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पता पूछकर लगा रहे जख्मों पर मरहम
डॉ. योगेश योगी
Updated Fri, 28 Jun 2013 10:42 AM IST
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उत्तराखंड में आपदा आई तो उसने न किसी से प्रदेश का नाम पूछा और न ही घर का पता। सामने जो आया बहने लगा, शवों के बीच यह पहचान करना तक मुश्किल है कि कौन किस प्रदेश से आया है।
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लेकिन इस आपदा में जख्म खाकर जो बच गया, उसके जख्मों पर मरहम लगाने से पहले उसका पता पूछा जा रहा है। आपदा पीड़ित प्रदेशों में बंटकर रह गए हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन और इसके आसपास सात राज्यों की ओर से सहायता शिविर लगाए गए हैं।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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पहाड़ पर आई आपदा से निकालकर लाए गए लोगों को यहां से ट्रेनों और बसों आदि के माध्यम से उनके घर तक पहुंचाने का इंतजाम किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान आदि राज्यों की ओर से पीड़ितों को नगद धनराशि भी दी जा रही है। लेकिन यह सब प्रक्रिया राज्य का नाम पूछने के बाद शुरु होती है।
हाथ खड़े कर दिए
कोटा राजस्थान के सत्यनारायण ने बताया कि उनके प्रदेश का कैंप रेलवे स्टेशन के बजाए यहां से कुछ दूर भल्ला कालेज में लगाया गया है। वह रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग राज्यों के कैंप में पहुंचे लेकिन सभी ने राजस्थान का नाम सुनने के बाद हाथ खड़े कर दिए।
बाद में भल्ला कालेज पहुंचे और वहां से वापस जाने के बारे में जानकारी मिली। यह मात्र सत्यनारायण की व्यथा नहीं है। रेलवे स्टेशन पर लगाए गए राज्यों के कैंप में दूसरे राज्य के पीड़ित को कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। जैसे ही पता चलता है कि यह दूसरे राज्य का पीड़ित है तो कैंप वाले हाथ पीछे खींच लेते हैं।
एक पीड़ित का तो यहां तक कहना था कि अपने राज्य के पीड़ितों के लिए पूड़ी-सब्जी तक का इंतजाम है लेकिन दूसरे राज्य के पीड़ित कैंप में पहुंच जाए तो पानी तक नहीं पूछा जा रहा।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता भी
राज्यों के कैंप में आने वाले पीड़ितों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। राजस्थान सरकार के कैंप में पहुंच रहे सामान्य पीड़ितों को दो हजार रुपये, घायलों को पांच हजार रुपये और मृतकों के परिजनों को 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद की जा रही है।
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी अपने प्रदेशों के पीड़ितों को दो हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा बाकी सभी राज्यों की ओर से पीड़ितों को निशुल्क घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
किसके कैंप में कितने आए पीड़ित
राज्य - पीड़ित संख्या
यूपी - 8688
महाराष्ट्र - 2000
प. बंगाल - 720
उड़ीसा - 367
बिहार - 125
मध्य प्रदेश - 274
राजस्थान - 598