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बस अड्डा स्थानांतरण के विरोध में उतरी गंगा सभा
Updated Tue, 13 Mar 2018 10:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार ।
सरकार की ओर से वर्तमान बस अड्डे को शहर से कई किलोमीटर दूर सराय ले जाने का अब गंगा सभा ने भी विरोध किया है। हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाने का विरोध जताते हुए इसे वर्तमान स्थान पर ही रखने की मांग उठाई है।
जिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी व महामंत्री रामकुमार मिश्रा का कहना है कि धर्मनगरी में प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री व श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा पाठ, अस्थि विसर्जन, श्राद्ध तर्पण व अन्य धार्मिक कर्मकांडों के लिए बसों से हरिद्वार आते हैं। ऐसे में बस अड्डे को शहर से दस किलोमीटर दूर सराय में शिफ्ट करने का निर्णय सही नहीं है। सरकार का यह निर्णय तीर्थयात्रियों व शहरियों के लिए मुसीबत भरा होगा। उनका कहना है कि हरिद्वार प्राचीनकाल से ही मद्य निषेध क्षेत्र घोषित है। जिस क्षेत्र में बस अड्डे को स्थानांतरित किया जा रहा है, उस क्षेत्र में शराब व मांस का प्रयोग बहुतायत में होता है। ऐसे स्थान पर बस अड्डा शिफ्ट होने से तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात होगा। वहीं रात्रि के समय आने वाले तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों की सुरक्षा दृष्टि से भी यह उचित नहीं होगा। रेलवे स्टेशन के निकट होने के कारण ही वर्तमान स्थान पर बस अड्डा स्थापित किया गया था। बसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यदि बस अड्डा का विस्तारीकरण किया जाना है तो निकट ही स्थित जल निगम के गोदाम की भूमि पर बस अड्डे का विस्तार किया जा सकता है, और जल निगम के गोदाम को किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाए। दोनों पदाधिकारियों ने सीएम ने मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर नए सिरे से विचार विमर्श करे।
हरिद्वार ।
सरकार की ओर से वर्तमान बस अड्डे को शहर से कई किलोमीटर दूर सराय ले जाने का अब गंगा सभा ने भी विरोध किया है। हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाने का विरोध जताते हुए इसे वर्तमान स्थान पर ही रखने की मांग उठाई है।
जिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी व महामंत्री रामकुमार मिश्रा का कहना है कि धर्मनगरी में प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री व श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा पाठ, अस्थि विसर्जन, श्राद्ध तर्पण व अन्य धार्मिक कर्मकांडों के लिए बसों से हरिद्वार आते हैं। ऐसे में बस अड्डे को शहर से दस किलोमीटर दूर सराय में शिफ्ट करने का निर्णय सही नहीं है। सरकार का यह निर्णय तीर्थयात्रियों व शहरियों के लिए मुसीबत भरा होगा। उनका कहना है कि हरिद्वार प्राचीनकाल से ही मद्य निषेध क्षेत्र घोषित है। जिस क्षेत्र में बस अड्डे को स्थानांतरित किया जा रहा है, उस क्षेत्र में शराब व मांस का प्रयोग बहुतायत में होता है। ऐसे स्थान पर बस अड्डा शिफ्ट होने से तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात होगा। वहीं रात्रि के समय आने वाले तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों की सुरक्षा दृष्टि से भी यह उचित नहीं होगा। रेलवे स्टेशन के निकट होने के कारण ही वर्तमान स्थान पर बस अड्डा स्थापित किया गया था। बसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यदि बस अड्डा का विस्तारीकरण किया जाना है तो निकट ही स्थित जल निगम के गोदाम की भूमि पर बस अड्डे का विस्तार किया जा सकता है, और जल निगम के गोदाम को किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाए। दोनों पदाधिकारियों ने सीएम ने मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर नए सिरे से विचार विमर्श करे।
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