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क्या जिंदगी का ठिकाना फिरत मन क्यों रे भुलाना

Sat, 05 Jan 2019 10:20 PM IST
kamlesh kamlesh अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)। Published by: kamlesh kamlesh Updated Sat, 05 Jan 2019 10:20 PM IST
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Why do you forget about the place of life
नेपाल सीमा से लगे मडलक में बैठकी होली के गीतों पर झूमते होल्यार। - फोटो : AMAR UJALA
विकासखंड के नेपाल सीमा से लगे मडलक गांव में बैठकी होली का गायन किया गया। होलियों के विभिन्न रागों में होल्यार देर रात तक झूमते रहे। दीवान सिंह के आवास में हुई बैठकी होली का शुभारंभ ग्राम प्रधान भुवन भट्ट ने दीप जलाकर किया।
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 होल्यारों ने तू मृत्यु लोक से आई नमोतारिणी गंगे से बैठकी होली की शुरूआत की। होल्यार दीवान सिंह पुजारी ने ऊंचे भवन पर्वत पर बस रही, अंत तेरा नहीं पाया गीत से वातावरण को भक्तिभाव में सरोबार कर दिया। भुवन पांडेय ने कीजै कौन उपाय, नहीं आए कन्हाई गीत खूब सराहा गया।
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 शंकर दत्त ने भव भंजन गुण गाऊं मैं अपने राम को रिझाऊं, भुवन भट्ट ने क्या जिंदगी का ठिकाना फिरत मन क्यों रे भुलाना, अमरनाथ सिंह ने जटन विराजत गंग भोले नाथ दिगंबर, मोहन सिंह ने गणपति को भज लीजै रसिक वह आदि कहावै होली गीत प्रस्तुत कर समा बांध दिया। देर रात तक चली होली महफिल में होल्यार पूर्णानंद शर्मा, शंकर दत्त पांडेय, अमर सिंह, भुवन पांडेय, बद्री सिंह, अमरनाथ सिंह, मोहन सिंह, शेर सिंह, आनंद जोशी, हरीश पांडेय ने सुर में सुर मिलाया। 
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