Remdesivir: दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड में पकड़ी नकली रेमडेसिविर बनाने वाली फैक्टरी, सरगना समेत सात गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
विस्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए गिरोह के सरगना समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह उत्तराखंड के हरिद्वार, रुड़की और कोटद्वार में अवैध फैक्टरियोें में नकली रेमडेसिविर का उत्पादन करता है।
एडीडीआई पुलिस कमिश्नर शिभेश सिंह ने बताया कि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली रेमडेसिविर बनाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। इस दौरान सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
Delhi Police Crime Branch busted an interstate gang that produced fake Remdesivir & arrested 7 people. We also busted their manufacturing unit in Uttarakhand. 198 vials of fake Remdisivir, packaging material, 3000 empty vials seized: Addl Police Commissioner, Crime, Shibesh Singh pic.twitter.com/rfxdDIUxyf
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 30, 2021
Crime Branch conducted raids in Haridwar, Roorkee & Kotdwar (Uttarakhand) & busted an illegal factory being used for manufacturing fake Remdesivir injections. 5 people, incl the kingpin, arrested. They used to sell the injections at Rs 25,000 per piece. Raids on: Delhi Police
— ANI (@ANI) April 30, 2021
पुलिस ने बताया कि यह लोग एक इंजेक्शन को 25 हजार रुपये में बेचते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से रेमडेसिविर के 196 नकली इंजेक्शन बरामद किए हैं। वहीं तीन हजार खाली वायल्स भी पुलिस को मिली है। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वे अब तक कोरोना मरीजों को दो हजार से अधिक रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन बेच चुके हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है।
Uttarakhand: Delhi Police Crime Branch conducted raids in Haridwar, Roorkee & Kotdwar and busted an illegal factory being used for manufacturing fake Remdesivir injections. 5 people, including the kingpin, arrested. They used to sell the injections at Rs 25,000 per piece. pic.twitter.com/feXVZrLM3w
— ANI (@ANI) April 30, 2021
हरिद्वार से सप्लाई हो रही थी नकली रेमडेसिविर की खेप
जीवनरक्षक दवा रेमडेसिविर के लिए देशभर में मची हायतौबा के बीच नकली इंजेक्शन बेचकर कोरोना के मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला है कि एंटीबायोटिक पर रेमडेसिविर का लेबल लगाकर मुंहमांगे दामों पर सप्लाई की जा रही थी। नकली रेडिमेसिविर का काला कारोबार हरिद्वार से संचालित किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरोह के सरगना समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन हजार एंटीबायोटिक वॉयल, पैकेजिंग सामग्री और बैच कोडिंग मशीन बरामद की है।
पिछले दिनों दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को रेमडेसिविर की कालाबाजारी की सूचना मिली थी, लेकिन पुलिस ने छानबीन शुरू की तो मामला और गंभीर निकला। जरूरतमंदों को जीवनरक्षक दवा के नाम पर ऊंचे दाम पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन थमाए जा रहे थे। पुलिस ने इस काले कारोबार में संलिप्त गाजियाबाद के एक डॉक्टर और तीन कारोबारियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से पुलिस को 70 रेमडेसिविर इंजेक्शन, दो अक्टेमरा इंजेक्शन, 36.10 लाख रुपये और स्कोडा कार मिली थी।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया उनको नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप उत्तराखंड से पहुंचाई जा रही है। इस दौरान नकली इंजेक्शन की आपूर्ति करने वाले रानीपुर थाना क्षेत्र के टिहरी विस्थापित कॉलोनी निवासी वतन कुमार सैनी का नाम भी सामने आया। 27 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की टीम आरोपी का पीछा करते हुए हरिद्वार स्थित उसके आवास पहुंची। मौके पर ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम को भी बुलाया गया। उसके घर की तलाशी के दौरान एक कंपनी के एंटीबायोटिक इंजेक्शन की तीन हजार वॉयल, पैकिंग सामग्री और बैच कोडिंग मशीन बरामद हुई।
