लिए देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु गंगा तट पहुंच रहे हैं। शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ गया है। शास्त्रों के अनुसार शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त जो भी श्राद्ध तर्पण किया जाता है, वह सीधे पितरों को प्राप्त होता है। इस दिन कुशावर्त के साथ-साथ नरायणी शिला पर भी पितृ कर्म करने के लिए देश के कईं भागों के श्रद्धालु आएंगे। शुक्रवार को हरिद्वार में खासी भीड़ नजर आएगी। चूंकि शनिवार और रविवार को पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाती है, अत: खासी भीड़ नगर में बनी रहेगी। अमावस्या का यह स्नान पवित्र अश्विनी नक्षत्र में पड़ रहा है। शनैश्चरी अमावस्या के दिन इस नक्षत्र को भी दुर्लभ माना जाता है। श्रद्धालु हर की पैडी के साथ-साथ गंगा के अन्य घाटों पर भी स्नान करेंगे। अनेक श्रद्धालु शुक्ल पक्ष का स्नान धर्मनगरी में करने के लिए 15 दिनों तक यही निवास करेंगे। वैशाख के पवित्र महीने में धार्मिक कथाओं का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार इस महीने किया हुआ कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता। भारतीय धर्म संहिता में वैशाख, आषाढ़, श्रावण और कार्तिक को धार्मिक प्रवचनों के लिए विशेष माना गया है। ज्येष्ठ के महीने में भी धार्मिक कथाएं आयोजित की जाती है। इन 15 दिनों में उत्तरी हरिद्वार के संत बाहुल्य क्षेत्र तथा कनखल के अखाड़ा आश्रम क्षेत्रों में अनेक आयोजन किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में भाग लेने के लिए पूरे 15 दिन कार्यक्रमों के अनुसार श्रद्धालु पहुंचते रहेंगे। इस पक्ष का समापन बौद्ध पूर्णिमा से होगा। उस दिन फिर लाखों श्रद्धालुओं का स्नान होने वाला है।
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