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तो चंपावत से विधानसभा पहुंचेंगे पूर्व मुख्यमंत्री!
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चंपावत। कोरोना काल में चंपावत जिले में शनिवार को एकाएक सियासी हलचल तेज हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चंपावत जिले से चुनाव लड़ने की चर्चा सोशल मीडिया में वायरल होने से यहां एकाएक हलचल तेज हो गई। चंपावत जिले की दोनों विधानसभा सीट अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। अल्मोड़ा लोकसभा सीट का हरीश रावत तीन बार प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।
चंपावत जिले में दो विधानसभा सीट लोहाघाट व चंपावत हैं। उत्तराखंड बनने के बाद से इन सीटों पर दो बार कांग्रेस व दो बार भाजपा काबिज रही। इस वक्त यहां दोनों सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। शनिवार को सोशल मीडिया में चंपावत जिले से अगला चुनाव लड़ने की चर्चा ने यहां एकाएक राजनीतिक पारा बढ़ा दिया। इसने कांग्रेस के अलावा भाजपा में भी हलचल बढ़ा दी।
बता दें कि हरीश रावत का सियासी सफर 1980 में अल्मोड़ा लोकसभा सीट से शुरू हुआ। तब उन्होंने इस सीट से भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराया था। यहां से रावत ने लगातार तीन बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। लेकिन इसके बाद 1991, 1996, 1998 व 1999 के लोकसभा चुनाव में श्री रावत लगातार चुनाव लड़े। 2004 में अल्मोड़ा सीट से हरीश रावत की पत्नी रेणु रावत ने चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी बची सिंह रावत ने उन्हें हरा दिया।
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कांग्रेस ने दो महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चंपावत जिले से विधानसभा चुनाव लड़ने का न्योता दिया था। ये इलाका पूर्व सीएम हरीश रावत के लिए जाना-पहचाना है। उनके आने से कांग्रेस को पहाड़ की सभी 14 सीटों में लाभ होगा।
उत्तम देऊ,
जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, चंपावत।
पूर्व सीएम हरीश रावत के सियासी सफर का आगाज पहाड़ से ही हुआ था। उनके इस क्षेत्र में आने से न केवल क्षेत्र को कद्दावर प्रतिनिधि मिलेगा, बल्कि संगठन की ताकत भी बढ़ेगी। मैं खुद भी उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह करूंगा।
हेमेश खर्कवाल,
पूर्व विधायक, चंपावत।
सोशल मीडिया में कांग्रेस और पूर्व सीएम हरीश रावत को लेकर चल रही चर्चा उनका आंतरिक मामला है। कांग्रेस से कौन प्रत्याशी होगा, भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मोहन अधिकारी,
जिला मीडिया प्रभारी,
भाजपा।
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चंपावत जिले में दो विधानसभा सीट लोहाघाट व चंपावत हैं। उत्तराखंड बनने के बाद से इन सीटों पर दो बार कांग्रेस व दो बार भाजपा काबिज रही। इस वक्त यहां दोनों सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। शनिवार को सोशल मीडिया में चंपावत जिले से अगला चुनाव लड़ने की चर्चा ने यहां एकाएक राजनीतिक पारा बढ़ा दिया। इसने कांग्रेस के अलावा भाजपा में भी हलचल बढ़ा दी।
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बता दें कि हरीश रावत का सियासी सफर 1980 में अल्मोड़ा लोकसभा सीट से शुरू हुआ। तब उन्होंने इस सीट से भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराया था। यहां से रावत ने लगातार तीन बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। लेकिन इसके बाद 1991, 1996, 1998 व 1999 के लोकसभा चुनाव में श्री रावत लगातार चुनाव लड़े। 2004 में अल्मोड़ा सीट से हरीश रावत की पत्नी रेणु रावत ने चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी बची सिंह रावत ने उन्हें हरा दिया।
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कांग्रेस ने दो महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चंपावत जिले से विधानसभा चुनाव लड़ने का न्योता दिया था। ये इलाका पूर्व सीएम हरीश रावत के लिए जाना-पहचाना है। उनके आने से कांग्रेस को पहाड़ की सभी 14 सीटों में लाभ होगा।
उत्तम देऊ,
जिलाध्यक्ष, कांग्रेस, चंपावत।
पूर्व सीएम हरीश रावत के सियासी सफर का आगाज पहाड़ से ही हुआ था। उनके इस क्षेत्र में आने से न केवल क्षेत्र को कद्दावर प्रतिनिधि मिलेगा, बल्कि संगठन की ताकत भी बढ़ेगी। मैं खुद भी उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह करूंगा।
हेमेश खर्कवाल,
पूर्व विधायक, चंपावत।
सोशल मीडिया में कांग्रेस और पूर्व सीएम हरीश रावत को लेकर चल रही चर्चा उनका आंतरिक मामला है। कांग्रेस से कौन प्रत्याशी होगा, भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मोहन अधिकारी,
जिला मीडिया प्रभारी,
भाजपा।