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Champawat News: मतदाताओं के पास नहीं थे मुद्दे फिर भी किया मतदान
Sat, 20 Apr 2024 12:02 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 20 Apr 2024 12:02 AM IST
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चंपावत। लोकसभा चुनाव 2024 में चंपावत और लोहाघाट में 344 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान केंद्र के अंदर जाने और मतदान केंद्र से बाहर आने वाले अधिकांश मतदाताओं के पास कोई मुद्दा नहीं था। जनता के साथ कार्यकर्ताओं का भी जोश फीका नजर आया। जिले में 2024 लोकसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत 51.33 रहा। जो लोकसभा चुनाव 2019 से 4.84 प्रतिशत कम रहा। 2019 में मतदान प्रतिशत 56.17 रहा। कम होता मतदान प्रतिशत चिंता का विषय है। कहीं ऐसा न हो कि आने वाले समय में जनता और कार्यकर्ताओं के जोश और कम न हो जाए।
जिले के समस्त मतदान केंद्रों के बाहर मतदान को लेकर बिल्कुल भी उत्साह नहीं दिखाई दिया। न पार्टी कार्यकर्ता न लोग चुनाव को लेकर उत्साहित नजर आए। यह पहला मौका होगा जब 2024 का लोकसभा चुनाव हर किसी के लिए असमंजस की स्थिति लेकर आया। जनता की खामोशी आने वाले समय में किसी बदलाव के संकेत तो नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना था कि काम तो कोई हो नहीं रहा फिर भी लोकतंत्र का फर्ज निभा रहे हैं। मुद्दे तो बहुत हैं, लेकिन उनका समाधान करने वाले प्रतिनिधि नहीं है। मतदान बहिष्कार या नोटा दबाकर वोट बर्बाद करने से अच्छा है कि मतदान किया जाए।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिले में मतदान को लेकर जोश था। मतदान केंद्र के अंदर से लेकर बाहर तक उत्साह का माहौल था। हर कोई मतदान के लिए उत्सुक था। तब चंपावत जिले में 55.55 प्रतिशत मतदान हुआ। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव को लेकर उत्साह बरकरार रहा और 56.17 प्रतिशत मतदान हुआ। .62 फीसदी मतदान में इजाफा हुआ, लेकिन 2024 आते-आते मतदाताओं के साथ कार्यकर्ताओं का भी जोश ठंडा पड़ गया। इस बार 51.33 प्रतिशत मतदान हुआ। किसी ने किसी बात को लेकर हर कोई नाराज नजर आया।
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जागरूकता के बाद भी नहीं बढ़ा मतदान प्रतिशत
चंपावत। जिले में स्वीप के तहत मतदाता जागरूकता कार्यक्रम हुए, लेकिन इसका फायदा बिलकुल भी नहीं हुआ। मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मतदान प्रतिशत 70 फीसदी तक ले जाने का प्रयास था, लेकिन सारे जागरूकता कार्यक्रम प्रयास धरे के धरे रह गए।
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जिले के समस्त मतदान केंद्रों के बाहर मतदान को लेकर बिल्कुल भी उत्साह नहीं दिखाई दिया। न पार्टी कार्यकर्ता न लोग चुनाव को लेकर उत्साहित नजर आए। यह पहला मौका होगा जब 2024 का लोकसभा चुनाव हर किसी के लिए असमंजस की स्थिति लेकर आया। जनता की खामोशी आने वाले समय में किसी बदलाव के संकेत तो नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना था कि काम तो कोई हो नहीं रहा फिर भी लोकतंत्र का फर्ज निभा रहे हैं। मुद्दे तो बहुत हैं, लेकिन उनका समाधान करने वाले प्रतिनिधि नहीं है। मतदान बहिष्कार या नोटा दबाकर वोट बर्बाद करने से अच्छा है कि मतदान किया जाए।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिले में मतदान को लेकर जोश था। मतदान केंद्र के अंदर से लेकर बाहर तक उत्साह का माहौल था। हर कोई मतदान के लिए उत्सुक था। तब चंपावत जिले में 55.55 प्रतिशत मतदान हुआ। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव को लेकर उत्साह बरकरार रहा और 56.17 प्रतिशत मतदान हुआ। .62 फीसदी मतदान में इजाफा हुआ, लेकिन 2024 आते-आते मतदाताओं के साथ कार्यकर्ताओं का भी जोश ठंडा पड़ गया। इस बार 51.33 प्रतिशत मतदान हुआ। किसी ने किसी बात को लेकर हर कोई नाराज नजर आया।
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जागरूकता के बाद भी नहीं बढ़ा मतदान प्रतिशत
चंपावत। जिले में स्वीप के तहत मतदाता जागरूकता कार्यक्रम हुए, लेकिन इसका फायदा बिलकुल भी नहीं हुआ। मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मतदान प्रतिशत 70 फीसदी तक ले जाने का प्रयास था, लेकिन सारे जागरूकता कार्यक्रम प्रयास धरे के धरे रह गए।