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उत्तराखंड में भाजपा के इम्तिहान का सप्ताह शुरू

Tue, 19 Apr 2016 09:34 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Apr 2016 09:34 AM IST
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नरेंद्र मोदी

उत्तराखंड में भाजपा के इम्तिहान का सप्ताह शुरू हो चुका है। इसी सप्ताह उच्च न्यायालय नैनातील में जिन मामलों की सुनवाई चल रही है, उनका निर्णय होने की संभावना है।

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संसद सत्र शुरू होने से पहले सरकार गठन या विधानसभा भंग करने के लिए समयबद्धता का फेर भी मामलों का उलझा रहा है। इसके अलावा भाजपा को सरकार गठन करने के जरूरी इंतजामात भी करने हैं। सब कुछ इसी सप्ताह होना है। 
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भाजपा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय शुरू हो गया है। खासतौर पर चालू सप्ताह राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो गया है। भले ही भाजपा माने या न माने, लेकिन पिछले 18 मार्च को सदन के भीतर घटे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि उसी ने तैयार की थी।
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इसके बाद समय मिलने पर भी बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिलने के बाद कांग्रेस सत्ता की सीढ़ियों से दूर हो गई। इसलिए अब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सब कुछ भाजपा को ही करना है। यह सप्ताह भाजपा की रणनीति और राजनीतिक कौशल का इम्तिहान लेगा, क्योंकि 25 अप्रैल से संसद का जो सत्र शुरू हो रहा है, वह फजीहत भी करा सकता है।

एक तो विपक्ष इस मुद्दे को लोकसभा में उठा सकता है, दूसरा राष्ट्रपति रूल को दोनों सदनों से अनुमति लेनी होगी। जबकि राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है। इसलिए ऐसी नौबत आने से पहले ही भाजपा को कुछ करना होगा।

पोस्टर वार में देख रहे नफा-नुकसान

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भाजपा नेता अजय भट्ट‍ - फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस और भाजपा के बीच छिड़े पोस्टर वार के नफा-नुकसान का अनुमान भी लगाया जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि पोस्टर वार का राजनीतिक रूप से कांग्रेस को ही फायदा पहुंच रहा है। हालांकि, पार्टी के स्तर पर इस पोस्टर से कोई लेना देना न होने का दावा भी किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सलाहकार सुरेंद्र कुमार का साफ कहना है कि कांग्रेस इस तरह की ओछी राजनीति में यकीन नहीं रखती।

हाल ही में एक पोस्टर में कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को बकरी के रूप में नोट खाते हुए दिखाया गया था। पोस्टर के इस निहितार्थ को ही कांग्रेस अपने लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद मान रही है। कांग्रेस का कहना है कि पोस्टर से साफ है कि नौ बागी विधायकों को धनबल के जरिए तोड़ा गया।

भाजपा को अब तीन और ऐसे विधायकों की दरकार है। इस पोस्टर को देखकर लोग यह भी समझ जाएंगे कि राष्ट्रपति शासन लगाने में प्रदेश में किसकी भूमिका रही। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की मंशा अब इस पोस्टर का उपयोग चुनाव में करने की भी है। उसका फायदा यह है कि इस पोस्टर का निशाना कांग्रेस के नौ बागी विधायक बन रहे हैं।

हालांकि पोस्टर वार भी प्रदेश के लिए नया नहीं है।  पूर्व में सतपाल महाराज के पोस्टर की चौकीदारी उनके अनुयाइयों ने रात- रात भर जागकर की थी। 2007 के चुनाव में भी भाजपा ने महंगाई के पोस्टर से कांग्रेस को खासा परेशान किया था। 2007 में प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के एक गीत नौ छमी नारायण का भी जमकर राजनीतिक इस्तेमाल किया गया था।

वहीं, कांग्रेस अब दबी जुबान में भाजपा के हरिद्वार में लगे पोस्टरों को भी मुद्दा बनाने की कोशिश में है। कांग्रेस का कहना है कि हरिद्वार में लगे पोस्टरों में भाजपा ने बागी विधायकों के भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह से छुपा लिया है। इससे साफ है कि भाजपा के साथ इन बागी विधायकों का गठजोड़ है।

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