दो दिनों तक चली पूछताछ के बाद आरोपी ने गिरोह के सरगना का नाम उगला। उसने बताया कि आदित्य कुमार गौतम निवासी नगला चीना, नारसन नकली रेमडेसिविर का धंधा संचालित कर रहा है। 29 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की टीम ने आदित्य को गिरफ्तार कर लिया। हरिद्वार की ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती ने बताया कि उसके पास लैपटॉप में रेमडेसिविर लेबलिंग का फारमेट, पैकिंग सामग्री और 2019 में बंद हुई रुड़की की फार्मा कंपनी ऐजिस फार्मास्यूटिकल के हारमोन इंजेक्शन की वॉयल बरामद हुई। लेबल का प्रिंट भी रुड़की में हो रहा था।
आरोपी ने कबूल किया कि वह एंटीबायोटिक इंजेक्शन पर रेमडेसिविर का लेबल लगाकर बेचता था। आरोपी के पास से कोटद्वार की कंपनी नेक्टर हर्बल फार्मा के कुछ बिल भी मिले। क्राइम ब्रांच की टीम और ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारी कोटद्वार पहुंचे। कंपनी के मालिक विषद कुमार ने बताया कि आरोपी थर्ड पार्टी के माध्यम से उनकी दवाओं की खरीदारी करता था। रेमडेसिविर की लेबलिंग के बारे में उनको जानकारी नहीं है।
डीएम के कहने पर भी नहीं मिली मरीज को रेमडेसिविर
रेमडेसिविर की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर सरकार और प्रशासन भले ही लाख दावे करे। लेकिन, सच्चाई यही है कि जरूरतमंद मरीजों को यह आसानी से नहीं मिल पा रही है। ऐसे ही एक मामले में देहरादून के सुभारती अस्पताल में भर्ती मरीज को डीएम के कहने के बाद भी इंजेक्शन नहीं मिल पाया। परिजनों ने बमुश्किल दूसरी जगह से इंजेक्शन का इंतजाम किया।
सुभारती अस्पताल में भर्ती मरीज को 27 अप्रैल को डॉक्टर ने रेमडिसिवर दवा लिखी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं है, परिजनों को बाहर से दवा का इंतजाम करना होगा। परिजनों के अनुसार, उस दिन कई जगह चक्कर काटने के बावजूद उन्हें दवा नहीं मिल पाई। अगले दिन किसी तरह दो इंजेक्शन का इंतजाम हुआ। परिजन इंजेक्शन के लिए भटकते रहे, लेकिन उन्हें नहीं मिल पाया। इस पर उन्होंने अमर उजाला से संपर्क कर मदद मांगी।
हमारे संवाददाता ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव को मामले की जानकारी दी। इस पर डीएम ने बताया कि सुभारती अस्पताल को इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। हमने उन्हें बताया कि उसके बावजूद अस्पताल मरीज को बाहर से इंजेक्शन लाने के लिए कह रहे हैं। इस पर डीएम ने जल्द व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। हालांकि देर शाम तक प्रशासन की ओर से इंजेक्शन का कोई इंतजाम नहीं हो सका। परिजनों ने अपने प्रयासों से दूसरी जगह से इंजेक्शन जुटाए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद मैंने इंजेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि वे मरीज के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। इस पर मैंने तभी व्यवस्था होने का मैसेज भेजा था। अब शाम को पता चल रहा है कि अस्पताल ने इंजेक्शन नहीं दिया।
- डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, जिलाधिकारी
कालाबाजारी पर अंकुश के लिए एसटीएफ ने जारी किए नंबर
जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन आदि की कालाबाजारी रोकने के लिए एसटीएफ ने भी तैयारियां की हैं। शिकायतों के बाद एसटीएफ ने एक और नंबर जारी किया है। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि मुख्यालय ने 9411112780 व्हाट्एस नंबर जारी किया था।
वर्तमान में महामारी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में जीवनरक्षक दवाओं और ऑक्सीजन की मांग बढ़ रही है। शिकायतें हैं कि इनकी कालाबाजारी हो रही है। लिहाजा एक और मोबाइल नंबर 9412029536 जारी किया है।