{"_id":"5999c0824f1c1bf5768b45d8","slug":"this-time-local-artists-will-not-be-seen-in-ramlila","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामलीला में इस बार स्थानीय कलाकार नहीं दिखेंगे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलीला में इस बार स्थानीय कलाकार नहीं दिखेंगे
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 20 Aug 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
चंपावत मल्लीहाट में रामलीला की तैयारी बैठक में चर्चा करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद राजाओं की राजधानी रही चंपावत में रामलीला का चमकदार अतीत है, लेकिन अब यहां मल्लीहाट की ऐतिहासिक रामलीला पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शास्त्रीय आधार पर होने वाली इस रामलीला में अब कलाकारों की कमी और जन सहयोग का अभाव आड़े आ रहा है। इस बार चंपावत की रामलीला मंचन में स्थानीय कलाकार नहीं दिखेंगे। इनके स्थान पर रामलीला मंचन में वृंदावन के कलाकार अपना अभिनय दिखाएंगे।
मल्लीहाट की रामलीला 128 वें वर्ष पर प्रवेश कर रही है। लेकिन पात्रों की कमी और अपेक्षित जन सहयोग नहीं मिलने से आयोजकों ने रामलीला से हाथ खींच लिए हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भगवत शरण राय का कहना है कि अब मनोरंजनों के तमाम साधन होने के कारण लोगों का झुकाव रामलीला के प्रति कम हो गया है। लोगों का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण इस बार वृंदावन से रामलीला की टीम बुलाने का निर्णय लिया गया है।
कमेटी के वरिष्ठ सदस्य सुरेश साह बताते हैं कि मल्लीहाट की रामलीला का सफर 1889 से मशाल के उजाले में शुरू हुआ था। बाद में केरोसिन की उपलब्धता के बाद पैट्रोमेक्स के उजाले में रामलीला का मंचन किया जाने लगा। तब तहसीलदार परमिट जारी कर केरोसिन उपलब्ध कराते थे। गौड़ी पावर हाउस बनने के बाद 1966 से रामलीला का आयोजन बिजली के उजाले में किया गया। यहां की रामलीला देखने को 60 किमी दूर सूखीढांग, चल्थी, मंच, बिस्ज्यूला, सिप्टी और पल्सों गांव से ग्रामीण मशाल जला कर जत्थों में आते थे।
विज्ञापन
राज्य बनने के बाद पहली बार आएंगे बाहरी कलाकार
128 साल पुरानी रामलीला में उत्तराखंड बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब स्थानीय कलाकार नहीं होंगे। वैसे इससे पूर्व तीन बार बाहर से टीम बुला कर रामलीला का मंचन हो चुका है। लेकिन तब बाहर से टीम बुलाने का मकसद लोगों को नयेपन का अहसास कराना था। कई दशकों से प्रांमटर की जिम्मेदारी निभा रहे भुवन पचौली कहते हैं कि 1990, 1995 और 1998 में रामलीला मंचन के लिए बाहर से टीम बुलाई गई थी।
पांच लाख रुपये से मंदिर का सुंदरीकरण होगा
मल्लीहाट की रामलीला में इस बार वृंदावन की टीम रामलीला का मंचन करेगी। ये निर्णय अध्यक्ष भगवतशरण राय की अध्यक्षता और कोषाध्यक्ष विकास साह के संचालन में हुई बैठक में रविवार को हुई बैठक में लिया गया। रामलीला पहली नवरात्र से शुरू होगी। पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से मिले पांच लाख रुपये से नागनाथ मंदिर के सुंदरीकरण कराया जाएगा। पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी, भुवन पचौली, सज्जन वर्मा, रवींद्र तड़ागी, कुंदन वर्मा, देवेंद्र वर्मा, राजेंद्र वर्मा, दीपक तड़ागी, सूरज प्रहरी, सचिन वर्मा, मुक्तेश पचौली, नीरज साह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
मल्लीहाट की रामलीला 128 वें वर्ष पर प्रवेश कर रही है। लेकिन पात्रों की कमी और अपेक्षित जन सहयोग नहीं मिलने से आयोजकों ने रामलीला से हाथ खींच लिए हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भगवत शरण राय का कहना है कि अब मनोरंजनों के तमाम साधन होने के कारण लोगों का झुकाव रामलीला के प्रति कम हो गया है। लोगों का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण इस बार वृंदावन से रामलीला की टीम बुलाने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन
कमेटी के वरिष्ठ सदस्य सुरेश साह बताते हैं कि मल्लीहाट की रामलीला का सफर 1889 से मशाल के उजाले में शुरू हुआ था। बाद में केरोसिन की उपलब्धता के बाद पैट्रोमेक्स के उजाले में रामलीला का मंचन किया जाने लगा। तब तहसीलदार परमिट जारी कर केरोसिन उपलब्ध कराते थे। गौड़ी पावर हाउस बनने के बाद 1966 से रामलीला का आयोजन बिजली के उजाले में किया गया। यहां की रामलीला देखने को 60 किमी दूर सूखीढांग, चल्थी, मंच, बिस्ज्यूला, सिप्टी और पल्सों गांव से ग्रामीण मशाल जला कर जत्थों में आते थे।
विज्ञापन
राज्य बनने के बाद पहली बार आएंगे बाहरी कलाकार
128 साल पुरानी रामलीला में उत्तराखंड बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब स्थानीय कलाकार नहीं होंगे। वैसे इससे पूर्व तीन बार बाहर से टीम बुला कर रामलीला का मंचन हो चुका है। लेकिन तब बाहर से टीम बुलाने का मकसद लोगों को नयेपन का अहसास कराना था। कई दशकों से प्रांमटर की जिम्मेदारी निभा रहे भुवन पचौली कहते हैं कि 1990, 1995 और 1998 में रामलीला मंचन के लिए बाहर से टीम बुलाई गई थी।
पांच लाख रुपये से मंदिर का सुंदरीकरण होगा
मल्लीहाट की रामलीला में इस बार वृंदावन की टीम रामलीला का मंचन करेगी। ये निर्णय अध्यक्ष भगवतशरण राय की अध्यक्षता और कोषाध्यक्ष विकास साह के संचालन में हुई बैठक में रविवार को हुई बैठक में लिया गया। रामलीला पहली नवरात्र से शुरू होगी। पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से मिले पांच लाख रुपये से नागनाथ मंदिर के सुंदरीकरण कराया जाएगा। पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी, भुवन पचौली, सज्जन वर्मा, रवींद्र तड़ागी, कुंदन वर्मा, देवेंद्र वर्मा, राजेंद्र वर्मा, दीपक तड़ागी, सूरज प्रहरी, सचिन वर्मा, मुक्तेश पचौली, नीरज साह आदि मौजूद थे।