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Champawat News: वनरावत महिला मरीज को तख्ते पर बांध कर 17 किमी चले पैदल
Wed, 09 Aug 2023 10:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 09 Aug 2023 10:56 PM IST
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चंपावत। न सेहत न सड़क। आदिम जनजाति खिरद्वारी के लोगों की यह बेबसी उनके लिए मुश्किल बन रही है। बुधवार को बीमार वनरावत महिला को अस्पताल ले जाने के लिए उसे तख्ते पर बांधकर 17 किमी पैदल ले जाना पड़ा। फिर चल्थी से जीप से 36 किमी दूर टनकपुर अस्पताल पहुंचाया गया। अभी महिला की हालत खतरे से बाहर नहीं है।
नेपाल सीमा से लगे खिरद्वारी गांव की नंदा देवी (34) पत्नी नवीन सिंह को बुधवार को अचानक पेट में दर्द हुआ। आननफानन महिला को ले जाने के लिए तख्ता बनाया गया। फिर उस पर महिला को लेटाकर बांधा गया। इसके बाद 17 किलोमीटर दूर कंधे पर ढोकर चल्थी पहुंचाया गया। प्रकाश सिंह, रोहित सिंह, जीत सिंह, शोभन सिंह, कल्याण, शंकर सिंह, प्रेम सिंह आदि की मदद से इस दूरी को चार घंटे में तय किया गया। फिर चल्थी से सड़क मार्ग से टनकपुर अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक अभी महिला की हालत खतरे से बाहर नहीं है।
इनसेट
खिरद्वारी में मरहम पट्टी की भी सुविधा नहीं
चंपावत। पोथ ग्राम पंचायत के आदिम जनजाति बाहुल्य खिरद्वारी गांव में 35 परिवारों में कुल 154 वनरावत रहते हैं। इन परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं नामभर की भी नहीं है। न गर्भवतियों के लिए कोई इलाज न नवजात के टीकाकरण की कोई व्यवस्था। यहां तक कि चोट लगने पर भी मरहम पट्टी का इंतजाम भी नहीं है। प्रधान सचिन बोहरा कहते हैं कि सबसे नजदीक का अस्पताल चल्थी है जहां तक पैदल पहुंचने के लिए 17 किमी चलना मजबूरी है। लोग लंबे समय से स्वास्थ्य उप केंद्र की मांग कर रह हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। संवाद
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इनसेट
इस माह डोली से गए बीमार
5 अगस्त : सौराई गांव के सूरज सिंह को डोली से 12 किलोमीटर ले जाकर सड़क तक लाया गया। और वहां से चंपावत जिला अस्पताल लाया गया।
7 अगस्त : नीलावती देवी को बड़ौली से डोली से छह किलोमीटर ले जाकर स्वांला से टनकपुर अस्पताल ले जाया गया।
कोट
खिरद्वारी गांव में सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। खिरद्वारी की स्वास्थ्य सेवाएं सूखीढांग उप केंद्र से संचालित होती है। प्रस्ताव भेज कर खिरद्वारी की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
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नेपाल सीमा से लगे खिरद्वारी गांव की नंदा देवी (34) पत्नी नवीन सिंह को बुधवार को अचानक पेट में दर्द हुआ। आननफानन महिला को ले जाने के लिए तख्ता बनाया गया। फिर उस पर महिला को लेटाकर बांधा गया। इसके बाद 17 किलोमीटर दूर कंधे पर ढोकर चल्थी पहुंचाया गया। प्रकाश सिंह, रोहित सिंह, जीत सिंह, शोभन सिंह, कल्याण, शंकर सिंह, प्रेम सिंह आदि की मदद से इस दूरी को चार घंटे में तय किया गया। फिर चल्थी से सड़क मार्ग से टनकपुर अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक अभी महिला की हालत खतरे से बाहर नहीं है।
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खिरद्वारी में मरहम पट्टी की भी सुविधा नहीं
चंपावत। पोथ ग्राम पंचायत के आदिम जनजाति बाहुल्य खिरद्वारी गांव में 35 परिवारों में कुल 154 वनरावत रहते हैं। इन परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं नामभर की भी नहीं है। न गर्भवतियों के लिए कोई इलाज न नवजात के टीकाकरण की कोई व्यवस्था। यहां तक कि चोट लगने पर भी मरहम पट्टी का इंतजाम भी नहीं है। प्रधान सचिन बोहरा कहते हैं कि सबसे नजदीक का अस्पताल चल्थी है जहां तक पैदल पहुंचने के लिए 17 किमी चलना मजबूरी है। लोग लंबे समय से स्वास्थ्य उप केंद्र की मांग कर रह हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। संवाद
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इस माह डोली से गए बीमार
5 अगस्त : सौराई गांव के सूरज सिंह को डोली से 12 किलोमीटर ले जाकर सड़क तक लाया गया। और वहां से चंपावत जिला अस्पताल लाया गया।
7 अगस्त : नीलावती देवी को बड़ौली से डोली से छह किलोमीटर ले जाकर स्वांला से टनकपुर अस्पताल ले जाया गया।
कोट
खिरद्वारी गांव में सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। खिरद्वारी की स्वास्थ्य सेवाएं सूखीढांग उप केंद्र से संचालित होती है। प्रस्ताव भेज कर खिरद्वारी की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।