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Champawat News: बगेड़ी के लोगों के लिए नहीं है स्वास्थ्य व्यवस्था
Sat, 06 Apr 2024 11:07 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 06 Apr 2024 11:07 PM IST
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चंपावत के बगेड़ी गांव में बीमार को डोली से लाते ग्रामीण। फाइल फोटो
चंपावत। जिला मुख्यालय से 27 किमी की दूर स्थित बगेड़ी ग्राम पंचायत की आबादी के लिए स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए 27 किमी दूरी जिला अस्पताल आना पड़ता है। पहले सात किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं और फिर 20 किमी वाहन का सफर कर अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों के लिए बीमार लोगों के लिए इलाज कराना मुश्किल होता है।
आगर, हैडिंगा, बगेड़ी, बजौन, भेंतोला, आम खेत, फुरक्याजाला आदि दर्जनों गांव की करीब पांच हजार से अधिक आबादी है। इसके बाद भी क्षेत्र में लोगों के लिए स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटी मोटी बीमारियों के लिए भी लोगों को 27 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है।
आने जाने में लोगों के 240 रुपये खर्च हो जाते हैं। अगर वाहन मिला तो ठीक नहीं तो लोगों को 1500 रुपये में वाहन बुक कर अस्पताल आना पड़ता है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि अगर गांव के लोग क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए पत्र दें तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। मानकों के अनुसार गांव की आबादी स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए पर्याप्त है।
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गांव तक नहीं आती है एएनएम
चंपावत। जिले में किसी प्रकार का भी टीकाकरण होता है तो एएनएम गांव तक नहीं आती है। वह गांव लोगों को फोन से सूचना देकर टीकाकरण के लिए बच्चे, गर्भवती आदि को सड़क तक बुलाती हैं। वहां पर टीकाकरण कर वापस चली जाती हैं। ऐसे में कई बार सड़क तक जाने और वापस गांव तक आने में काफी दिक्कतें होती है।
कोट
गांव के लोगों को स्वास्थ सुविधा के लिए 54 किमी दौड़ लगानी पड़ती है। वाहन मिलना भी आसान नहीं होता है। 54 किमी की यात्रा के लिए 240 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। - सुरेश जोशी ग्रामीण।
कोट
गांव की गर्भवती और बीमारों को डोली के सहारे सड़क तक लाते हैं। कई बार रात के समय बीमारों को अस्पताल तक लाना बड़ा मुश्किल होता है। अगर क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खुल जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। - गिरीश चंद्र जोशी, ग्रामीण।
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आगर, हैडिंगा, बगेड़ी, बजौन, भेंतोला, आम खेत, फुरक्याजाला आदि दर्जनों गांव की करीब पांच हजार से अधिक आबादी है। इसके बाद भी क्षेत्र में लोगों के लिए स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटी मोटी बीमारियों के लिए भी लोगों को 27 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है।
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आने जाने में लोगों के 240 रुपये खर्च हो जाते हैं। अगर वाहन मिला तो ठीक नहीं तो लोगों को 1500 रुपये में वाहन बुक कर अस्पताल आना पड़ता है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि अगर गांव के लोग क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए पत्र दें तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। मानकों के अनुसार गांव की आबादी स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए पर्याप्त है।
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गांव तक नहीं आती है एएनएम
चंपावत। जिले में किसी प्रकार का भी टीकाकरण होता है तो एएनएम गांव तक नहीं आती है। वह गांव लोगों को फोन से सूचना देकर टीकाकरण के लिए बच्चे, गर्भवती आदि को सड़क तक बुलाती हैं। वहां पर टीकाकरण कर वापस चली जाती हैं। ऐसे में कई बार सड़क तक जाने और वापस गांव तक आने में काफी दिक्कतें होती है।
कोट
गांव के लोगों को स्वास्थ सुविधा के लिए 54 किमी दौड़ लगानी पड़ती है। वाहन मिलना भी आसान नहीं होता है। 54 किमी की यात्रा के लिए 240 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। - सुरेश जोशी ग्रामीण।
कोट
गांव की गर्भवती और बीमारों को डोली के सहारे सड़क तक लाते हैं। कई बार रात के समय बीमारों को अस्पताल तक लाना बड़ा मुश्किल होता है। अगर क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खुल जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। - गिरीश चंद्र जोशी, ग्रामीण।