{"_id":"5ea076ef8ebc3e9028289857","slug":"workers-of-the-relief-center-are-shying-away-from-going-to-the-old-workplace-champawat-news-hld3808754174","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुराने कार्यस्थल में जाने से कतरा रहे राहत केंद्र के मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुराने कार्यस्थल में जाने से कतरा रहे राहत केंद्र के मजदूर
विज्ञापन
चंपावत के राहत केंद्र में मौजूद मजदूर।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। राहत केंद्रों में रखे गए मजदूरों में से ज्यादातर अपने पुराने कार्यस्थल में जाने से कतरा रहे हैं। उप्र के अलग-अलग जगहों के इन मजदूरों की प्राथमिकता अपने गांव जाने की है। अगर गांव में जाने को न मिले, तो ये लोग गांव के सबसे नजदीक के जिले में जाने को लालायित है।
रैनबसेरा में बने राहत केंद्र में 30 मार्च से मजदूरों की आमद हुई। अब यहां 40 मजदूर रह रहे हैं। धारचूला और खेतीखान में काम करने वाले ये मजदूर अब अपने पुराने कार्य स्थल में जाने को तैयार नहीं है। बहेड़ी के महेश गंगवार, पप्पू लाल, प्रेमपाल, जयपाल, चंद्रपाल आदि कहते हैं कि गेहूं व गन्ने की फसल के चलते वे गांव जाना चाहते हैं। अगर गांव न भेजा जाए, तो कम से कम गांव के नजदीक के जिले भेजा जाना चाहिए। मजदूरों का कहना है कि रैनबसेरे की व्यवस्था और पुलिस व प्रशासन के इंतजाम अच्छे हैं, लेकिन घरेलू मजबूरियां इन सबसे ऊपर हैं।
डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि मजदूरों को काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, यह उनकी इच्छा पर निर्भर है। वहीं एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि मजदूरों से राज्य के भीतर के उन जिलों का नाम मांगा जा रहा है, जहां वे जाना चाहते हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इन मजदूरों को वहां भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
रैनबसेरा में बने राहत केंद्र में 30 मार्च से मजदूरों की आमद हुई। अब यहां 40 मजदूर रह रहे हैं। धारचूला और खेतीखान में काम करने वाले ये मजदूर अब अपने पुराने कार्य स्थल में जाने को तैयार नहीं है। बहेड़ी के महेश गंगवार, पप्पू लाल, प्रेमपाल, जयपाल, चंद्रपाल आदि कहते हैं कि गेहूं व गन्ने की फसल के चलते वे गांव जाना चाहते हैं। अगर गांव न भेजा जाए, तो कम से कम गांव के नजदीक के जिले भेजा जाना चाहिए। मजदूरों का कहना है कि रैनबसेरे की व्यवस्था और पुलिस व प्रशासन के इंतजाम अच्छे हैं, लेकिन घरेलू मजबूरियां इन सबसे ऊपर हैं।
विज्ञापन
डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि मजदूरों को काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, यह उनकी इच्छा पर निर्भर है। वहीं एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि मजदूरों से राज्य के भीतर के उन जिलों का नाम मांगा जा रहा है, जहां वे जाना चाहते हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इन मजदूरों को वहां भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन