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तो इस किले में मिल सकता है 'सपनों का खजाना'
कौशल सिखौला/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 20 Oct 2013 06:47 PM IST
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भारतीय विद्वानों का मानना है कि योगियों के सपने सच होते हैं। इस प्रकार संत शोभन दास के सपने पर चल रही खुदाई सच साबित हो सकती है।
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कई लोग ऐसे हैं जो सपने के सच होने की बात को सिरे से नकारते हैं, लेकिन भारतीय और पश्चिमी विद्वानों ने स्वप्न को बड़ा महत्व दिया है। वेदों में स्वप्न विज्ञान के सूत्र छिपे हैं।
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वेदों के प्रकांड विद्वान वेदमार्तंड पंडित भगवद् दत्त वेदालंकार की विख्यात पुस्तक वैदिक स्वप्न विज्ञान का गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के वेद अनुसंधान विभाग ने पुनर्मुद्रण किया है। वेदमार्तंड के अनुसार अथर्ववेद का सोलहवां मंडल स्वप्न सूत्रों से भरा पड़ा है।
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इसी भांति यजुर्वेद, उपनिषद्, सूत्र ग्रंथ, वैद्यक ग्रंथ आदि में स्वप्न विज्ञान का विशद् दर्शन होता है। विख्यात पश्चिमी चिंतक फ्रायड ने भी स्वप्नों पर बहुत काम किया है। उन्होंने सपनों की दुनियां को सच माना है।
...तब सत्य स्वप्न आते हैं
पंडित भगवद्दत्त वेदालंकार मानते हैं कि स्वप्न मानसिक स्तर से आते हैं। मनुष्य की जाग्रत, स्वप्निल एवं सुषुप्त तीन अवस्थाएं हैं। एक चौथी अवस्था तूरीय अवस्था भी है जो बिरलों को प्राप्त होती है। इसी अवस्था में आए स्वप्न सच होते हैं। स्वप्न का अर्थ बुद्धि और इंद्रियों से है।
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मन की अंतर्लीला जब चरम पर पहुंच जाती है तो सत्य स्वप्न आते हैं। वेदों में सपनों की समूची दुनिया समाई हुई है। मन की सीमा को ही वेदों ने स्वप्न सीमा माना है। सोता हुआ मानव स्वप्न की दुनिया में विचारण करता हुआ, अनंत ब्रह्मांड तक जा सकता है।
सीमा रेखा कोई नहीं
तीन अवस्थाओं में से एक अवस्था स्वप्न की है। जागृत स्वप्न में पहुंचा जाए तो सत्य का दर्शन हो जाता है। वेद की दृष्टि में जब मन का भीतर से विच्छेद हो जाए, तो स्वप्नावस्था आती है। स्वप्न में सत्य का उद्बोध होता है। 24 घंटे में 50 से लेकर 70 हजार तक विचार मनुष्य के मन में आते हैं। स्वप्न इनमें से किसी एक को सच्चा साबित कर सकते हैं।
- प्रो. ज्ञान प्रकाश शास्त्री, प्रभारी श्रद्धानंद वैदिक शोध संस्थान
योगी देखते हैं सच्चे स्वप्न
जिसके स्वप्न सच्चे होते हैं, वह योगी है। संयत विचारों से मन की राह सच्चे सपनों की ओर मुड़ती है। असंयत व्यक्ति खंडित और झूठे सपने देखता है। वास्तव में स्वप्न अस्थिरता को भी स्थिरता में बदल सकते हैं।
- डा. वासुदेव शरण अग्रवाल, अध्यक्ष-एशियन एटीक्विटी म्यूजियम, नई दिल्ली
मन है शक्तियों का अक्षय भंडार
जिस प्रकार उत्तम सारथी लगाम कसकर घोड़ों को नियंत्रित करता है उसी प्रकार यह मन मनुष्यों को अपने नियंत्रण में लेते हुए सपनों के माध्यम से जिधर चाहे, उधर ले जाता है। मन शक्तियों का अक्षय भंडार है। मन की पहुंच असीमित है जिसका शब्दों में चित्रण नहीं किया जा सकता। अध्यात्म की दृष्टि और वेदों की दृष्टि से कई स्वप्न सत्य होते हैं।
- वेद मार्तंड भगवद् दत्त वेदालंकार
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