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खुले में शौच के प्रति शर्म और घृणा लाना जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 05 Dec 2015 10:06 PM IST
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच की प्रथा से लोगों का मुक्त करने के उद्देश्य से भारत सरकार पेयजल स्वच्छता मंत्रालय की फीडबैक संस्था और स्वजल के माध्यम की पांच दिनी कार्यशाला जारी है। शनिवार को कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञ अजय सिन्हा ने प्रतिभागियों को लोगों के व्यवहार और सोच में परिवर्तन लाकर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने गुर सिखाए।
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कार्यशाला में जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के 42 प्रतिभागी हिस्सेदारी कर रहे है। श्री सिन्हा ने स्वच्छता कार्यक्रम की परंपरागत विधियों, स्वच्छता कार्यक्रम के इतिहास, खुले में शौच क्या है, खुले में शौच की आदत, खुले में शौच की आदत से मुक्ति जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि खुले में शौच के प्रति शर्म और घृणा लाकर भी समुदाय को शौचालय प्रयोग करने के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
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कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर शिव कुमार, तनू, हजरत और लेखविंदर प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा पुनीत कुमार सिंह, मीनू गुलाटी, वेद प्रकाश गोयल, अंकित खंडेलवाल, नसीम अख्तर, सोफी अरसीद, खुर्शीद अहमद, जोहान एरा जोबीन, रूची गुप्ता, साफिया वानी, ज्योति सिन्धु सहयोग दे रहे हैं।
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चार गांवों के लिए रवाना हुई चार टीमें
खुले में शौच से लोगों में शर्म और घृणा की भावना जागरूक करने के लिए प्रतिभागियों को शनिवार को जिले के चार गांवों कठनोली, दुबड़ जैनल, मंच और सिमल्टा के लिए रवाना किया गया। इसके लिए 42 प्रतिभागियों को 4 ग्रुप में बांटा गया है। ये प्रतिभागी गांवों में लोगों को खुले में शौच और उसके दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देंगे। सात दिसंबर को टनकपुर क्षेत्र में स्थित अलग-अलग चार गांवों में भी प्रचार-प्रसार कर जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।