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काटना पड़ सकता है मोहिनी का पैर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 31 Mar 2016 12:22 PM IST
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घायल गाय मोहिनी
- फोटो : amar ujala
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पैर टूटने पर लाचार पड़ी मोहिनी (गाय) की पशुपालन विभाग के चिकित्सकों ने छह दिन बाद सुध ली।
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को विभाग के डाक्टरों की एक टीम ने गाय का उपचार शुरू कर दिया। छह दिन तक उपचार न मिलने के कारण गाय के टूटे पैर में कीड़े पड़ गए है। कीड़े पड़ने से उसका पैर सड़ने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि मोहिनी के पेट में पल रहा बच्चा सुरक्षित है। डाक्टरों ने बताया कि गाय का पैर ठीक नहीं हुआ तो उसको काटना भी पड़ सकता है।
बालावाला में रहने वाले रविंद्र दत्त बहुगुणा की गाय मोहिनी का होली के दिन पैर फिसलने से पिछला पैर टूट गया था। बहुगुणा ने उसके इलाज को विभाग के अफसरों और डॉक्टरों से लगातार संपर्क किया, लेकिन उसकी एक न सुनी गई। मामला अमर उजाला ने उठाया तो बुधवार को डॉक्टर की एक टीम ने मोहिनी का उपचार शुरू किया। पहले दिन डॉक्टरों ने घाव को ड्रेसिंग कर दवा लगाकर उसे खड़ा करने का प्रयास किया, लेकिन मोहिनी अभी खड़ी नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि अगर दवा से वह ठीक नहीं हुई तो उसके पैर काटने पड़ेंगे।
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रूटीन में होगा उपचार, लगाया जाएगा कृत्रिम पैर
उपचार करने पहुंची टीम ने टूटे पैर की फोटो राजस्थान और नेपाल के एक जाने माने डॉक्टर को भेजी। के पास भेजा है। डॉक्टर के अनुसार अगर पैर ठीक नहीं हुआ तो कृत्रिम पैर मंगाकर लगाया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ राकेश नेगी ने बताया कि गाय का उपचार रूटीन में किया जायेगा। इसके लिए एक डॉक्टर की ड्यूटी वहीं पर लगा दी गई है।
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डॉक्टर सुबह शाम जाकर घाव की ड्रेसिंग करेगा। इसके अलावा टीम के डॉक्टर भी बीच बीच में जाकर चेक अप करते रहेंगे। वहीं जयपुर के डा. तपेश माथुर ने अमर उजाला को फोन कर बताया कि वह तीन तारीख को गायक की हालत देखने दून पहुंचेंगे। सरकार से मदद न मिलने की दशा में वह गाय के कृत्रिम पैर का खर्च वहन करेंगे।
गाय अभी खड़ी नहीं हो पा रही है। उसके दोनों पिछले काम नहीं कर रहे हैं। उपचार शुरू हो गया है, कोशिश रहेगी कि गाय कम से कम तीन पैर पर खड़ी हो जाए। उसके खड़े होने पर ही उसका इलाज ठीक से हो पाएगा।
- घनश्याम दत्त जोशी, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
घायल मोहिनी के समुचित इलाज के आदेश
दर्द से तड़प रही मोहिनी (गाय) का समुचित इलाज नहीं होने पर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पशुपालन निदेशक को गाय का तत्काल उचित इलाज करने के आदेश दिए हैं। पशुपालन निदेशक को एक हफ्ते के भीतर आयोग में भी इसकी रिपोर्ट देने को कहा है।
आठ माह की गर्भवती मोहनी (गाय) का होली के दिन पैर टूट गया था। तब से वह इलाज के लिए तड़प रही है। गाय को पालने वाले बालावाला निवासी रविंद्र दत्त बहुगुणा ने बताया कि सूचना देने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश नेगी पहुंचे और प्राथमिक उपचार किया। रविंद्र बहुगुणा का आरोप है कि इसके बाद से कोई डाक्टर मोहनी का इलाज करने नहीं आया। डाक्टर को फोन करने पर वह फोन भी नहीं उठाते।
रविंद्र ने अमर उजाला पब्लिक काल के जरिए इसकी सूचना अमर उजाला को दी। अमर उजाला ने घायल गाय की पीड़ा को 30 मार्च के अंक में ‘मोहनी की किस्मत शक्तिमान जैसी नहीं’ शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने पर नेहरू कालोनी निवासी भूपेंद्र कुमार ने बुधवार को इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग में की। आयोग ने मामले को जीवन मरण से संबंधित मानते हुए तत्काल पंजीकृत कर सुनवाई शुरू कर दी। आयोग के सदस्य जस्टिस राजेश टंडन और डॉ. हेमलता ढौंढियाल मामले की सुनवाई कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।