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पहले भी अखाड़ा परिषद के निशाने पर रहे अच्युतानंद
Updated Sat, 19 May 2018 12:09 AM IST
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पहले भी अखाड़ा परिषद के निशाने पर रहे अच्युतानंद
- पिछले साल भी थे निशाने पर लेकिन परिषद ने पीछे खींच लिए थे कदम
- अक्सर परिषद के पदाधिकारियों को लेकर करते है टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शुक्रवार को इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में बहिष्कृत कर दिए गए भूमापीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज इससे पहले भी अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के निशाने पर रहे हैं। उनकी अखाड़ा परिषद के शीर्ष पदों पर बैठे संतों से तनातनी अक्सर सामने आती रहती हैं।
पिछले सप्ताह ही जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि और निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्रपुरी के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था तब भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद ने नरेंद्र गिरि पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि नरेंद्र गिरि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष तो क्या संन्यासी बनने के लायक भी नहीं हैं क्योंकि उनके खिलाफ विभिन्न कोर्ट में अलग अलग तरह के मुकदमे चल रहे हैं। उन्होंने कई अन्य आरोप भी नरेंद्र गिरि पर लगाए थे।
गौरतलब है कि पिछले साल जब अखाड़ा परिषद की ओर से फर्जी संतों की सूची जारी की गई थी उस समय भी यह चर्चा थी कि भूमापीठाधीश्वर अच्युतानंद तीर्थ महाराज को भी परिषद द्वारा फर्जी संतों की सूची में शुमार किया गया है। इस आशय की सूची कई समाचार पत्रों में छप भी गई थी लेकिन जब सूची जारी की गई थी तब उनका नाम शामिल नहीं था। उस समय यह बात सामने आई थी कि परिषद के पदाधिकारियों ने सूची जारी होने के अंतिम समय पर अच्युतानंद तीर्थ को लेकर की जाने वाली कार्रवाई से हाथ पीछे खींच लिए थे। वहीं जब एक वर्ष पूर्व अच्युतानंद तीर्थ द्वारा अपने आप को शारदा पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिषिक्त कराया गया था तब भी परिषद और अन्य संगठनेां से जुड़े संतों के वे निशाने पर रहे थे। संतों ने उन्हें कई बार पद छोड़ने की सलाह दी थी।
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दोनों पक्षों की ओर से इस बात को लेकर टीका टिप्पणी भी की गई थी। कुछ संतों ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को फर्जी शंकराचार्य भी प्रचारित किया था हालांकि पिछले माह अच्युतानंद तीर्थ ने यह पद खुद ही त्याग दिया। आज अखाड़ा परिषद द्वारा उनके खिलाफ की गई बहिष्कार करने की कार्रवाई को हाल ही में उनके द्वारा दिए गए बयान के आधार पर की जाने वाली मानी जा रही है। वहीं भूमापीठाधीश्वर ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि परिषद की ओर से क्या कार्रवाई की गई उन्हें अभी अधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी नहीं है। विधिवत जानकारी मिलने पर वे अपनी प्रतिक्रिया देंगे लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि परिषद के पदाधिकारियों को किसी संत का बहिष्कार करने का अधिकार नहीं है। वैसे भी वे तो दंडी स्वामी परंपरा के संत है जिसका परिषद एवं अखाड़ों से कोई सरोकार नहीं है। भूमा पीठाधीश्वर का बहिष्कार करने से एक बार फिर संतों की राजनीति गरमाने के आसार हैं।
- पिछले साल भी थे निशाने पर लेकिन परिषद ने पीछे खींच लिए थे कदम
- अक्सर परिषद के पदाधिकारियों को लेकर करते है टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शुक्रवार को इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में बहिष्कृत कर दिए गए भूमापीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज इससे पहले भी अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों के निशाने पर रहे हैं। उनकी अखाड़ा परिषद के शीर्ष पदों पर बैठे संतों से तनातनी अक्सर सामने आती रहती हैं।
पिछले सप्ताह ही जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि और निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्रपुरी के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था तब भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद ने नरेंद्र गिरि पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि नरेंद्र गिरि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष तो क्या संन्यासी बनने के लायक भी नहीं हैं क्योंकि उनके खिलाफ विभिन्न कोर्ट में अलग अलग तरह के मुकदमे चल रहे हैं। उन्होंने कई अन्य आरोप भी नरेंद्र गिरि पर लगाए थे।
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गौरतलब है कि पिछले साल जब अखाड़ा परिषद की ओर से फर्जी संतों की सूची जारी की गई थी उस समय भी यह चर्चा थी कि भूमापीठाधीश्वर अच्युतानंद तीर्थ महाराज को भी परिषद द्वारा फर्जी संतों की सूची में शुमार किया गया है। इस आशय की सूची कई समाचार पत्रों में छप भी गई थी लेकिन जब सूची जारी की गई थी तब उनका नाम शामिल नहीं था। उस समय यह बात सामने आई थी कि परिषद के पदाधिकारियों ने सूची जारी होने के अंतिम समय पर अच्युतानंद तीर्थ को लेकर की जाने वाली कार्रवाई से हाथ पीछे खींच लिए थे। वहीं जब एक वर्ष पूर्व अच्युतानंद तीर्थ द्वारा अपने आप को शारदा पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिषिक्त कराया गया था तब भी परिषद और अन्य संगठनेां से जुड़े संतों के वे निशाने पर रहे थे। संतों ने उन्हें कई बार पद छोड़ने की सलाह दी थी।
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दोनों पक्षों की ओर से इस बात को लेकर टीका टिप्पणी भी की गई थी। कुछ संतों ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को फर्जी शंकराचार्य भी प्रचारित किया था हालांकि पिछले माह अच्युतानंद तीर्थ ने यह पद खुद ही त्याग दिया। आज अखाड़ा परिषद द्वारा उनके खिलाफ की गई बहिष्कार करने की कार्रवाई को हाल ही में उनके द्वारा दिए गए बयान के आधार पर की जाने वाली मानी जा रही है। वहीं भूमापीठाधीश्वर ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि परिषद की ओर से क्या कार्रवाई की गई उन्हें अभी अधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी नहीं है। विधिवत जानकारी मिलने पर वे अपनी प्रतिक्रिया देंगे लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि परिषद के पदाधिकारियों को किसी संत का बहिष्कार करने का अधिकार नहीं है। वैसे भी वे तो दंडी स्वामी परंपरा के संत है जिसका परिषद एवं अखाड़ों से कोई सरोकार नहीं है। भूमा पीठाधीश्वर का बहिष्कार करने से एक बार फिर संतों की राजनीति गरमाने के आसार हैं।